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तो सैकड़ों गरीब बच्चे रह जाएंगे शिक्षा से वंचित
Updated Sun, 16 Jul 2017 11:39 PM IST
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फिरोजाबाद। बच्चों की पढ़ाई मुफलिसी के चलते बीच में बाधित न हो, इसलिए बाल अधिकार अधिनियम कानून बनाया गया। इसके तहत निजी स्कूलों में भी गरीब बच्चों को दाखिला देने की व्यवस्था की गई थी। मगर इस साल योजना में हुए कंप्यूटरीकरण से निर्धर सैकड़ों बच्चों को शिक्षा के अधिकार से वंचित होना पड़ रहा है। सैकड़ों आवेदन निरस्त हुए हैं, जिससे कान्वेंट में पढ़ने का सपना फिर अधूरा रह गया।
आरटीई एक्ट के तहत गरीब बच्चों का निजी स्कूल में 25 प्रतिशत कोटे के तहत कक्षा एक में दाखिला कराया जाता है। कक्षा आठवीं तक की फीस स्कूलों को सरकार मुहैया कराती है। इस बार आनलाइन एडमिशन की प्रक्रिया अपनाई गई। इसमें बड़ी संख्या में फार्म निरस्त हुए हैं। हालांकि निरस्त होने का कारण विभाग को भी स्पष्ट नहीं है।
मगर विभागीय लोग अंदाजा लगा रहे हैं कि एक स्कूल में रिक्त सीटों के सापेक्ष आवेदन ज्यादा करने से निरस्त हुआ है या फिर घर से स्कूल की दूरी ज्यादा होने से फार्म को निरस्त होने के कई और भी कारण हो सकते हैं। विभागीय लोगों का कहना है कि आरटीई एडमिशन में आनलाइन प्रक्रिया पहली बार अपनाई गई है, जो खामियां रह गई हैं। उन्हें शासन को बताया जाएगा। फिलहाल जितने भी आवेदन गरीब बच्चों के निरस्त हुए हैं उन्हें एक साल और बिना स्कूल जाएं इंतजार करना पडे़गा।
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छात्र विवेक का रामनगर स्थित एक स्कूल में आरटीई के तहत एडमिशन कराया गया। विभागीय और स्कूल संचालक की गली से बच्चे की फीस शासन ने नहीं आई तो इस साल आवेदन आनलाइन करा दिया गया। लेकिन इस बार भी बच्चे का एडमिशन नहीं हुआ तो स्कूल संचालक ने बच्चे को फीस न होने के कारण बाहर का रास्ता दिखाया।
सुहागनगर निवासी नितिन के पिता रिक्शा चलाते हैं। उनके पास न रहने को छत है और न ही बच्चे की पढ़ाई के लिए रुपये। अभिभावक ने बच्चे के एडमिशन के लिए आनलाइन आवेदन किया, लेकिन फार्म निरस्त कर दिया गया। अभिभावकों का कहना है कि बच्चे को स्कूल भेजने के लिए एक साल और इंतजार कर लेंगे।
रामनगर निवासी सुमित के पिता मजदूरी करते हैं। उन्होनें आरटीई के तहत सुमित का एडमिशन कराने को आनलाइन आवेदन किया लेकिन तीनों लाटरी में सुमित का नाम नहीं आया। दबरई बीएसए आफिस में गए, वहां कह दिया गया कि एडमिशन आनलाइन हुए हैं, हमारे हाथ में कुछ नहीं।
जिला बेसिक शिक्षाधिकारी सचिदानंद यादव ने बताया कि आरटीई एडमिशन प्रक्रिया के तहत आनलाइन प्रक्रिया अपनाई गई। इस बार शासन से ही निजी स्कूलों में दाखिला किया गया है। यहां स्थानीय स्तर से एडमिशन नहीं हुए हैं।
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आरटीई एक्ट के तहत गरीब बच्चों का निजी स्कूल में 25 प्रतिशत कोटे के तहत कक्षा एक में दाखिला कराया जाता है। कक्षा आठवीं तक की फीस स्कूलों को सरकार मुहैया कराती है। इस बार आनलाइन एडमिशन की प्रक्रिया अपनाई गई। इसमें बड़ी संख्या में फार्म निरस्त हुए हैं। हालांकि निरस्त होने का कारण विभाग को भी स्पष्ट नहीं है।
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मगर विभागीय लोग अंदाजा लगा रहे हैं कि एक स्कूल में रिक्त सीटों के सापेक्ष आवेदन ज्यादा करने से निरस्त हुआ है या फिर घर से स्कूल की दूरी ज्यादा होने से फार्म को निरस्त होने के कई और भी कारण हो सकते हैं। विभागीय लोगों का कहना है कि आरटीई एडमिशन में आनलाइन प्रक्रिया पहली बार अपनाई गई है, जो खामियां रह गई हैं। उन्हें शासन को बताया जाएगा। फिलहाल जितने भी आवेदन गरीब बच्चों के निरस्त हुए हैं उन्हें एक साल और बिना स्कूल जाएं इंतजार करना पडे़गा।
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छात्र विवेक का रामनगर स्थित एक स्कूल में आरटीई के तहत एडमिशन कराया गया। विभागीय और स्कूल संचालक की गली से बच्चे की फीस शासन ने नहीं आई तो इस साल आवेदन आनलाइन करा दिया गया। लेकिन इस बार भी बच्चे का एडमिशन नहीं हुआ तो स्कूल संचालक ने बच्चे को फीस न होने के कारण बाहर का रास्ता दिखाया।
सुहागनगर निवासी नितिन के पिता रिक्शा चलाते हैं। उनके पास न रहने को छत है और न ही बच्चे की पढ़ाई के लिए रुपये। अभिभावक ने बच्चे के एडमिशन के लिए आनलाइन आवेदन किया, लेकिन फार्म निरस्त कर दिया गया। अभिभावकों का कहना है कि बच्चे को स्कूल भेजने के लिए एक साल और इंतजार कर लेंगे।
रामनगर निवासी सुमित के पिता मजदूरी करते हैं। उन्होनें आरटीई के तहत सुमित का एडमिशन कराने को आनलाइन आवेदन किया लेकिन तीनों लाटरी में सुमित का नाम नहीं आया। दबरई बीएसए आफिस में गए, वहां कह दिया गया कि एडमिशन आनलाइन हुए हैं, हमारे हाथ में कुछ नहीं।
जिला बेसिक शिक्षाधिकारी सचिदानंद यादव ने बताया कि आरटीई एडमिशन प्रक्रिया के तहत आनलाइन प्रक्रिया अपनाई गई। इस बार शासन से ही निजी स्कूलों में दाखिला किया गया है। यहां स्थानीय स्तर से एडमिशन नहीं हुए हैं।