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झूलते तार, सड़क पर भरा पानी बन रहा जानलेवा
Updated Wed, 01 Nov 2017 11:18 PM IST
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ट्यूलिप स्कूल के पास झूलते विद्युत तार
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एटा। शहर में झूलते विद्युत तार जानलेवा बन रहे हैं। आए दिन टूटने वाले तारों को लेकर परेशान लोगों की शिकायतों पर भी विभाग नजरअंदाज करता दिखाई दे रहा है। ऐसा लगता है कि शायद उन्हें हादसों का इंतजार है।
विद्युत निगम के सुरक्षित एवं सतत विद्युत आपूर्ति के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। ग्रामीण अंचल तो दूर शहरी खंड में भी व्यवस्थाएं सुचारु नहीं हो पा रहीं। एक प्रतिष्ठित स्कूल क्षेत्र में झूलते तार अव्यवस्थाओं की बानगी दे रहे हैं। शहर के निधौली रोड स्थित ट्यूलिप स्कूल के पास बिजली के झूलते तार जमीन से सिर्फ छह फुट की ऊंचाई तक आ गए हैं।
ऐसे में यहां से वाहन निकलना तो दूर पैदल चलने वाले भी असुरक्षित हो गए हैं। इतना ही नहीं आए दिन टूटने वाले तारों को लेकर आनेजाने वालों में दहशत बनी रहती है। सर्वाधिक खतरा स्कूली बच्चों का रहता है। बताते चलें कि यहां सुबह शाम हजारों स्कूली छात्र गुजरते हैं। वहीं अभिभावकों एवं राहगीरों की दिनभर भीड़ रहती है।
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नियमों की अनदेखी बन सकती जानलेवा
झूलते तारों का प्रमुख कारण विभागीय नियमों की अनदेखी बताई जा रही है। इस रोड पर अस्सी से अधिक उपभोक्ताओं के कनेक्शन हैं। लाइन से 150-200 मीटर दूर स्थित भवनों को नियमों को ताक पर रख बनाया गया है। विभागीय नियम के अनुसार लाइन एवं विद्युत पोल से अधिकतम तीस मीटर दूरी तक ही केबिल खींचकर संयोजन दिया जा सकता है। जबकि इसको नजरअंदाज करते हुए सौ डेढ़ सौ मीटर तक की केबलें खींच दी गई हैं। जो बिना सपोर्ट के झूलने लगती हैं।
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विद्युत निगम के सुरक्षित एवं सतत विद्युत आपूर्ति के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। ग्रामीण अंचल तो दूर शहरी खंड में भी व्यवस्थाएं सुचारु नहीं हो पा रहीं। एक प्रतिष्ठित स्कूल क्षेत्र में झूलते तार अव्यवस्थाओं की बानगी दे रहे हैं। शहर के निधौली रोड स्थित ट्यूलिप स्कूल के पास बिजली के झूलते तार जमीन से सिर्फ छह फुट की ऊंचाई तक आ गए हैं।
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ऐसे में यहां से वाहन निकलना तो दूर पैदल चलने वाले भी असुरक्षित हो गए हैं। इतना ही नहीं आए दिन टूटने वाले तारों को लेकर आनेजाने वालों में दहशत बनी रहती है। सर्वाधिक खतरा स्कूली बच्चों का रहता है। बताते चलें कि यहां सुबह शाम हजारों स्कूली छात्र गुजरते हैं। वहीं अभिभावकों एवं राहगीरों की दिनभर भीड़ रहती है।
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नियमों की अनदेखी बन सकती जानलेवा
झूलते तारों का प्रमुख कारण विभागीय नियमों की अनदेखी बताई जा रही है। इस रोड पर अस्सी से अधिक उपभोक्ताओं के कनेक्शन हैं। लाइन से 150-200 मीटर दूर स्थित भवनों को नियमों को ताक पर रख बनाया गया है। विभागीय नियम के अनुसार लाइन एवं विद्युत पोल से अधिकतम तीस मीटर दूरी तक ही केबिल खींचकर संयोजन दिया जा सकता है। जबकि इसको नजरअंदाज करते हुए सौ डेढ़ सौ मीटर तक की केबलें खींच दी गई हैं। जो बिना सपोर्ट के झूलने लगती हैं।