{"_id":"596f99ce4f1c1b982d8b45f8","slug":"191500486094-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुहाग नगरी में अब भी जिंदा है बालश्रम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सुहाग नगरी में अब भी जिंदा है बालश्रम
Updated Wed, 19 Jul 2017 11:11 PM IST
विज्ञापन
फिरोजाबाद। सुहागनगरी से बालश्रम रूपी दाग धुला नहीं। ताजा सर्वे पर गौर करें शहर के ही साथ आसपास के गांव 4550 परिवारों के सर्वे में 8781 बालश्रमिक काम करने को विवश हैं। 4492 बालक तथा 4289 बालिकाएं हैं। 7572 खतरनाक व 1209 सामान्य रूप से काम कर रहे हैं। 3887 बालश्रमिक ऐसे हैं जिन्होंने अभी तक स्कूल का मुंह नहीं देखा।
शहर के एसआरके डिग्री कालेज समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष डा.उग्रसेन पांडेय के निर्देशन में कांच उद्योग को विश्व विख्यात सुहागनगरी में बालश्रम सर्वे करने को 30 छात्र-छात्राओं की टीम ने किया। दो माह तक चले सर्वे कार्य में टीम सुपरवीजन कार्य अमृता सिंह,कल्पना शर्मा, इरम जिया, शालिनी भटनागर,संध्या चौहान, प्रियाश्री व प्रिया जैन,सौरभ यादव, अंकुश गुप्ता के सुपरवीजन में टीमों ने शहर के सभी 42 वार्डों के साथ आस-पास के गांवों में बालश्रम सर्वे का काम किया।
4550 परिवारों में 3327 हिंदू परिवार,1172 मुस्लिम परिवार व एक ईसाई परिवार शामिल है। इनमें 378 सामान्य,1363 पिछड़े,1618 अनुसूचित जाति,18 अनु. जनजाति,1173 अल्पसंख्यक परिवार शामिल हैं। बाल श्रमिकों की मासिक आय दो सौ से तीन हजार रुपया तक है। अधिकांश दो से छह घंटे तक काम करते हैं। 2072 दो घंटे,3267 चार घंटे, 2604 छह घंटे, 687 आठ घंटे तक काम करते हैं।
विज्ञापन
8781 बालश्रमिकों में-चूड़ी झलाई-1092,चूड़ी जुड़ाई 563,बेलन 2484, रंगाई 52, फूट बजाना-29, कटाई 123, चूड़ी अन्य-123, दुकान में सहायक 30, मजदूरी-551, घरेलू कार्य 1961,अन्य 549। इनमें 8370 बालश्रमिक घरों पर,76 दुकान पर,कारखाने में 27,गोदाम में 110 व अन्य स्थानों पर 198 काम करते हैं।
समाजशास्त्र के विभागाध्यक्ष डॉ. यूएस पांडेय ने बुधवार को डीएम नेहा शर्मा की उपस्थिति में बालश्रमिकों के सर्वे की पूरी रिपोर्ट को प्रस्तुत किया। डीएम ने रिपोर्ट को देखने के ही साथ आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिया। शहर के प्रमुख उद्यमी ललितेश जैन,मोहनबाबू अग्रवाल के साथ अन्य लोग मौजूद थे।
विज्ञापन
शहर के एसआरके डिग्री कालेज समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष डा.उग्रसेन पांडेय के निर्देशन में कांच उद्योग को विश्व विख्यात सुहागनगरी में बालश्रम सर्वे करने को 30 छात्र-छात्राओं की टीम ने किया। दो माह तक चले सर्वे कार्य में टीम सुपरवीजन कार्य अमृता सिंह,कल्पना शर्मा, इरम जिया, शालिनी भटनागर,संध्या चौहान, प्रियाश्री व प्रिया जैन,सौरभ यादव, अंकुश गुप्ता के सुपरवीजन में टीमों ने शहर के सभी 42 वार्डों के साथ आस-पास के गांवों में बालश्रम सर्वे का काम किया।
विज्ञापन
4550 परिवारों में 3327 हिंदू परिवार,1172 मुस्लिम परिवार व एक ईसाई परिवार शामिल है। इनमें 378 सामान्य,1363 पिछड़े,1618 अनुसूचित जाति,18 अनु. जनजाति,1173 अल्पसंख्यक परिवार शामिल हैं। बाल श्रमिकों की मासिक आय दो सौ से तीन हजार रुपया तक है। अधिकांश दो से छह घंटे तक काम करते हैं। 2072 दो घंटे,3267 चार घंटे, 2604 छह घंटे, 687 आठ घंटे तक काम करते हैं।
विज्ञापन
8781 बालश्रमिकों में-चूड़ी झलाई-1092,चूड़ी जुड़ाई 563,बेलन 2484, रंगाई 52, फूट बजाना-29, कटाई 123, चूड़ी अन्य-123, दुकान में सहायक 30, मजदूरी-551, घरेलू कार्य 1961,अन्य 549। इनमें 8370 बालश्रमिक घरों पर,76 दुकान पर,कारखाने में 27,गोदाम में 110 व अन्य स्थानों पर 198 काम करते हैं।
समाजशास्त्र के विभागाध्यक्ष डॉ. यूएस पांडेय ने बुधवार को डीएम नेहा शर्मा की उपस्थिति में बालश्रमिकों के सर्वे की पूरी रिपोर्ट को प्रस्तुत किया। डीएम ने रिपोर्ट को देखने के ही साथ आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिया। शहर के प्रमुख उद्यमी ललितेश जैन,मोहनबाबू अग्रवाल के साथ अन्य लोग मौजूद थे।