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ट्रेनों में यात्री चढ़े तो लेकिन डरते-डरते
Updated Mon, 21 Aug 2017 12:25 AM IST
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मथुरा। चाहे प्लेटफार्म एक हो या पांच। ट्रेन के इंतजार में बैठे लोगों की जुबान पर उत्कल एक्सप्रेस हादसे का ही जिक्र था। लोग कह रहे थे कि अब तो ट्रेन हादसे भी सड़क दुर्घटनाओं की तरह से आम होने लगे हैं। कब कहां क्या हो जाए कुछ पता ही नहीं। मथुरा जंक्शन के प्लेटफार्म से यात्री ट्रेन में चढ़ तो रहे थे लेकिन डरते-डरते।
मथुरा जंक्शन के सभी नौ प्लेटफार्म की यही स्थिति थी। प्लेटफार्म संख्या एक पर दिल्ली जाने के लिए बैठे शशांक गुप्ता का कहना था कि आमतौर पर लोग सोचते हैं कि सड़क मार्ग के तुलना में रेल रूट अच्छा रहता है। ट्रेन में सफर सुरक्षित है। लेकिन अब तो ट्रेन का सफर सबसे खतरनाक लगने लगा है। ब्रज दर्शन करके परिवार के साथ लौट रहे गाजियाबाद कवि नगर निवासी मेवाराम शंखधार बोले, पहले कभी पांच साल दस साल में छोटे मोटे ट्रेन हादसे हो जाया करते थे। लेकिन अब तो हर महीने कहीं न कहीं ट्रेन पटरी से उतर जा रही है।
प्लेटफार्म संख्या दो पर मौजूद देवेश राणा का कहना था कि अब तो ट्रेन में चढ़ते हुए डर लगने लगा है। सरकार ने सफर तो महंगा कर दिया लेकिन सहूलियत नहीं दी जा रही है। ट्रैक खराब पड़े हैं। पटरियां चटकी हुई हैं लेकिन कोई ध्यान ही नहीं दे रहा। रेलवे लाइन की नियमित चेकिंग होनी चाहिए। मथुरा से दिल्ली के लिए गए बिहारी गुप्ता भी बहुत बेचैन थे। बोले, साठ साल की उम्र हो गई है। बड़ी दूर-दूर तक के सफर ट्रेन में किए हैं। अकेले जाने में कभी बेचैनी नहीं हुई। लेकिन अब जिस तरह से आए दिन हादसों के बारे में पता चल रहा है डर सा लगा रहता है। प्लेटफार्म संख्या सात पर अपनी ट्रेन के इंतजार में बैठी मालती गुप्ता का कहना था कि जब घर से निकली थीं तब भी डर लग रहा था। बच्चे भी कह रहे थे कि बस से चली जाओ। लेकिन फिर सोचा कि रिजर्वेशन है लिहाजा ट्रेन से ही चलते हैं। ट्रेन का सफर आरामदायक तो होता ही है। लेकिन इन घटनाओं से यात्रियों को डराना शुरू कर दिया है।
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ट्रेन के इंतजार में भटकते रहे यात्री
मथुरा। जिन लोगों का उत्कल एक्सप्रेस से रिजर्वेशन था उनके लिए रेलवे ने कोई दूसरी ट्रेन की व्यवस्था नहीं की। यह लोग ट्रेन के इंतजार में भटकते रहे। लोगों का कहना था कि उत्कल एक्सप्रेस की जगह रेलवे प्रशासन को दूसरी ट्रेन चलानी चाहिए थी।
रविवार को मथुरा से उत्कल एक्सप्रेस में 20 से भी ज्यादा रिजर्वेशन थे। किसी को छत्तीसगढ़ जाना था तो किसी को कहीं दूसरे शहर में। वृंदावन के रामदेव चतुर्वेदी, लव कुमार, पुष्प चतुर्वेदी, शंभु शरण, माधव, मोनी और श्याम सुंदर ने बताया कि हमने तो उत्कल एक्सप्रेस में डेढ़ महीने पहले रिजर्वेशन कराया था। छत्तीसगढ़ में चांपा में जाना था। शनिवार की रात को भी वह रेलवे स्टेशन पर उत्कल एक्सप्रेस के बारे में जानकारी करने गए तो कहा गया कि ट्रेन बदले मार्ग से आएगी। किसी ने बताया ही नहीं कि ट्रेन रद्द हो गई है। आज जब स्टेशन पर पहुंचे तो उन्हें बताया गया है।
हेल्पलाइन पर रात भर घनघनाते रहे फोन
मथुरा। स्टेशन पर हेल्पलाइन भी खोली गई थी। दो नंबर जारी किए गए थे। इन नंबरों पर सारी रात फोन घनघनाते रहे। शनिवार से लेकर रविवार तक 150 फोन आए। जिसका कोई अपना इस ट्रेन से मथुरा के लिए गया था वह बेचैन रहे। बार बार फोन लगाकर जानकारी करते रहे। रविवार को भी तमाम फोन हेल्पलाइन पर पहुंचे थे।
बदले रूट से निकाली गई उत्कल एक्सप्रेस
मथुरा। रविवार को हरिद्वार जाने वाली उत्कल एक्सप्रेस को बदले मार्ग से निकाला गया। इस ट्रेन को मथुरा से दिल्ली और फिर दिल्ली से पानीपत होकर सहारनपुर होते हुए हरिद्वार निकाला गया। मुजफ्फरनगर में हादसा होने के बाद इस ट्रेन का रूट बदला गया है। रेल अफसरों का कहना है कि जब तक रूट सही नहीं हो जाता इसी रूट से ट्रेन चलेगी। उत्कल एक्सप्रेस में यात्रा कर रहे लोग भी डरे हुए थे। हर कोच में शनिवार को हुए हादसे का ही जिक्र था।
देर रात तक बताते रहे कि उत्कल आएगी
मथुरा। उत्कल एक्सप्रेस से उड़ीसा, मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ राज्य के जिलों की यात्रा करने वाले यात्रियों को शनिवार को ट्रेन आने की गलत जानकारी रेलवे अफसर देते रहे। रात 11 बजे तक बताते रहे कि यात्रियों को रविवार को पुरी की ओर जाने वाली ट्रेन मिलेगी। इस पर यात्री अपराह्न तीन बजे पुरी को जाने वाली ट्रेन पकड़ने के लिए स्टेशन पहुंच गए। वृंदावन निवासी रामदत्त मौनी ने बताया कि उन्होंने रात्रि 11 बजे तक ट्रेन मिल जाने को इंन्क्वायरी पर फोन कर पूछा और ऑनलाइन ट्रेन की जानकारी ली तो उसमें ट्रेन रविवार को मिलना बताया। बताया कि जब वे सामान लेकर जंक्शन पहुंचे तो पुरी जाने वाली उत्कल एक्सप्रेस रद्द बताई गई। बताया कि यदि यह जानकारी उनको मैसेज से या किसी तरह मिल जाती तो वे हीराकुंड या कोई और ट्रेन पकड़कर चांपा चले जाते।
उत्कल के 30 यात्रियों ने रिजर्वेशन कराए रद्द
मथुरा। हरिद्वार से पुरी जाने वाली कलिंग उत्कल एक्सप्रेस के मुजफ्फरनगर में दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद ट्रेन रद्द कर दी गई। इस ट्रेन से बिलासपुर, चांपा, कटनी, सागर, जाने वाले 30 यात्रियों ने मथुरा जंक्शन जाकर रिजर्वेशन केंद्र पर टिकट रद्द कराईं। इसमें 20 हजार से अधिक रुपया रेलवे ने यात्रियों को वापस किया गया।
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मथुरा जंक्शन के सभी नौ प्लेटफार्म की यही स्थिति थी। प्लेटफार्म संख्या एक पर दिल्ली जाने के लिए बैठे शशांक गुप्ता का कहना था कि आमतौर पर लोग सोचते हैं कि सड़क मार्ग के तुलना में रेल रूट अच्छा रहता है। ट्रेन में सफर सुरक्षित है। लेकिन अब तो ट्रेन का सफर सबसे खतरनाक लगने लगा है। ब्रज दर्शन करके परिवार के साथ लौट रहे गाजियाबाद कवि नगर निवासी मेवाराम शंखधार बोले, पहले कभी पांच साल दस साल में छोटे मोटे ट्रेन हादसे हो जाया करते थे। लेकिन अब तो हर महीने कहीं न कहीं ट्रेन पटरी से उतर जा रही है।
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प्लेटफार्म संख्या दो पर मौजूद देवेश राणा का कहना था कि अब तो ट्रेन में चढ़ते हुए डर लगने लगा है। सरकार ने सफर तो महंगा कर दिया लेकिन सहूलियत नहीं दी जा रही है। ट्रैक खराब पड़े हैं। पटरियां चटकी हुई हैं लेकिन कोई ध्यान ही नहीं दे रहा। रेलवे लाइन की नियमित चेकिंग होनी चाहिए। मथुरा से दिल्ली के लिए गए बिहारी गुप्ता भी बहुत बेचैन थे। बोले, साठ साल की उम्र हो गई है। बड़ी दूर-दूर तक के सफर ट्रेन में किए हैं। अकेले जाने में कभी बेचैनी नहीं हुई। लेकिन अब जिस तरह से आए दिन हादसों के बारे में पता चल रहा है डर सा लगा रहता है। प्लेटफार्म संख्या सात पर अपनी ट्रेन के इंतजार में बैठी मालती गुप्ता का कहना था कि जब घर से निकली थीं तब भी डर लग रहा था। बच्चे भी कह रहे थे कि बस से चली जाओ। लेकिन फिर सोचा कि रिजर्वेशन है लिहाजा ट्रेन से ही चलते हैं। ट्रेन का सफर आरामदायक तो होता ही है। लेकिन इन घटनाओं से यात्रियों को डराना शुरू कर दिया है।
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ट्रेन के इंतजार में भटकते रहे यात्री
मथुरा। जिन लोगों का उत्कल एक्सप्रेस से रिजर्वेशन था उनके लिए रेलवे ने कोई दूसरी ट्रेन की व्यवस्था नहीं की। यह लोग ट्रेन के इंतजार में भटकते रहे। लोगों का कहना था कि उत्कल एक्सप्रेस की जगह रेलवे प्रशासन को दूसरी ट्रेन चलानी चाहिए थी।
रविवार को मथुरा से उत्कल एक्सप्रेस में 20 से भी ज्यादा रिजर्वेशन थे। किसी को छत्तीसगढ़ जाना था तो किसी को कहीं दूसरे शहर में। वृंदावन के रामदेव चतुर्वेदी, लव कुमार, पुष्प चतुर्वेदी, शंभु शरण, माधव, मोनी और श्याम सुंदर ने बताया कि हमने तो उत्कल एक्सप्रेस में डेढ़ महीने पहले रिजर्वेशन कराया था। छत्तीसगढ़ में चांपा में जाना था। शनिवार की रात को भी वह रेलवे स्टेशन पर उत्कल एक्सप्रेस के बारे में जानकारी करने गए तो कहा गया कि ट्रेन बदले मार्ग से आएगी। किसी ने बताया ही नहीं कि ट्रेन रद्द हो गई है। आज जब स्टेशन पर पहुंचे तो उन्हें बताया गया है।
हेल्पलाइन पर रात भर घनघनाते रहे फोन
मथुरा। स्टेशन पर हेल्पलाइन भी खोली गई थी। दो नंबर जारी किए गए थे। इन नंबरों पर सारी रात फोन घनघनाते रहे। शनिवार से लेकर रविवार तक 150 फोन आए। जिसका कोई अपना इस ट्रेन से मथुरा के लिए गया था वह बेचैन रहे। बार बार फोन लगाकर जानकारी करते रहे। रविवार को भी तमाम फोन हेल्पलाइन पर पहुंचे थे।
बदले रूट से निकाली गई उत्कल एक्सप्रेस
मथुरा। रविवार को हरिद्वार जाने वाली उत्कल एक्सप्रेस को बदले मार्ग से निकाला गया। इस ट्रेन को मथुरा से दिल्ली और फिर दिल्ली से पानीपत होकर सहारनपुर होते हुए हरिद्वार निकाला गया। मुजफ्फरनगर में हादसा होने के बाद इस ट्रेन का रूट बदला गया है। रेल अफसरों का कहना है कि जब तक रूट सही नहीं हो जाता इसी रूट से ट्रेन चलेगी। उत्कल एक्सप्रेस में यात्रा कर रहे लोग भी डरे हुए थे। हर कोच में शनिवार को हुए हादसे का ही जिक्र था।
देर रात तक बताते रहे कि उत्कल आएगी
मथुरा। उत्कल एक्सप्रेस से उड़ीसा, मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ राज्य के जिलों की यात्रा करने वाले यात्रियों को शनिवार को ट्रेन आने की गलत जानकारी रेलवे अफसर देते रहे। रात 11 बजे तक बताते रहे कि यात्रियों को रविवार को पुरी की ओर जाने वाली ट्रेन मिलेगी। इस पर यात्री अपराह्न तीन बजे पुरी को जाने वाली ट्रेन पकड़ने के लिए स्टेशन पहुंच गए। वृंदावन निवासी रामदत्त मौनी ने बताया कि उन्होंने रात्रि 11 बजे तक ट्रेन मिल जाने को इंन्क्वायरी पर फोन कर पूछा और ऑनलाइन ट्रेन की जानकारी ली तो उसमें ट्रेन रविवार को मिलना बताया। बताया कि जब वे सामान लेकर जंक्शन पहुंचे तो पुरी जाने वाली उत्कल एक्सप्रेस रद्द बताई गई। बताया कि यदि यह जानकारी उनको मैसेज से या किसी तरह मिल जाती तो वे हीराकुंड या कोई और ट्रेन पकड़कर चांपा चले जाते।
उत्कल के 30 यात्रियों ने रिजर्वेशन कराए रद्द
मथुरा। हरिद्वार से पुरी जाने वाली कलिंग उत्कल एक्सप्रेस के मुजफ्फरनगर में दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद ट्रेन रद्द कर दी गई। इस ट्रेन से बिलासपुर, चांपा, कटनी, सागर, जाने वाले 30 यात्रियों ने मथुरा जंक्शन जाकर रिजर्वेशन केंद्र पर टिकट रद्द कराईं। इसमें 20 हजार से अधिक रुपया रेलवे ने यात्रियों को वापस किया गया।