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नाला निर्माण घोटाले में पालिका के अधिशासी अधिकारी निलंबित
Updated Tue, 20 Jun 2017 11:51 PM IST
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निलंबित हुए अधिशासी अधिकरी
- फोटो : अमर उजाला
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टूंडला (फिरोजाबाद)। नाला निर्माण में हुए घोटाले में मुख्य सचिव नगर विकास कुमार कमलेश ने पालिका के अधिशासी अधिकारी को निलंबित कर दिया है। जांच में दोषी पाए जाने पर यह कार्रवाई की गई है। मामले में जेई को भी पहले ही निलंबित किया जा चुुका है। साथ ही आठ ठेकेदारों के विरुद्ध एफआईआर भी हो चुकी है।
मामले में डीएम नेहा शर्मा की संस्तुति के बाद निर्माण करा रहे जेई सोमेश वर्मा को निलंबित कर दिया गया था। डीएम ने नाला निर्माण करा रहे आठ ठेकेदारों के विरुद्ध एफआईआर कराने के आदेश पालिका ईओ एके सिंह चौहान को दिए थे। आदेशों के करीब दो हफ्ते तक ईओ ने संबंधित ठेकेदारों के विरुद्ध एफआईआर कराना तो दूर निर्माण कार्य को भी बंद नहीं कराया था।
डीएम के सख्त आदेश के बाद ठेकेदारों के विरुद्ध एफआईआर हुई थी। जांच रिपोर्ट में पालिका अधिशासी अधिकारी एके सिंह चौहान को दोषी पाए जाने पर शासन स्तर से निलंबित कर दिया गया।
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पालिका परिषद द्वारा सिंचाई विभाग की हाथरस माइनर के पमारी ड्रेन पर करीब आठ सौ मीटर नाला बनाने के लिए चहेते 34 ठेकेदारों को टुकड़ों में टेंडर दिया गया था। करीब 10 करोड़ की लागत से बनने वाले नाले के निर्माण में घटिया सामग्री का प्रयोग और मानक के अनुरूप कार्य नहीं होने पर भाजपा नगर अध्यक्ष सहित अन्य लोगों ने आवाज उठाई थी। मामले की शिकायत डीएम से लेकर मुख्यमंत्री तक की गयी। इस पर जांच हुई, जिसमें शिकायतें सही पायी गईं।
मामले में डीएम के आदेश पर विगत 17 मई को शिवा कंस्ट्रक्शन के शिवराज सिंह, कौशल किशोर, भगवत स्वरूप कटियार के रोहित कटियार, नव्या कंस्ट्रक्शन की ललिता निगम, शिवा एंड कंपनी के मनप्रीत सिंह कीर, सिंह ग्रुप के सूरज सिंह, भगवान देवी व सुमन गर्ग के विरुद्ध एफआईआर हुई थी।
जिलाधिकारी ने निर्माण कार्य की जांच में दोषी पाए गये ठेकेदारों की गिरफ्तारी के साथ ही उनसे करोड़ों रुपये की वसूली के आदेश दिए थे, किंतु ठेकेदार हाईकोर्ट से स्टे ले आए थे। ऐसे में न तो उनकी गिरफ्तारी हो सकी और न ही वसूली।
करोड़ों के नाला निर्माण में चहेते ठेकेदारों को कार्य देने, निर्माण कार्य में गड़बड़झाला होने और निर्माण पूर्ण होने से पहले ही भुगतान होने को लेकर निर्माण जेई सहित ईओ के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई हो चुुकी है। हालांकि उनका कार्यकाल खत्म होने जा रहा है लेकिन जांच निष्पक्ष हुई तो मामले में पालिका अध्यक्ष रामवती चौधरी पर भी आंच आ सकती है।
नाला निर्माण में लोगों ने आवाज उठायी तो इसमें एनओसी देने वाला नहर विभाग आ गया। जब नहर विभाग हाथरस के एसडीओ ब्रजेश कुमार ने नाला निर्माण के लिए जिन प्वाइंट पर एनओसी दी वह उन्हें नहीं मिले तो उन्होंने निर्माण जेई से निर्माण का स्टीमेट और ड्राइंग की मांग की थी। इसी बात पर मामला बिगड़ा। जेई ने न सिर्फ कुछ भी देने से इनकार कर दिया था, अपितु एसडीओ नहर से अभद्रता की थी। तब पूरे मामले को एसडीओ ने जिलाधिकारी से अवगत कराते हुए नाला निर्माण की पोल खोली थी। जबकि इससे पूर्व तत्कालीन एडीएम ने भी जांच करते हुए कार्य रुकवाया था लेकिन निर्माण
टूंडला में ड्रेन पर बनाए गये नाला निर्माण घोटाले के मामले में सोमवार शाम शासन से पालिका के अधिशासी अधिकारी एके सिंह चौहान के निलंबन का आदेश मिल गया है। उन्हें निलंबित कर दिया गया है। मामले में जेई और ठेकेदारों के विरुद्ध पहले ही कार्रवाई की जा चुकी है।
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मामले में डीएम नेहा शर्मा की संस्तुति के बाद निर्माण करा रहे जेई सोमेश वर्मा को निलंबित कर दिया गया था। डीएम ने नाला निर्माण करा रहे आठ ठेकेदारों के विरुद्ध एफआईआर कराने के आदेश पालिका ईओ एके सिंह चौहान को दिए थे। आदेशों के करीब दो हफ्ते तक ईओ ने संबंधित ठेकेदारों के विरुद्ध एफआईआर कराना तो दूर निर्माण कार्य को भी बंद नहीं कराया था।
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डीएम के सख्त आदेश के बाद ठेकेदारों के विरुद्ध एफआईआर हुई थी। जांच रिपोर्ट में पालिका अधिशासी अधिकारी एके सिंह चौहान को दोषी पाए जाने पर शासन स्तर से निलंबित कर दिया गया।
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पालिका परिषद द्वारा सिंचाई विभाग की हाथरस माइनर के पमारी ड्रेन पर करीब आठ सौ मीटर नाला बनाने के लिए चहेते 34 ठेकेदारों को टुकड़ों में टेंडर दिया गया था। करीब 10 करोड़ की लागत से बनने वाले नाले के निर्माण में घटिया सामग्री का प्रयोग और मानक के अनुरूप कार्य नहीं होने पर भाजपा नगर अध्यक्ष सहित अन्य लोगों ने आवाज उठाई थी। मामले की शिकायत डीएम से लेकर मुख्यमंत्री तक की गयी। इस पर जांच हुई, जिसमें शिकायतें सही पायी गईं।
मामले में डीएम के आदेश पर विगत 17 मई को शिवा कंस्ट्रक्शन के शिवराज सिंह, कौशल किशोर, भगवत स्वरूप कटियार के रोहित कटियार, नव्या कंस्ट्रक्शन की ललिता निगम, शिवा एंड कंपनी के मनप्रीत सिंह कीर, सिंह ग्रुप के सूरज सिंह, भगवान देवी व सुमन गर्ग के विरुद्ध एफआईआर हुई थी।
जिलाधिकारी ने निर्माण कार्य की जांच में दोषी पाए गये ठेकेदारों की गिरफ्तारी के साथ ही उनसे करोड़ों रुपये की वसूली के आदेश दिए थे, किंतु ठेकेदार हाईकोर्ट से स्टे ले आए थे। ऐसे में न तो उनकी गिरफ्तारी हो सकी और न ही वसूली।
करोड़ों के नाला निर्माण में चहेते ठेकेदारों को कार्य देने, निर्माण कार्य में गड़बड़झाला होने और निर्माण पूर्ण होने से पहले ही भुगतान होने को लेकर निर्माण जेई सहित ईओ के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई हो चुुकी है। हालांकि उनका कार्यकाल खत्म होने जा रहा है लेकिन जांच निष्पक्ष हुई तो मामले में पालिका अध्यक्ष रामवती चौधरी पर भी आंच आ सकती है।
नाला निर्माण में लोगों ने आवाज उठायी तो इसमें एनओसी देने वाला नहर विभाग आ गया। जब नहर विभाग हाथरस के एसडीओ ब्रजेश कुमार ने नाला निर्माण के लिए जिन प्वाइंट पर एनओसी दी वह उन्हें नहीं मिले तो उन्होंने निर्माण जेई से निर्माण का स्टीमेट और ड्राइंग की मांग की थी। इसी बात पर मामला बिगड़ा। जेई ने न सिर्फ कुछ भी देने से इनकार कर दिया था, अपितु एसडीओ नहर से अभद्रता की थी। तब पूरे मामले को एसडीओ ने जिलाधिकारी से अवगत कराते हुए नाला निर्माण की पोल खोली थी। जबकि इससे पूर्व तत्कालीन एडीएम ने भी जांच करते हुए कार्य रुकवाया था लेकिन निर्माण
टूंडला में ड्रेन पर बनाए गये नाला निर्माण घोटाले के मामले में सोमवार शाम शासन से पालिका के अधिशासी अधिकारी एके सिंह चौहान के निलंबन का आदेश मिल गया है। उन्हें निलंबित कर दिया गया है। मामले में जेई और ठेकेदारों के विरुद्ध पहले ही कार्रवाई की जा चुकी है।