{"_id":"6a4600683654ef790d0180fb","slug":"200-crore-crypto-fraud-alleged-fir-filed-against-business-associate-over-misappropriation-2026-07-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"200 करोड़ की धनराशि का गबन: दोस्त निकला दगाबाज, निजी लाभ के लिए लगाई रकम; पुलिस ने दर्ज की FIR","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
200 करोड़ की धनराशि का गबन: दोस्त निकला दगाबाज, निजी लाभ के लिए लगाई रकम; पुलिस ने दर्ज की FIR
Thu, 02 Jul 2026 11:38 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Thu, 02 Jul 2026 11:38 AM IST
सार
आगरा में एक ब्लॉकचेन कंपनी के संस्थापक के पिता की शिकायत पर कारोबारी सहयोगी समेत चार लोगों के खिलाफ करीब 200 करोड़ रुपये की धनराशि और डिजिटल परिसंपत्तियों के कथित गबन का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि साक्ष्यों और सभी पक्षों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
FIR Demo
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
आगरा के सिकंदरा थाने में कोर्ट के आदेश पर एक कंपनी ने 200 करोड़ रुपये की धनराशि, डिजिटल परिसंपत्तियों के दुरुपयोग, गबन और अनधिकृत हस्तांतरण के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई है। आरोप कंपनी के ही सहयोगी पर है। पीड़ित ने कंपनी के डाटा में भी हेरफेर की बात कही है। इसमें तीन नामजद और तीन अज्ञात आरोपी बनाए गए हैं। पुलिस का कहना है कि साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई होगी।
आवास विकास कॉलोनी सेक्टर-9 निवासी सुरेश द्विवेदी ने कोर्ट में प्रार्थनापत्र दिया था। इसमें कहा कि बेटे प्रतीक द्विवेदी ने सीरी ब्लॉक चेन लिमिटेड को विकसित किया था। इसमें देश-विदेश के कई निवेशकों ने करोड़ों निवेश किया। तभी उसके संपर्क में प्रतीक गौरी नामक युवक आया। उसने खुद को योग्य सहयोगी के रूप में प्रस्तुत किया। उसने कंपनी के वित्तीय एवं तकनीकी संचालन पर अपना नियंत्रण कर लिया। मित्रता को देखते हुए प्रतीक द्विवेदी ने उसे डिजिटल वॉलेट और वित्तीय प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका दे दी। बाद में पता चला कि कंपनी के खातों, डिजिटल परिसंपत्तियों और निवेशकों की धनराशि के संबंध में विसंगतियां हैं। इस पर उससे जानकारी मांगी। मगर वह टालमटोल करने लगा।
शिकायतकर्ता के आरोप के मुताबिक, बाद में सामने आया कि प्रतीक गौरी ने अपने पिता तरुण और भाई पार्थ के साथ मिलकर कंपनी एवं निवेशकों की लगभग 200 करोड़ रुपये की धनराशि एवं डिजिटल परिसंपत्तियों का दुरुपयोग किया है। गबन और अनधिकृत हस्तांतरण भी किया गया।
विज्ञापन
मामले में पुलिस से शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। डीसीपी सिटी सय्यद अली अब्बास ने बताया कि मामला कंपनी की रकम के गबन का है। निवेशकों के बारे में भी जानकारी की जाएगी। जिन पर आरोप हैं, उनके भी बयान लिए जाएंगे। पूर्व में भी प्राथमिकी दर्ज होने की बात कही गई है। उनकी भी जानकारी ली जाएगी।
निजी लाभ के लिए उपयोग
शिकायतकर्ता का आरोप है कि कंपनी की धनराशि का उपयोग निजी लाभ में किया गया है। वास्तविक स्थिति को छिपाने के लिए रिकॉर्ड और डाटा में भी छेड़छाड़ की गई। निवेशकों ने जवाब मांगा तो झूठे और गलत आरोप लगाए गए। कंपनी के करोड़ों रुपये का उपयोग निजी संपत्ति खरीदने में भी किया गया।
विज्ञापन
आवास विकास कॉलोनी सेक्टर-9 निवासी सुरेश द्विवेदी ने कोर्ट में प्रार्थनापत्र दिया था। इसमें कहा कि बेटे प्रतीक द्विवेदी ने सीरी ब्लॉक चेन लिमिटेड को विकसित किया था। इसमें देश-विदेश के कई निवेशकों ने करोड़ों निवेश किया। तभी उसके संपर्क में प्रतीक गौरी नामक युवक आया। उसने खुद को योग्य सहयोगी के रूप में प्रस्तुत किया। उसने कंपनी के वित्तीय एवं तकनीकी संचालन पर अपना नियंत्रण कर लिया। मित्रता को देखते हुए प्रतीक द्विवेदी ने उसे डिजिटल वॉलेट और वित्तीय प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका दे दी। बाद में पता चला कि कंपनी के खातों, डिजिटल परिसंपत्तियों और निवेशकों की धनराशि के संबंध में विसंगतियां हैं। इस पर उससे जानकारी मांगी। मगर वह टालमटोल करने लगा।
विज्ञापन
शिकायतकर्ता के आरोप के मुताबिक, बाद में सामने आया कि प्रतीक गौरी ने अपने पिता तरुण और भाई पार्थ के साथ मिलकर कंपनी एवं निवेशकों की लगभग 200 करोड़ रुपये की धनराशि एवं डिजिटल परिसंपत्तियों का दुरुपयोग किया है। गबन और अनधिकृत हस्तांतरण भी किया गया।
विज्ञापन
मामले में पुलिस से शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। डीसीपी सिटी सय्यद अली अब्बास ने बताया कि मामला कंपनी की रकम के गबन का है। निवेशकों के बारे में भी जानकारी की जाएगी। जिन पर आरोप हैं, उनके भी बयान लिए जाएंगे। पूर्व में भी प्राथमिकी दर्ज होने की बात कही गई है। उनकी भी जानकारी ली जाएगी।
निजी लाभ के लिए उपयोग
शिकायतकर्ता का आरोप है कि कंपनी की धनराशि का उपयोग निजी लाभ में किया गया है। वास्तविक स्थिति को छिपाने के लिए रिकॉर्ड और डाटा में भी छेड़छाड़ की गई। निवेशकों ने जवाब मांगा तो झूठे और गलत आरोप लगाए गए। कंपनी के करोड़ों रुपये का उपयोग निजी संपत्ति खरीदने में भी किया गया।