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जयकारों से गूंजी सुहाग नगरी
Updated Wed, 13 Sep 2017 12:53 AM IST
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फिरोजाबाद। आचार्य विमल सागर महाराज के 102वें जन्म जयंती महोत्सव के उपलक्ष्य में मंगलवार को भव्य शोभायात्रा गाजेबाजे के साथ निकाली गई। भक्ति भावना के साथ श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
नसियाजी मंदिर में विनयांजली सभा में जैन विद्वानों ने आचार्य विमल सागर महाराज के बारे में चर्चा की। जयपुर, अहमदाबाद, शिकोहाबाद, दिल्ली, मुंबई, कलकत्ता आदि क्षेत्रों से आए श्रद्धालु भी महोत्सव का हिस्सा बने।
जैनाचार्य चैत्यसागर महाराज ससंघ के सानिध्य में आयोजित चार दिवसीय जयंती महोत्सव के अंतिम दिन चंद्रप्रभु मंदिर से शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा मोहल्ला गंज, डाकखाना होते हुए नसियाजी मंदिर पहुंची।
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शोभायात्रा में आचार्य विमल सागर महाराज की झांकी सजाई गई। वहीं, प्रतिमा को इंद्र लेकर चल रहे थे। जैन ध्वज और घुड़ सवार शोभायात्रा के आगमन का संदेश देते रहे। वहीं, युवतियों द्वारा प्रस्तुत किए डांडिया नृत्य ने भी अनोखी आभा बिखेरी।
जगह-जगह शोभायात्रा का जैन समाज के लोगों ने स्वागत किया। शोभायात्रा संपन्न होने के बाद नसियाजी मंदिर में विनयांजली सभा का आयोजन किया गया। शुभारंभ उत्तरांचल तीर्थक्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष शैलेंद्र जैन ने दीप जलाकर किया।
चिरंजीलाल, मुंबई से पधारे आरके जैन, धर्मेंद्र जैन ने आचार्य विमल सागर महाराज के संस्मरण कराए। इंदौर से पधारे पंकज जैन ने भजनों से भावविभोर कर दिया। आचार्य विमल सागर महाराज की मूर्ति को चांदी के रथ में विराजमान किया। पालकी उठाने का सौभाग्य सुरेश जैन, संदीप जैन, गुलाबचंद्र, नितिन, अभिषेक, ललित को मिला।
देवशास्त्र, गुरु की आराधना करके व्यक्तित्व के धनी बने। फिरोजाबाद जिले के ग्राम कोसमा में जन्मे नेमीचंद्र जैन छुल्लक, एलक, मुनि दीक्षा के बाद आचार्य विमल सागर महाराज कहलाए। उन्होंने अपने जीवन को योग और सिद्ध मंत्रों के माध्यम से स्वयं का कल्याण किया।
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नसियाजी मंदिर में विनयांजली सभा में जैन विद्वानों ने आचार्य विमल सागर महाराज के बारे में चर्चा की। जयपुर, अहमदाबाद, शिकोहाबाद, दिल्ली, मुंबई, कलकत्ता आदि क्षेत्रों से आए श्रद्धालु भी महोत्सव का हिस्सा बने।
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जैनाचार्य चैत्यसागर महाराज ससंघ के सानिध्य में आयोजित चार दिवसीय जयंती महोत्सव के अंतिम दिन चंद्रप्रभु मंदिर से शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा मोहल्ला गंज, डाकखाना होते हुए नसियाजी मंदिर पहुंची।
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शोभायात्रा में आचार्य विमल सागर महाराज की झांकी सजाई गई। वहीं, प्रतिमा को इंद्र लेकर चल रहे थे। जैन ध्वज और घुड़ सवार शोभायात्रा के आगमन का संदेश देते रहे। वहीं, युवतियों द्वारा प्रस्तुत किए डांडिया नृत्य ने भी अनोखी आभा बिखेरी।
जगह-जगह शोभायात्रा का जैन समाज के लोगों ने स्वागत किया। शोभायात्रा संपन्न होने के बाद नसियाजी मंदिर में विनयांजली सभा का आयोजन किया गया। शुभारंभ उत्तरांचल तीर्थक्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष शैलेंद्र जैन ने दीप जलाकर किया।
चिरंजीलाल, मुंबई से पधारे आरके जैन, धर्मेंद्र जैन ने आचार्य विमल सागर महाराज के संस्मरण कराए। इंदौर से पधारे पंकज जैन ने भजनों से भावविभोर कर दिया। आचार्य विमल सागर महाराज की मूर्ति को चांदी के रथ में विराजमान किया। पालकी उठाने का सौभाग्य सुरेश जैन, संदीप जैन, गुलाबचंद्र, नितिन, अभिषेक, ललित को मिला।
देवशास्त्र, गुरु की आराधना करके व्यक्तित्व के धनी बने। फिरोजाबाद जिले के ग्राम कोसमा में जन्मे नेमीचंद्र जैन छुल्लक, एलक, मुनि दीक्षा के बाद आचार्य विमल सागर महाराज कहलाए। उन्होंने अपने जीवन को योग और सिद्ध मंत्रों के माध्यम से स्वयं का कल्याण किया।