{"_id":"5953f6c64f1c1baa1b8b470c","slug":"201498674886-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जैनाचार्य विद्या सागर के जयकारे से गूंजी घटयात्रा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जैनाचार्य विद्या सागर के जयकारे से गूंजी घटयात्रा
Updated Thu, 29 Jun 2017 12:11 AM IST
विज्ञापन
घटयात्रा में शामिल महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फिरोजाबाद। आचार्य विद्या सागर महाराज की 50वीं दीक्षा जयंती को संयम स्वर्ण महोत्सव के रूप में बुधवार को धूमधाम से मनाया गया। सुहागनगरी में गाजे-बाजे के साथ घटयात्रा निकाली गई। पाठशालाओं के बच्चों ने महाराज के संदेशों का प्रचार किया।
सुबह साढे़ सात बजे भगवान चंद्रप्रभु भगवान का अभिषेक किया गया। आचार्य विद्या सागर महाराज का सामूहिक पूजन हुआ। लोगों ने चंद्रप्रभु मंदिर से घटयात्रा निकाली। पाठशाला के बच्चे जैनाचार्य के संदेशों से लिखी पट्टिका लेकर चल रहे थे। महिलाएं सिर पर कलश लिए चल रही थी। आचार्य की झांकी को देखकर लोग भावविभोर हो उठे।
धर्मयात्रा सदर बाजार होते हुए छदामीलाल जैन मंदिर पहुंची। जहां कीर्ति स्तंभ स्थापित किया गया। मुख्य शिला महावीर जैन मुन्नाबाबू ने रखी। अन्य शिलाएं वीरेंद्र जैन रैंमजा, प्रमोद जैन सोनल, ललित रपरिया, अशोक जैन तुलसी बिहार, प्रमोद जैन राजा ने रखी। ताम्र कलश, ताम्र दीपक, चांदी के सिक्के और स्वास्तिक एवं पंचरत्न आदि की स्थापना की गई। विद्या सागर महाराज के शिष्य अन्नू भैयाजी ने मंत्रोच्चारण किया।
विज्ञापन
शाम को चंद्रप्रभु मंदिर में 50 दीपों से आरती की गई। रात्रि में वर्धमान महिला जैन मिलन एवं समाज के लोगों द्वारा ‘विद्याधर से विद्या सागर तक’ नृत्य नाटिका प्रस्तुत की। महोत्सव में अरुण जैन पीली कोठी, विजय जैन देवता, अजय जैन, मुकेश जैन, डा. महेंद्र जैन, पीयूष जैन, केके जैन, रतन जैन आदि रहे।
विज्ञापन
सुबह साढे़ सात बजे भगवान चंद्रप्रभु भगवान का अभिषेक किया गया। आचार्य विद्या सागर महाराज का सामूहिक पूजन हुआ। लोगों ने चंद्रप्रभु मंदिर से घटयात्रा निकाली। पाठशाला के बच्चे जैनाचार्य के संदेशों से लिखी पट्टिका लेकर चल रहे थे। महिलाएं सिर पर कलश लिए चल रही थी। आचार्य की झांकी को देखकर लोग भावविभोर हो उठे।
विज्ञापन
धर्मयात्रा सदर बाजार होते हुए छदामीलाल जैन मंदिर पहुंची। जहां कीर्ति स्तंभ स्थापित किया गया। मुख्य शिला महावीर जैन मुन्नाबाबू ने रखी। अन्य शिलाएं वीरेंद्र जैन रैंमजा, प्रमोद जैन सोनल, ललित रपरिया, अशोक जैन तुलसी बिहार, प्रमोद जैन राजा ने रखी। ताम्र कलश, ताम्र दीपक, चांदी के सिक्के और स्वास्तिक एवं पंचरत्न आदि की स्थापना की गई। विद्या सागर महाराज के शिष्य अन्नू भैयाजी ने मंत्रोच्चारण किया।
विज्ञापन
शाम को चंद्रप्रभु मंदिर में 50 दीपों से आरती की गई। रात्रि में वर्धमान महिला जैन मिलन एवं समाज के लोगों द्वारा ‘विद्याधर से विद्या सागर तक’ नृत्य नाटिका प्रस्तुत की। महोत्सव में अरुण जैन पीली कोठी, विजय जैन देवता, अजय जैन, मुकेश जैन, डा. महेंद्र जैन, पीयूष जैन, केके जैन, रतन जैन आदि रहे।