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ताजमहल पर उर्स: आकर्षण का केंद्र बनी 1720 मीटर लंबी हिंदुस्तानी सतरंगी चादर, पर्यटकों का उमड़ा हुजूम
Sat, 17 Jan 2026 05:59 PM IST
अरुन पाराशर
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: अरुन पाराशर
Updated Sat, 17 Jan 2026 05:59 PM IST
सार
ताजमहल में तीन दिवसीय शाहजहां के उर्स के अंतिम दिन शनिवार को पर्यटकों का हुजूम उमड़ पड़ा। इस दाैरान 1720 मीटर लंबी हिंदुस्तानी सतरंगी चादर आकर्षण का केंद्र बनी रही।
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ताजमहल में उर्स पर चढ़ी सतरंगी चादर।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
ताजमहल में मुगल बादशाह शाहजहां के 371वें उर्स के आखिरी दिन शनिवार को कुल की रस्म के साथ कब्र पर 1720 मीटर लंबी हिंदुस्तानी सतरंगी चादर पेश की गई। सुबह नमाज के बाद कुरानख्वानी और मिलाद-उन-नबी का आयोजन किया गया जिसके बाद कव्वालियों के बीच अकीदतमंदों ने तहखाने में मौजूद असली कब्रों पर हाजिरी दी। उर्स में प्रवेश निशुल्क होने के कारण पूरे दिन ताज में जायरीन और पर्यटकों की भीड़ लगी रही, जिससे अव्यवस्थाओं के कारण कई पर्यटक फंस गए।
खुद्दाम-ए-रोजा कमेटी के अध्यक्ष हाजी ताहिरउद्दीन ताहिर के नेतृत्व में दोपहर 2 बजे दक्षिणी गेट स्थित हनुमान मंदिर से 1720 मीटर लंबी सतरंगी चादर का जुलूस शुरू हुआ। हजारों हाथों में थमी सतरंगी चादर जैसे ही मुख्य मकबरे की ओर बढ़ी, पूरा परिसर शाहजहां-मुमताज के नारों से गूंज उठा। हाजी ताहिरउद्दीन ने कहा कि यह चादर सर्वधर्म सद्भाव की प्रतीक है। जिस तरह ताजमहल पूरी दुनिया को मोहब्बत का संदेश देता है, वैसे ही यह चादर भी आपसी प्रेम और भाईचारे की मिसाल है।
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कमेटी के नए अध्यक्ष बने रिजवानुद्दीन
चादरपोशी से पूर्व हाजी ताहिरउद्दीन ताहिर ने खुद्दाम-ए-रोजा कमेटी के नए अध्यक्ष के नाम की घोषणा की। उन्होंने उपाध्यक्ष रिजवानुद्दीन जुगनू को पगड़ी बांधकर वर्ष 2027 के उर्स के लिए कमेटी का नया अध्यक्ष घोषित किया। सदस्यों ने फूल-मालाओं से उनका स्वागत किया। नवनियुक्त अध्यक्ष रिजवानुद्दीन जुगनू ने कहा कि पिछले 50 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को वह पूरी शिद्दत के साथ आगे बढ़ाएंगे।
फूलों की वर्षा और लंगर का वितरण
सतरंगी चादर के जुलूस का रास्ते भर जोरदार स्वागत हुआ। ताजगंज बाजार के व्यापारियों ने फूलों की वर्षा की। उर्स में शाम को ताजमहल परिसर में फातिहा पढ़ा गया और मुल्क में अमन चैन की दुआ मांगी गई। फोरकोर्ट में लंगर का भी वितरण किया गया। सपा नेता रिजवान रईसुद्दीन प्रिंस ने कहा कि ताज वह स्थान है, जहां सभी धर्मों के लोग आकर अकीदत के साथ चादर पेश करते हैं। यह हमारी गंगा जमुनी तहजीब का प्रतीक है। इस दौरान जीशान खान, अब्दुल शमीम खान, सूफी मोहम्मद अली अंसारी, बाबर, आरिफ तैमूरी सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
जवानों ने फटकारी लाठियां
उर्स के मौके पर ताजमहल में प्रवेश नि:शुल्क होने के कारण सुबह से ही पूर्वी और पश्चिमी गेट पर पर्यटकों का रेला नजर आया। देखते ही देखते कतारें मुख्य मार्ग तक पहुंच गईं। जैसे ही दोपहर में मुख्य रस्में शुरू हुईं, गेट पर दबाव अचानक बढ़ गया। सुरक्षा जांच के दौरान भीड़ ने बैरिकेडिंग को धकेलने की कोशिश की, जिससे धक्का-मुक्की शुरू हो गई। मस्जिद के पास दोपहर में भीड़ इतनी बढ़ी कि एक दूसरे पर लोग गिरने लगे, जबकि कई विदेशी सैलानी भीड़ में फंस गए। ऐसे में सीआईएसएफ के जवानों ने धक्कामुक्की कर रहे लोगों पर लाठियां फटकारीं।
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खुद्दाम-ए-रोजा कमेटी के अध्यक्ष हाजी ताहिरउद्दीन ताहिर के नेतृत्व में दोपहर 2 बजे दक्षिणी गेट स्थित हनुमान मंदिर से 1720 मीटर लंबी सतरंगी चादर का जुलूस शुरू हुआ। हजारों हाथों में थमी सतरंगी चादर जैसे ही मुख्य मकबरे की ओर बढ़ी, पूरा परिसर शाहजहां-मुमताज के नारों से गूंज उठा। हाजी ताहिरउद्दीन ने कहा कि यह चादर सर्वधर्म सद्भाव की प्रतीक है। जिस तरह ताजमहल पूरी दुनिया को मोहब्बत का संदेश देता है, वैसे ही यह चादर भी आपसी प्रेम और भाईचारे की मिसाल है।
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कमेटी के नए अध्यक्ष बने रिजवानुद्दीन
चादरपोशी से पूर्व हाजी ताहिरउद्दीन ताहिर ने खुद्दाम-ए-रोजा कमेटी के नए अध्यक्ष के नाम की घोषणा की। उन्होंने उपाध्यक्ष रिजवानुद्दीन जुगनू को पगड़ी बांधकर वर्ष 2027 के उर्स के लिए कमेटी का नया अध्यक्ष घोषित किया। सदस्यों ने फूल-मालाओं से उनका स्वागत किया। नवनियुक्त अध्यक्ष रिजवानुद्दीन जुगनू ने कहा कि पिछले 50 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को वह पूरी शिद्दत के साथ आगे बढ़ाएंगे।
फूलों की वर्षा और लंगर का वितरण
सतरंगी चादर के जुलूस का रास्ते भर जोरदार स्वागत हुआ। ताजगंज बाजार के व्यापारियों ने फूलों की वर्षा की। उर्स में शाम को ताजमहल परिसर में फातिहा पढ़ा गया और मुल्क में अमन चैन की दुआ मांगी गई। फोरकोर्ट में लंगर का भी वितरण किया गया। सपा नेता रिजवान रईसुद्दीन प्रिंस ने कहा कि ताज वह स्थान है, जहां सभी धर्मों के लोग आकर अकीदत के साथ चादर पेश करते हैं। यह हमारी गंगा जमुनी तहजीब का प्रतीक है। इस दौरान जीशान खान, अब्दुल शमीम खान, सूफी मोहम्मद अली अंसारी, बाबर, आरिफ तैमूरी सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
जवानों ने फटकारी लाठियां
उर्स के मौके पर ताजमहल में प्रवेश नि:शुल्क होने के कारण सुबह से ही पूर्वी और पश्चिमी गेट पर पर्यटकों का रेला नजर आया। देखते ही देखते कतारें मुख्य मार्ग तक पहुंच गईं। जैसे ही दोपहर में मुख्य रस्में शुरू हुईं, गेट पर दबाव अचानक बढ़ गया। सुरक्षा जांच के दौरान भीड़ ने बैरिकेडिंग को धकेलने की कोशिश की, जिससे धक्का-मुक्की शुरू हो गई। मस्जिद के पास दोपहर में भीड़ इतनी बढ़ी कि एक दूसरे पर लोग गिरने लगे, जबकि कई विदेशी सैलानी भीड़ में फंस गए। ऐसे में सीआईएसएफ के जवानों ने धक्कामुक्की कर रहे लोगों पर लाठियां फटकारीं।