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आलू के किसानों को अब नहीं देना होगा मंडी शुल्क
Updated Wed, 19 Jul 2017 11:23 PM IST
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कालाआम चौराहे पर सड़क पर बिखरा पड़ा आलू।
- फोटो : ब्यूरो
एटा। प्रदेश के आलू किसानों के लिए प्रोत्साहन नीति जारी कर दी गई है। अब किसानाें को मंडी में आलू बेचने पर मंडी शुल्क नहीं देना होगा। राज्य की सीमा या देश से बाहर आलू बेचने के लिए भेजने पर भी भाड़े पर सब्सिडी मिलेगी। योगी सरकार की नई प्रोत्साहन नीति से आलू उत्पादक किसानों और शीतगृह संचालकों में खुशी है।
शासन के विशेष सचिव द्वारा प्रोत्साहन नीति के संदर्भ में भेजे गए पत्र में कहा गया है कि निर्यात किया जाने वाले आलू ब्रांडेड होगा, तो मंडी परिषद ऐसे आलू पर किसान को 50 रुपये प्रति कुंतल की दर से ब्रांड प्रमोशन अनुदान देगी।
मंडी परिषद को आलू उत्पादक क्षेत्र में 1000 टन भंडारण क्षमता वाले वाले अस्थाई यार्ड बनाने के साथ हाफेड, एपीडा, बायर एवं सेलर मीट कराने के आदेश भी दिए हैं। आलू निर्यातकों और उत्पादकों को पोटैटो फैसिलिटेशन सोसाइटी की सदस्यता दिलाने के निर्देश भी दिए गए हैं। प्रोत्साहन नीति के तहत राज्य की सीमा से बाहर आलू भेजने पर खर्च होने वाले भाड़े पर अनुदान दिया जाएगा। जबकि राज्य के अंदर आलू भेजने पर 50 रुपये प्रति कुंतल की दर से या फिर भाड़े खर्च का 25 प्रतिशत मिलेगा। देश से बाहर आलू भेजने पर किसानाें को 200 रुपये प्रति कुंतल या परिवहन भाड़े का 25 प्रतिशत अनुदान मिलेगा।
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योगी सरकार की नीति से किसानों को एक फायदे
1.मंडी में आलू बेचने पर सेस और मंडी शुल्क से छूट
2.राज्य सीमा से बाहर आलू बेचने पर भाड़ा सब्सिडी
3.देश से बाहर आलू भेजने पर प्रति कुंतल सब्सिडी
4.50 रुपये प्रति कुंतल पर ब्रांड प्रमोशन अनुदान
5.आलू भंडारण के लिए अस्थाई यार्ड का निर्माण
6.पोटैटो फैसिलिटेशन सोसाइटी की किसानाें को सदस्यता
7.आलू उत्पादन क्षेत्र में बायर-सेलर मीट का आयोजन
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प्रदेश सरकार की बनाई गई प्रोत्साहन नीति आलू किसानों के लिए मददगार साबित होगी। हालांकि नीति को लेकर शासन से अभी तक गाइड लाइन नहीं मिली है। नई नीति से शीतगृह संचालकों और किसान दोनाें को फायदा होगा।
-अशोक कुमार सोलंकी
मंडी सचिव एटा
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शासन के विशेष सचिव द्वारा प्रोत्साहन नीति के संदर्भ में भेजे गए पत्र में कहा गया है कि निर्यात किया जाने वाले आलू ब्रांडेड होगा, तो मंडी परिषद ऐसे आलू पर किसान को 50 रुपये प्रति कुंतल की दर से ब्रांड प्रमोशन अनुदान देगी।
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मंडी परिषद को आलू उत्पादक क्षेत्र में 1000 टन भंडारण क्षमता वाले वाले अस्थाई यार्ड बनाने के साथ हाफेड, एपीडा, बायर एवं सेलर मीट कराने के आदेश भी दिए हैं। आलू निर्यातकों और उत्पादकों को पोटैटो फैसिलिटेशन सोसाइटी की सदस्यता दिलाने के निर्देश भी दिए गए हैं। प्रोत्साहन नीति के तहत राज्य की सीमा से बाहर आलू भेजने पर खर्च होने वाले भाड़े पर अनुदान दिया जाएगा। जबकि राज्य के अंदर आलू भेजने पर 50 रुपये प्रति कुंतल की दर से या फिर भाड़े खर्च का 25 प्रतिशत मिलेगा। देश से बाहर आलू भेजने पर किसानाें को 200 रुपये प्रति कुंतल या परिवहन भाड़े का 25 प्रतिशत अनुदान मिलेगा।
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योगी सरकार की नीति से किसानों को एक फायदे
1.मंडी में आलू बेचने पर सेस और मंडी शुल्क से छूट
2.राज्य सीमा से बाहर आलू बेचने पर भाड़ा सब्सिडी
3.देश से बाहर आलू भेजने पर प्रति कुंतल सब्सिडी
4.50 रुपये प्रति कुंतल पर ब्रांड प्रमोशन अनुदान
5.आलू भंडारण के लिए अस्थाई यार्ड का निर्माण
6.पोटैटो फैसिलिटेशन सोसाइटी की किसानाें को सदस्यता
7.आलू उत्पादन क्षेत्र में बायर-सेलर मीट का आयोजन
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प्रदेश सरकार की बनाई गई प्रोत्साहन नीति आलू किसानों के लिए मददगार साबित होगी। हालांकि नीति को लेकर शासन से अभी तक गाइड लाइन नहीं मिली है। नई नीति से शीतगृह संचालकों और किसान दोनाें को फायदा होगा।
-अशोक कुमार सोलंकी
मंडी सचिव एटा