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सुशिक्षा से ही बनेगा अच्छा समाज: जेडी
Updated Thu, 11 Oct 2018 11:24 PM IST
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एटा। सुशिक्षा से ही समाज को योग्य डॉक्टर, इंजीनियर एवं अच्छे पड़ोसी मिलेंगे। बिना ज्ञान के डिग्री समाज के लिए घातक बन रही है। गुरुवार को आर्य विद्यालय में आयोजित शिक्षा समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक जितेंद्र कुमार मलिक ने कहा कि बैठक का लक्ष्य शैक्षिक व्यवस्थाओं में सुधार सुनिश्चित करना है। प्रयोगशालाओं एवं पुस्तकालयों की सक्रियता के भी निर्देश दिए।
मलिक ने कहा कि नकल विहीन परीक्षाओं के लिए नियमित संचालित स्कूलों को ही बोर्ड परीक्षा केंद्र बनाया जाएगा। दो सीसीटीवी कैमरे व व्याइस रिकार्डर के बाद नकल तो दूर कानाफूसी पर भी अंकुश लग जाएगा। अधिकांश विद्यालयों में अद्र्धवार्षिक परीक्षाएं न होने पर चेतावनी देते हुए कहा कि अभी भी सुधार के लिए समय है। अगली बैठक में आपका रिपोर्ट कार्ड लिया जाएगा।
डीआईओएस एनडी वर्मा ने जिले की प्रगति आख्या प्रस्तुत करते हुए कहा कि विद्यालयों में शैक्षिक पंचांग क्रियान्वयन हो रहा है। एडीआईओएस केएस वर्मा ने शैक्षिक सुधार के लिए और प्रयास की जरूरत बताते हुए शिक्षा अधिकारियेां का स्वागत किया। प्रधानाचार्य डॉ ज्ञानेंद्र कुदेशिया ने प्रतीक चिन्ह देकर मुख्य अतिथि का सम्मान किया। संचालन मनोज तिवारी ने किया। उपस्थित प्रधानाचार्यों में डॉ विनीता तिवारी, अभिलाख सिंह यादव, डीके सिंह, शैलशशि राज यादव, सुनीता भटनागर, डॉ चिंतामणि वशिष्ठ, डॉ मनोज सक्सेना, डॉ राजेश यादव, दुर्वेश यादव, गंगाबख्श यादव आदि प्रमुख हैं।
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शिक्षकों के भरोसे परिवारों का भविष्य
प्रधानाचार्य शिक्षकों को जिम्मेदारी का अहसास कराते हुए जेडी मलिक ने कहा कि अभिभावक आपके भरोसे अपने नौनिहालों को छोड़ते हैं। स्कूल के छह घंटे के लिए आप केवल टीचर ही नहीं वरन बच्चों के अभिभावक भी होते हैं। ऐसे में आपकी जिम्मेदारी कई गुना बढ़ जाती है।
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प्रबंधकों की बैठक की जरूरत
एटा। एडिड विद्यालयों की वित्तीय एवं अन्य व्यवस्थाओं के लिए प्रधानाचार्य से ज्यादा प्रबंधक जिम्मेदार हैं। ऐसे में सत्र में एक बैठक प्रबंधको के साथ भी होनी चाहिए। जेडी के इस प्रस्ताव का प्रधानाचार्यो ने स्वागत किया है।
मलिक ने कहा कि नकल विहीन परीक्षाओं के लिए नियमित संचालित स्कूलों को ही बोर्ड परीक्षा केंद्र बनाया जाएगा। दो सीसीटीवी कैमरे व व्याइस रिकार्डर के बाद नकल तो दूर कानाफूसी पर भी अंकुश लग जाएगा। अधिकांश विद्यालयों में अद्र्धवार्षिक परीक्षाएं न होने पर चेतावनी देते हुए कहा कि अभी भी सुधार के लिए समय है। अगली बैठक में आपका रिपोर्ट कार्ड लिया जाएगा।
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डीआईओएस एनडी वर्मा ने जिले की प्रगति आख्या प्रस्तुत करते हुए कहा कि विद्यालयों में शैक्षिक पंचांग क्रियान्वयन हो रहा है। एडीआईओएस केएस वर्मा ने शैक्षिक सुधार के लिए और प्रयास की जरूरत बताते हुए शिक्षा अधिकारियेां का स्वागत किया। प्रधानाचार्य डॉ ज्ञानेंद्र कुदेशिया ने प्रतीक चिन्ह देकर मुख्य अतिथि का सम्मान किया। संचालन मनोज तिवारी ने किया। उपस्थित प्रधानाचार्यों में डॉ विनीता तिवारी, अभिलाख सिंह यादव, डीके सिंह, शैलशशि राज यादव, सुनीता भटनागर, डॉ चिंतामणि वशिष्ठ, डॉ मनोज सक्सेना, डॉ राजेश यादव, दुर्वेश यादव, गंगाबख्श यादव आदि प्रमुख हैं।
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शिक्षकों के भरोसे परिवारों का भविष्य
प्रधानाचार्य शिक्षकों को जिम्मेदारी का अहसास कराते हुए जेडी मलिक ने कहा कि अभिभावक आपके भरोसे अपने नौनिहालों को छोड़ते हैं। स्कूल के छह घंटे के लिए आप केवल टीचर ही नहीं वरन बच्चों के अभिभावक भी होते हैं। ऐसे में आपकी जिम्मेदारी कई गुना बढ़ जाती है।
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प्रबंधकों की बैठक की जरूरत
एटा। एडिड विद्यालयों की वित्तीय एवं अन्य व्यवस्थाओं के लिए प्रधानाचार्य से ज्यादा प्रबंधक जिम्मेदार हैं। ऐसे में सत्र में एक बैठक प्रबंधको के साथ भी होनी चाहिए। जेडी के इस प्रस्ताव का प्रधानाचार्यो ने स्वागत किया है।