Mainpuri News: 20 हजार बच्चों को नहीं मिला स्वेटर, सरकारी स्कूलों में ठिठुर रहा बचपन
जिले के 1909 परिषदीय स्कूलों में 1.60 लाख छात्र-छात्राएं शिक्षा सत्र 2022-23 के लिए पंजीकृत हैं। अभी तक 20 हजार छात्र-छात्राओं के अभिभावकों के खातों में धनराशि नहीं भेजी जा सकी है।
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मैनपुरी जिले के परिषदीय स्कूलों में 1.60 लाख बच्चे पंजीकृत हैं। इनमें से 20 हजार बच्चों को स्वेटर के लिए धनराशि नहीं मिली है। सर्दी अब लोगों को परेशान करने लगी है। लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग को इससे कोई फर्क नहीं है। बिना स्वेटर बच्चे स्कूलों में ठिठुर रहे हैं। प्रशासन भी इस पर ध्यान नहीं दे रहा है।
परिषदीय स्कूलों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के लिए शासन ने ड्रेस, स्वेटर और कॉपी किताबों के लिए धनराशि भेजने का निर्णय लिया है। शासनादेश के तहत प्रत्येक बच्चे के लिए 1200 रुपये की धनराशि अभिभावकों के खातों में उपलब्ध कराए जाने का प्रावधान है। जिले के 1909 परिषदीय स्कूलों में 1.60 लाख छात्र-छात्राएं शिक्षा सत्र 2022-23 के लिए पंजीकृत हैं। इनके अभिभावकों के खातों में 30 अक्तूबर तक 1200 रुपये की धनराशि भेजी जानी थी लेकिन अभी तक जिले के 20 हजार छात्र-छात्राओं के अभिभावकों के खातों में यह धनराशि नहीं भेजी जा सकी है।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि बैंक में अभिभावकों के खाते सक्रिय न होने और छात्र-छात्राओं के पास आधार कार्ड आदि की व्यवस्था न होने के कारण यह समस्या बैंक की तरफ से पैदा हुई है। ऑनलाइन धनराशि शासन स्तर से स्थानांतरित की जा रही है लेकिन खाता संख्या अपडेट न होने के कारण यह समस्या खड़ी हुई है। गलती भले ही किसी स्तर पर हो लेकिन सर्दियों के बीच परिषीय स्कूल में जाने वाले बच्चे ठिठुरते हुए दिखाई दे रहे हैं।
बिना जूतों के ही स्कूल पहुंच रहे बच्चे
परिषदीय स्कूलों के बच्चों के अभिभावकों के खातों मे धनराशि न पहुंचने के कारण बच्चों को जूते भी अभिभावक उपलब्ध नहीं करा सके हैं। स्कूल जाने वाले बच्चों को देखा जा रहा है कि व सर्दियों के बीच भी बिना जूतों के ही चप्पल में स्कूल पहुंच रहे हैं।
शिविर लगाकर आधार बनवाने के हैं आदेश
शासन ने छात्र-छात्राओं के आधार की समस्या को दूर कराने के लिए खंड शिक्षाधिकारियों को स्कूलों में शिविर लगाकर आधारकार्ड बनवाने के आदेश दिए हैं लेकिन इसके बाद भी 15 हजार से अधिक छात्र-छात्राएं ऐसे हैं जिनके आधार में या तो संशोधन नहीं हो सका या फिर आधार ही नहीं बन सका। वहीं अभिभावकों के खातों को सक्रिय बनाने के लिए भी प्रधानाध्यापकों को जिम्मेदारी दी गई थी कि वे अभिभावकों को बैंक ले जाकर उनके खाते सक्रिय कराएं लेकिन इसके बाद भी यह काम पूरा नहीं हो सका।
बीएसए दीपिका गुप्ता ने बताया कि धनराशि आवंटित करने के लिए शासन स्तर से ऑनलाइन व्यवस्था है। कई बार प्रधानाध्यापकों और खंड शिक्षाधिकारियों को संशोधन आदि के लिए आदेश जारी किए गए। कुछ अभिभावक भी लापरवाही कर रहे हैं वे जरूरी अभिलेख उपलब्ध नहीं करा रहे और बैंक जाने को तैयार नहीं हैं जिसके चलते यह समस्या है। प्रयास जारी हैं शीघ्र ही सभी का संशोधन कराया जाए जिससे कि धनराशि उनके खातों में पहुंच सके।