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मानकों पर खरी नहीं उतर रहीं प्रतीक्षारत इकाईयां
Updated Tue, 06 Mar 2018 11:47 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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फिरोजाबाद। सुहागनगरी में सालों से प्रतीक्षारत इकाइयां पर्यावरण मंत्रालय के मानकों पर खरी नहीं उतर रहीं हैं। मंत्रालय के आदेश में उद्योग विभाग के अफसर प्रतीक्षारत इकाइयों की प्रजेंट स्टेट्स रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं, लेकिन तमाम कमियां सामने आ रही हैं।
टीटीजेड में बढ़ते प्रदूषण के खिलाफ लगातार शिकायतें मिलने पर मंडलायुक्त ने जनवरी-2015 से नई इकाइयों की स्थापना पर रोक लगा दी है। यही नहीं क्षमता विस्तार पर बैन लगा दिया है। गेल गैस लि. को निर्देश दिए हैं कि बिना अनुमति किसी इकाई को गैस न दी जाए। टीटीजेड में नई इकाइयों की स्थापना पर रोक लगने से करोड़ों का निवेश करने वाली इकाइयां गैस नहीं मिलने से चालू नहीं हो पा रहीं। उद्यमी पिछले तीन साल से लगातार लखनऊ-दिल्ली की दौड़ लगा रहे हैं।
पर्यावरण मंत्रालय, एनजीटी से लेकर टीटीजेड तक पहल हो रही है, लेकिन अभीतक राहत की उम्मीद नजर नहीं आ रही। पर्यावरण मंत्रालय ने प्रतीक्षारत इकाइयों को गैस दिलाने की पहल शुरू की थी। मंत्रालय प्रतीक्षारत इकाइयों रिकार्ड उद्योग विभाग से तलब किया है। पर्यावरण मंत्रालय ने उद्योग विभाग से पूछा है कि प्रतीक्षारत इकाइयों में ऐसी कितनी इकाइयां थी, जो जनवरी-2015 से पहले उत्पादन के लिए तैयार थीं।
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प्रतीक्षारत इकाइयों द्वारा किन-किन विभागों की एनओसी ली है। कितनी इकाइयों ने गेल से अनुबंध की प्रक्रिया पूरी की है। पर्यावरण मंत्रालय का पत्र आने के बाद उद्योग विभाग के अफसर प्रतीक्षारत इकाइयों की पत्रावली नए सिरे से खंगाल रहे हैं। पत्रावली में कई कमियां सामने आ रही हैं। उद्योग विभाग पत्रावली के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर रहा है।
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टीटीजेड में बढ़ते प्रदूषण के खिलाफ लगातार शिकायतें मिलने पर मंडलायुक्त ने जनवरी-2015 से नई इकाइयों की स्थापना पर रोक लगा दी है। यही नहीं क्षमता विस्तार पर बैन लगा दिया है। गेल गैस लि. को निर्देश दिए हैं कि बिना अनुमति किसी इकाई को गैस न दी जाए। टीटीजेड में नई इकाइयों की स्थापना पर रोक लगने से करोड़ों का निवेश करने वाली इकाइयां गैस नहीं मिलने से चालू नहीं हो पा रहीं। उद्यमी पिछले तीन साल से लगातार लखनऊ-दिल्ली की दौड़ लगा रहे हैं।
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पर्यावरण मंत्रालय, एनजीटी से लेकर टीटीजेड तक पहल हो रही है, लेकिन अभीतक राहत की उम्मीद नजर नहीं आ रही। पर्यावरण मंत्रालय ने प्रतीक्षारत इकाइयों को गैस दिलाने की पहल शुरू की थी। मंत्रालय प्रतीक्षारत इकाइयों रिकार्ड उद्योग विभाग से तलब किया है। पर्यावरण मंत्रालय ने उद्योग विभाग से पूछा है कि प्रतीक्षारत इकाइयों में ऐसी कितनी इकाइयां थी, जो जनवरी-2015 से पहले उत्पादन के लिए तैयार थीं।
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प्रतीक्षारत इकाइयों द्वारा किन-किन विभागों की एनओसी ली है। कितनी इकाइयों ने गेल से अनुबंध की प्रक्रिया पूरी की है। पर्यावरण मंत्रालय का पत्र आने के बाद उद्योग विभाग के अफसर प्रतीक्षारत इकाइयों की पत्रावली नए सिरे से खंगाल रहे हैं। पत्रावली में कई कमियां सामने आ रही हैं। उद्योग विभाग पत्रावली के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर रहा है।