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आबादी के पास कब्र खोदने पर सांप्रदायिक तनाव
Updated Sun, 09 Jul 2017 11:24 PM IST
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कब्र बंद करते लोग
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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बिछवां (मैनपुरी)। कस्बा में आबादी के समीप महिला का शव दफनाने लोग पहुंचे तो सांप्रदायिक तनाव फैल गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने समझाकर मामला शांत कराया। इसके बाद महिला के शव को मजार के पास दफनाया गया। वहीं समुदाय विशेष के खोदे गड्ढे बंद न करने पर एक बार फिर हंगामा हो गया। इसके बाद पुलिस की मौजूदगी में हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं ने गड्ढा बंद किया।
कस्बा के पास रहम तुल्लाअलह की मजार है। पास ही मस्जिद बनी है। मस्जिद के किनारे ही फकीर मुसलमानों का कब्रिस्तान है। गांव की निवासी तस्वीरन (60) पत्नी मीचूअली काफी दिनों से बीमार थी। उसकी रविवार की सुबह मौत हो गई। उनको दफनाने के लिए मुस्लिम समुदाय के लोगों ने आबादी के समीप एक कब्र खोद दी। जहां कब्र खोदी गई वहां से हिंदू आबादी पास ही है। आसपास के लोगों ने गांव वालों को बताया तो बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्रित हो गए। दूसरी ओर से मुस्लिम समुदाय के लोग भी आ गए। ग्रामीणों ने कब्र खोदने का विरोध किया लेकिन मुसलिम नहीं माने और उन्होंने कब्र को खोद दिया।
थोड़ी देर बाद हिंदू युवा वाहिनी के लोग मौके पर पहुंचे। उन्हें लोगोें ने बताया कि उक्त जमीन देवस्थान के नाम दर्ज है। इसके बाद भी समुदाय विशेष के लोग यहां शव दफनाना चाहते हैं। ग्रामीणों का कहना था कि जहां कब्रिस्तान है शव वहां दफनाया जाना चाहिए। सूचना पर थानाध्यक्ष बिछवां आरके सिंह पहुंचे। उन्होंने दोनों पक्षों को समझाया और शव को मजार के समीप दफनाने की बात कही। समुदाय विशेष के लोगों ने कहा कि एक बार कब्र खोदने के बाद बंद नहीं की जाती इसलिए यह संभव नहीं है। इसके बाद हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं ने खुद ही कब्र में गेहूं डालकर उसे बंद कर दिया। इसके बाद मामला शांत हो सका। इस दौरान हिंदू युवा वाहिनी के अजीत चौहान, सन्नू भदौरिया, सोनू चौहान आदि मौजूद थे।
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एसओ बिछवां का कहना है कि शव दफनाने के लेकर विवाद था लेकिन अब दोनों पक्ष संतुष्ट हैं और शांति बनी हुई है।
फिर हो सकता है विवाद
कस्बा में कब्रिस्तान को लेकर पहले भी बवाल हो चुका है। वर्षों से शवों को दफनाने का काम हो रहा है लेकिन एक भी जगह कागजों में कब्रिस्तान नहीं है इससे भविष्य में फिर से विवाद हो सकता है।
गांव बनखड़िया में लोग विवादित भूमि पर मुकदमा लड़ रहे हैं। वे उसे दो भागों में बांटना चाह रहे है। वहीं कस्बा बिछवां में भी यही आलम है। गांव के लोग आधी भूमि पर विशेष समुदाय व आधी भूमि पर देवस्थान बनाना चाहते है। जबकि दोनों जगह पर कहीं भी कब्रिस्तान मौजूद नहीं है।
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कस्बा के पास रहम तुल्लाअलह की मजार है। पास ही मस्जिद बनी है। मस्जिद के किनारे ही फकीर मुसलमानों का कब्रिस्तान है। गांव की निवासी तस्वीरन (60) पत्नी मीचूअली काफी दिनों से बीमार थी। उसकी रविवार की सुबह मौत हो गई। उनको दफनाने के लिए मुस्लिम समुदाय के लोगों ने आबादी के समीप एक कब्र खोद दी। जहां कब्र खोदी गई वहां से हिंदू आबादी पास ही है। आसपास के लोगों ने गांव वालों को बताया तो बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्रित हो गए। दूसरी ओर से मुस्लिम समुदाय के लोग भी आ गए। ग्रामीणों ने कब्र खोदने का विरोध किया लेकिन मुसलिम नहीं माने और उन्होंने कब्र को खोद दिया।
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थोड़ी देर बाद हिंदू युवा वाहिनी के लोग मौके पर पहुंचे। उन्हें लोगोें ने बताया कि उक्त जमीन देवस्थान के नाम दर्ज है। इसके बाद भी समुदाय विशेष के लोग यहां शव दफनाना चाहते हैं। ग्रामीणों का कहना था कि जहां कब्रिस्तान है शव वहां दफनाया जाना चाहिए। सूचना पर थानाध्यक्ष बिछवां आरके सिंह पहुंचे। उन्होंने दोनों पक्षों को समझाया और शव को मजार के समीप दफनाने की बात कही। समुदाय विशेष के लोगों ने कहा कि एक बार कब्र खोदने के बाद बंद नहीं की जाती इसलिए यह संभव नहीं है। इसके बाद हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं ने खुद ही कब्र में गेहूं डालकर उसे बंद कर दिया। इसके बाद मामला शांत हो सका। इस दौरान हिंदू युवा वाहिनी के अजीत चौहान, सन्नू भदौरिया, सोनू चौहान आदि मौजूद थे।
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एसओ बिछवां का कहना है कि शव दफनाने के लेकर विवाद था लेकिन अब दोनों पक्ष संतुष्ट हैं और शांति बनी हुई है।
फिर हो सकता है विवाद
कस्बा में कब्रिस्तान को लेकर पहले भी बवाल हो चुका है। वर्षों से शवों को दफनाने का काम हो रहा है लेकिन एक भी जगह कागजों में कब्रिस्तान नहीं है इससे भविष्य में फिर से विवाद हो सकता है।
गांव बनखड़िया में लोग विवादित भूमि पर मुकदमा लड़ रहे हैं। वे उसे दो भागों में बांटना चाह रहे है। वहीं कस्बा बिछवां में भी यही आलम है। गांव के लोग आधी भूमि पर विशेष समुदाय व आधी भूमि पर देवस्थान बनाना चाहते है। जबकि दोनों जगह पर कहीं भी कब्रिस्तान मौजूद नहीं है।