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सुहागनगरी में नंबर दो का धंधा बीसी हुआ हाईप्रोफाइल
Updated Mon, 24 Jul 2017 12:23 AM IST
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फिरोजाबाद। सुहागनगरी में बीसी (कमेटी)का धंधा काफी पुराना है। वक्त के साथ धंधा हाईप्रोफाइल होता चला गया। विश्वास पर चलने वाले नंबर दो के धंधे में उद्योगपति, कारोबारियों के साथ चिकित्सकों का भी करोड़ों रुपया लगा हुआ है। बीसी में सदस्यों को दो से तीन प्रतिशत ब्याज मिलने का मुनाफा होता है। वहीं, बीसी संचालकों को और भी मोटा मुनाफा रहता है। शहर में तमाम ऐसे केस भी हैं जब बीसी के धंधे में लोगों का लाखों रुपया डूबा है।
बीसी का यह धंधा सुहागनगरी में कारोबारियों के बीच कई साल से चल रहा है। यह धंधा अचानक मोटी रकम की जरूरत होने पर आसानी से पैसा हासिल करने वालों के लिए फायदेमंद माना जाता है। इसमें नंबर एक की रोकड़ और लिखा-पढ़ी का कोई झंझट नहीं। लाखों का यह खेल अब करोड़ों तक पहुंच गया है। चूड़ी के गोदाम या कारखानों में होने वाली बैठकें पांच सितारा होटल से होते हुए मालदीव द्वीप, दुबई, सिंगापुर के होटलों में होने लगी हैं। इसके साथ ही बीसी के ड्रा के दौरान पार्टी के नाम पर नाच-गाने की चमक-दमक के साथ और भी कुछ शामिल हो गया।
कमेटी में दबंग चेहरे भी रखे जाते हैं
बीसी के खेल में शहर के कुछ नामी उद्योगपतियों के साथ-साथ कई डाक्टरों ने पैसा लगा रखा है। अलग-अलग कमेटियां हैं। अलग-अलग ग्रुप हैं। संरक्षण के लिए हरेक ग्रुुप में किसी न किसी दबंग चेहरे को शामिल किया गया है। ताकि हर महीने निवेश करने वालों में खौफ बना रहे है। जरूरत पड़ने पर डराने-धमाके वाले मामले भी सामने आते रहे हैं।
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सदस्यों का रुपये लेकर भाग चुके हैं कई बीसी संचालक
कांच नगरी में ऐसे भी तमाम केस हैं जहां बीसी डालने वाले कमेटी के संचालक (मुखिया) लाखों-करोड़ों रुपया समेट कर परिवार के साथ शहर ही छोड़ गए। लाखों का नुकसान झेला है तो कईयों ने लाखों का मुनाफा बीसी के धंधे से किया है।
बीसी के खेल में कार्ड की भी हुई एंट्री
बीसी के खेल में पिछले कुछ सालों से कार्ड एंट्री हुई है। संचालकों ने डीसी नाम दिया है। कार्ड लेकर हर महीने पैसा लिया जाता है। डीसी चलाने वाले एक तारीख निश्चित कर उसका ड्रा करता है। इस ड्रा के साथ पार्टी भी होती है। पार्टी में ड्रा होता है इसके साथ कुछ ईनाम भी रखे जाते हैं। पहली बार में जिसका ड्रा निकलता है वह निर्धारित की गई रकम लेकर बाहर हो जाता है। इस तरह एक-एक कर सदस्य बाहर होते जाते हैं। इसमें किसी को अधिक मुनाफा तो किसी को कम मुनाफा होता है।
क्या है बीसी
बीस लोगों की कमेटी बनाई जाती है। साथ ही बीसी की एक रकम सुनिश्चित की जाती है। इसके बाद हर माह ड्रा कर प्रत्येक विजेता को रुपया दिया जाता है। इसके लिए हर माह किस्तों में रुपये लिए जाते हैं। एक निश्चित तारीख निर्धारित की जाती है। कमेटी की बैठक में ड्रा होने पर पैसा उठाया जाता है।
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बीसी का यह धंधा सुहागनगरी में कारोबारियों के बीच कई साल से चल रहा है। यह धंधा अचानक मोटी रकम की जरूरत होने पर आसानी से पैसा हासिल करने वालों के लिए फायदेमंद माना जाता है। इसमें नंबर एक की रोकड़ और लिखा-पढ़ी का कोई झंझट नहीं। लाखों का यह खेल अब करोड़ों तक पहुंच गया है। चूड़ी के गोदाम या कारखानों में होने वाली बैठकें पांच सितारा होटल से होते हुए मालदीव द्वीप, दुबई, सिंगापुर के होटलों में होने लगी हैं। इसके साथ ही बीसी के ड्रा के दौरान पार्टी के नाम पर नाच-गाने की चमक-दमक के साथ और भी कुछ शामिल हो गया।
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कमेटी में दबंग चेहरे भी रखे जाते हैं
बीसी के खेल में शहर के कुछ नामी उद्योगपतियों के साथ-साथ कई डाक्टरों ने पैसा लगा रखा है। अलग-अलग कमेटियां हैं। अलग-अलग ग्रुप हैं। संरक्षण के लिए हरेक ग्रुुप में किसी न किसी दबंग चेहरे को शामिल किया गया है। ताकि हर महीने निवेश करने वालों में खौफ बना रहे है। जरूरत पड़ने पर डराने-धमाके वाले मामले भी सामने आते रहे हैं।
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सदस्यों का रुपये लेकर भाग चुके हैं कई बीसी संचालक
कांच नगरी में ऐसे भी तमाम केस हैं जहां बीसी डालने वाले कमेटी के संचालक (मुखिया) लाखों-करोड़ों रुपया समेट कर परिवार के साथ शहर ही छोड़ गए। लाखों का नुकसान झेला है तो कईयों ने लाखों का मुनाफा बीसी के धंधे से किया है।
बीसी के खेल में कार्ड की भी हुई एंट्री
बीसी के खेल में पिछले कुछ सालों से कार्ड एंट्री हुई है। संचालकों ने डीसी नाम दिया है। कार्ड लेकर हर महीने पैसा लिया जाता है। डीसी चलाने वाले एक तारीख निश्चित कर उसका ड्रा करता है। इस ड्रा के साथ पार्टी भी होती है। पार्टी में ड्रा होता है इसके साथ कुछ ईनाम भी रखे जाते हैं। पहली बार में जिसका ड्रा निकलता है वह निर्धारित की गई रकम लेकर बाहर हो जाता है। इस तरह एक-एक कर सदस्य बाहर होते जाते हैं। इसमें किसी को अधिक मुनाफा तो किसी को कम मुनाफा होता है।
क्या है बीसी
बीस लोगों की कमेटी बनाई जाती है। साथ ही बीसी की एक रकम सुनिश्चित की जाती है। इसके बाद हर माह ड्रा कर प्रत्येक विजेता को रुपया दिया जाता है। इसके लिए हर माह किस्तों में रुपये लिए जाते हैं। एक निश्चित तारीख निर्धारित की जाती है। कमेटी की बैठक में ड्रा होने पर पैसा उठाया जाता है।