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बारिश ने बढ़ाई बाढ़ प्रभावित इलाकों के लोगों की मुसीबत

Sat, 25 Aug 2018 09:30 AM IST
Updated Sat, 25 Aug 2018 09:30 AM IST
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बारिश ने बढ़ाई बाढ़ प्रभावित इलाकों के लोगों की मुसीबत
ganga
कासगंज। पिछले 25 दिनों से जिले में बाढ़ का कहर लोगों को परेशान कर रहा है। का सामना कर रहे ग्रामीण लगातार परेशान हो रहे हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों के ग्रामीण बाढ़ और बारिश की मार एकसाथ झेलने को मजबूर हैं। वे समझ नहीं पा रहे कि इन हालातों में किया करें। लगातार गंगा में हो रहा उतार चढ़ाव उन्हें परेशान कर रहा है।
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शुक्रवार को गंगा के जलस्तर में फिर से 5 सेंटीमीटर का इजाफा हो गया। शनिवार को हरिद्वार और बिजनौर का डिस्चार्ज बढ़ने के कारण जलस्तर में और वृद्धि हो सकती है। गुुरुवार को जलस्तर में और राहत का अनुमान लगाया जा रहा था, लेकिन यह अनुमान भी गलत साबित हो गया। पहाड़ी इलाकों में जहां जबरदस्त बारिश के प्रभाव से गंगा में उफान है वहीं अब मैदानी इलाकों में भी बारिश का कहर होने के कारण जलस्तर में और वृद्धि होने की संभावना लगातार बनी हुई है। गुरुवार के मुकाबले हरिद्वार से करीब 38 हजार क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज बढ़ गया। वहीं बिजनौर से करीब 40 हजार क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज बढ़ गया। इस बड़े हुए डिस्चार्ज का प्रभाव नरौरा के डिस्चार्ज पर शनिवार को हो जाएगा जिससे जलस्तर में वृद्धि संभावित है। कछला ब्रिज पर गंगा का जलस्तर 163.50 के निशान पर था। बाढ़ के प्रभाव से 25 से अधिक गांव प्रभावित हैं। इन गांव के ग्रामीणों की दिनचर्या पूरी तरह से अस्त व्यस्त है।
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कच्चे मकानों, झोपड़ियों में रहने वाले लोग अपना बाढ़ से बचाव करते नजर आए। अजीतनगर के ग्रामीण राजेश कुमार ने बताया कि ग्रामीणों के सामने गंभीर संकट है। बाढ़ से निजात नहीं मिल पा रही। आखिर ग्रामीण कैसे अपना जीवन यापन करें। फसलें बर्बाद हो गईं। वहीं बमनपुरा के अमित ने बताया कि उनके इलाके में एक माह पहले से ग्रामीण बाढ़ के हालातों का सामना कर रहे हैं। किस्मत भी साथ नहीं दे रही।
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पशुपालन में हो रही परेशानी
कासगंज। बाढ़ प्रभावित इलाकों में पशुपालकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी पशुओं के चारे को लेकर है। खेतों में बाढ़ का पानी भरा होने के कारण चारे की कटाई नहीं हो पा रही। ऐसी स्थिति में पशुपालकों को पशुओं को चराने की समस्या पैदा हो गई है। रफातपुर के ग्रामीण रामपाल ने बताया कि पशुओं के लिए खासा परेशानी है। चारों तरफा बाढ़ का पानी और बारिश का पानी होने के कारण पशु एक स्थान पर ही बंधे रहते हैं यह स्थान भी कीचड़ य़ुक्त हो गया है। जिससे पशुओं को बीमारी लगने का खतरा है।

गंगा के जलस्तर में 5 सेंटीमीटर की वृद्धि हुई है। वहीं हरिद्वार और बिजनौर से डिस्चार्ज बढ़ा है। ऐसी स्थिति में जलस्तर और बढ़ सकता है। जिले के सभी बांध सुरक्षित हैं। एके सिंह, सहायक बाढ़ प्रभारी
डिस्चार्ज
नरौरा- 108575 क्यूसेक
बिजनौर- 107398 क्यूसेक
हरिद्वार- 82679 क्यूसेक
कछला गेज- 1163.50 मीटर के निशान पर।
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