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आढ़तियों की समस्याओं को सुनने वाला कोई नहीं
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आढ़तियों की समस्याओं को सुनने वाला कोई नहीं
- फोटो : अमर उजाला
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एटा। आढ़तियों की समस्याओं का हल लंबे समय से नहीं हो रहा। लोकसभा चुनाव का समय है ऐसे में वे अपनी समस्या अपने जनप्रतिनिधियों के समक्ष रखना चाहते हैं। ताकि उनकी परेशानियों को दूर किया जा सके। लेकिन सरकार चुनने में पीछे नहीं रहेंगे और समय से पहुंचकर सबसे पहले मतदान करेंगे।
कृषि उत्पादन मंडी समिति में अमर उजाला फोकस कार्यक्रम में गल्ला व्यापारियों ने अपनी समस्याओं पर चर्चाएं की। यहां पर आढ़तियों का दर्द भी झलका, कार्यक्रम में किसान और मजदूर भी शामिल हुए। समस्याएं आढ़तियों की थी तो किसान और मजदूर भी अपनी बात कहने में पीछे नहीं रहे। आढ़तिया मंडी की समस्याओं को लेकर जूझ रहे हैं तो किसान लागत के अनुपात में समर्थन मूल्य कम होने का रोना रो रहे हैं। वहीं मजदूर महंगाई के हिसाब से मजदूरी कम होने से परेशान हैं।
मंडी समिति में नालियों का निर्माण नहीं कराया गया है, इसकी वजह से बारिश में पानी से सड़कें लबालब हो जाती हैं और दुकान में भी पानी घुस जाता है। महेश चंद्र वर्मा आढ़ती
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किसान की लागत नहीं निकल रही हैं और सरकारें किसान को खुशहाल होने का दावा करती हैं। जब तक लागत का दोगुना मूल्य नहीं मिलता है तब तक किसान परेशान होता रहेगा। राजेंद्र कुमार
सारे दिन मजदूरी करने के बाद महंगाई में परिवार का पेट भरना मुश्किल हो गया है। रसोई गैस के दाम सातवें आसमान पर हैं जिसको भरवाने में ही पसीने छूट जाते हैं। ओमवती देवी
गरीबों की सहायता करने की नेता बात करते हैं। मैं 70 साल की हो गई हॅू इसके बाद भी मेरी पेंशन नहीं बंधी है। कई बार नेताओं के यहां पर चक्कर काटे हैं पर कुछ नहीं हुआ। अजीजन
चुनाव जब भी आते हैं वायदे खूब किए जाते हैं, लेकिन पूरा कार्यकाल बीतने तक वायदे पूरे नहीं हो पाते। इस बार चुनाव में मतदान करने जाएंगे जरूर, पर नेता सोच समझकर चुनेंगे। सुरेंद्र कुमार गुप्ता
मतदान करने में सभी को भागीदारी बढ़ चढ़कर निभानी होगी, ताकि वोट के अधिकार का महत्व समझाया जा सके। मतदान चाहे जिसे करो, पर करो जरूर। दयाशंकर गुप्ता
सरकार बनने के बाद किसान की बात कोई नहीं सुनता है। किसान पानी, बिजली, सूखा, ओलावृष्टि से जूझता रहता है। लेकिन उसके हित की सोचने वाला कोई नहीं है। मुनव्वर हुसैन
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कृषि उत्पादन मंडी समिति में अमर उजाला फोकस कार्यक्रम में गल्ला व्यापारियों ने अपनी समस्याओं पर चर्चाएं की। यहां पर आढ़तियों का दर्द भी झलका, कार्यक्रम में किसान और मजदूर भी शामिल हुए। समस्याएं आढ़तियों की थी तो किसान और मजदूर भी अपनी बात कहने में पीछे नहीं रहे। आढ़तिया मंडी की समस्याओं को लेकर जूझ रहे हैं तो किसान लागत के अनुपात में समर्थन मूल्य कम होने का रोना रो रहे हैं। वहीं मजदूर महंगाई के हिसाब से मजदूरी कम होने से परेशान हैं।
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मंडी समिति में नालियों का निर्माण नहीं कराया गया है, इसकी वजह से बारिश में पानी से सड़कें लबालब हो जाती हैं और दुकान में भी पानी घुस जाता है। महेश चंद्र वर्मा आढ़ती
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किसान की लागत नहीं निकल रही हैं और सरकारें किसान को खुशहाल होने का दावा करती हैं। जब तक लागत का दोगुना मूल्य नहीं मिलता है तब तक किसान परेशान होता रहेगा। राजेंद्र कुमार
सारे दिन मजदूरी करने के बाद महंगाई में परिवार का पेट भरना मुश्किल हो गया है। रसोई गैस के दाम सातवें आसमान पर हैं जिसको भरवाने में ही पसीने छूट जाते हैं। ओमवती देवी
गरीबों की सहायता करने की नेता बात करते हैं। मैं 70 साल की हो गई हॅू इसके बाद भी मेरी पेंशन नहीं बंधी है। कई बार नेताओं के यहां पर चक्कर काटे हैं पर कुछ नहीं हुआ। अजीजन
चुनाव जब भी आते हैं वायदे खूब किए जाते हैं, लेकिन पूरा कार्यकाल बीतने तक वायदे पूरे नहीं हो पाते। इस बार चुनाव में मतदान करने जाएंगे जरूर, पर नेता सोच समझकर चुनेंगे। सुरेंद्र कुमार गुप्ता
मतदान करने में सभी को भागीदारी बढ़ चढ़कर निभानी होगी, ताकि वोट के अधिकार का महत्व समझाया जा सके। मतदान चाहे जिसे करो, पर करो जरूर। दयाशंकर गुप्ता
सरकार बनने के बाद किसान की बात कोई नहीं सुनता है। किसान पानी, बिजली, सूखा, ओलावृष्टि से जूझता रहता है। लेकिन उसके हित की सोचने वाला कोई नहीं है। मुनव्वर हुसैन