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पुलिस ने नहीं की कार्रवाई तो 483 पीड़ितों ने खटखटाया अदालत का दरवाजा
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मैनपुरी। चालू वर्ष में थाने में सुनवाई नहीं होने पर रिपोर्ट लिखाने के लिए 483 पीड़ित अदालत पहुंचे हैं। पीड़ितों की शिकायत पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पुलिस को रिपोर्ट दर्ज कर जांच करने के निर्देश दिए। पुलिस ने कुछ मामलों में एफआर लगाई तो कुछ में अपराध का संक्षिप्तीकरण कर दिया। न्याय पाने के लिए 59 पीड़ितों को अदालत में प्रोटेस्ट पिटीशन तक दायर करना पड़ा।
आंकड़े बताते हैं थाने में रिपोर्ट दर्ज नहीं होने पर चालू वर्ष में रिपोर्ट लिखाने के लिए 483 पीड़ित अदालत पहुंचे। अदालत के आदेश पर पुलिस ने रिपोर्ट तो लिखी, लेकिन 47 मामलों को झूठा बताकर उनमें एफआर लगा दी। हालांकि सभी मामलों में पीड़ितों ने न्याय पाने के लिए अदालत में प्रोटेस्ट पिटीशन दायर किया है।
पुलिस ने 67 मामलों में अपराध का संक्षिप्तीकरण करते हुए कोर्ट में चार्जशीट भेजी है। सीजेएम न्यायालय में 68 मामलों में न्यायालय से रिपोर्ट लिखने का आदेश होने की बजाए अदालत में सीधे ही शिकायत पर सुनवाई शुरू की गई है।
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अदालत के आदेश पर रिपोर्ट लिखाने के लिए पीड़ित सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत शिकायत करता है। शिकायत के साथ घटना के बाद थाने में सुनवाई नहीं होने पर पुलिस अधिकारी से की गई शिकायत के साक्ष्य सहित घटना के सर्मथन में शपथपत्र भी देता है। थाने से आख्या मंगाने के बाद मजिस्ट्रेट द्वारा संबंधित थाने की पुलिस को रिपोर्ट लिखने का आदेश दिया जाता है।
किसी घटना के बाद थाने में रिपोर्ट नहीं लिखे जाने पर पीड़ित धारा 156 (3) के तहत अदालत पहुंचता है। अदालत के आदेश के बाद भी पुलिस सही तरीके से जांच नहीं करती है। एफआर लगाने के साथ ही अपराध का संक्षिप्तीकरण तक कर देती है। मजबूरी में पीड़ित को प्रोटेस्ट पिटीशन तक दायर करना पड़ता है।
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आंकड़े बताते हैं थाने में रिपोर्ट दर्ज नहीं होने पर चालू वर्ष में रिपोर्ट लिखाने के लिए 483 पीड़ित अदालत पहुंचे। अदालत के आदेश पर पुलिस ने रिपोर्ट तो लिखी, लेकिन 47 मामलों को झूठा बताकर उनमें एफआर लगा दी। हालांकि सभी मामलों में पीड़ितों ने न्याय पाने के लिए अदालत में प्रोटेस्ट पिटीशन दायर किया है।
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पुलिस ने 67 मामलों में अपराध का संक्षिप्तीकरण करते हुए कोर्ट में चार्जशीट भेजी है। सीजेएम न्यायालय में 68 मामलों में न्यायालय से रिपोर्ट लिखने का आदेश होने की बजाए अदालत में सीधे ही शिकायत पर सुनवाई शुरू की गई है।
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अदालत के आदेश पर रिपोर्ट लिखाने के लिए पीड़ित सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत शिकायत करता है। शिकायत के साथ घटना के बाद थाने में सुनवाई नहीं होने पर पुलिस अधिकारी से की गई शिकायत के साक्ष्य सहित घटना के सर्मथन में शपथपत्र भी देता है। थाने से आख्या मंगाने के बाद मजिस्ट्रेट द्वारा संबंधित थाने की पुलिस को रिपोर्ट लिखने का आदेश दिया जाता है।
किसी घटना के बाद थाने में रिपोर्ट नहीं लिखे जाने पर पीड़ित धारा 156 (3) के तहत अदालत पहुंचता है। अदालत के आदेश के बाद भी पुलिस सही तरीके से जांच नहीं करती है। एफआर लगाने के साथ ही अपराध का संक्षिप्तीकरण तक कर देती है। मजबूरी में पीड़ित को प्रोटेस्ट पिटीशन तक दायर करना पड़ता है।