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आग के हवाले किया जा रहा पीडब्ल्यूडी कार्यालय के अहम रिकार्ड
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मथुरा। आए दिन सुर्खियों में रहने वाले लोकनिर्माण विभाग का प्रांतीय खंड फिर चर्चाओं में है। पिछले कई दिनों से यहां कार्यालय के अहम दस्तावेज के रूप में मौजूद अनुबंध पत्रों को अन्य रिकार्ड के साथ जलाया जा रहा है। माना जा रहा है कि पिछले कुछ सालों के दौरान हुई फिजूल खर्ची के रिकार्ड को ठिकाने लगाने के लिए यह सब हो रहा है।
कभी मुख्यमंत्री की नाम पट्टिकाओं पर कालिख पोतने से प्रांतीय खंड के अधिकारी सुर्खियों में आए तो कभी पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस को भगवा रंग में रंगने के मामले ने उन्हें चर्चाओं में बनाया। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा किसी भी अधिकारी के लिए अधिकतम 3 साल तक जनपद में रहने की समय सीमा के आदेश बावजूद प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता छह साल बाद भी मथुरा में जमे हुए हैं। इस संदर्भ में भारत निर्वाचन आयोग से की गई शिकायत के निष्प्रभावी होना भी यहां चर्चा का विषय बना। अब इसी खंड में रिकार्ड को ठिकाने लगाने की कोशिश हो रही है। पिछले कई दिनों से यहां महत्वपूर्ण कागजात जलाए जा रहे हैं। इसमें ठेकेदार और अधिकारियों के बीच होने वाले अनुबंध भी हैं। आरोप है कि पिछले कुछ सालों के दौरान विभिन्न परियोजनाओं पर किए गए अतिरिक्त खर्च के रिकार्ड को ठिकाने लगाने की कोशिश की जा रही है।
पुराना रिकार्ड नष्ट करने के निर्देश दिए हैं, जो अब किसी काम का नहीं है। फिर भी मामले को देखा जाएगा।
एसके वर्मा, एक्सईएन
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कभी मुख्यमंत्री की नाम पट्टिकाओं पर कालिख पोतने से प्रांतीय खंड के अधिकारी सुर्खियों में आए तो कभी पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस को भगवा रंग में रंगने के मामले ने उन्हें चर्चाओं में बनाया। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा किसी भी अधिकारी के लिए अधिकतम 3 साल तक जनपद में रहने की समय सीमा के आदेश बावजूद प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता छह साल बाद भी मथुरा में जमे हुए हैं। इस संदर्भ में भारत निर्वाचन आयोग से की गई शिकायत के निष्प्रभावी होना भी यहां चर्चा का विषय बना। अब इसी खंड में रिकार्ड को ठिकाने लगाने की कोशिश हो रही है। पिछले कई दिनों से यहां महत्वपूर्ण कागजात जलाए जा रहे हैं। इसमें ठेकेदार और अधिकारियों के बीच होने वाले अनुबंध भी हैं। आरोप है कि पिछले कुछ सालों के दौरान विभिन्न परियोजनाओं पर किए गए अतिरिक्त खर्च के रिकार्ड को ठिकाने लगाने की कोशिश की जा रही है।
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पुराना रिकार्ड नष्ट करने के निर्देश दिए हैं, जो अब किसी काम का नहीं है। फिर भी मामले को देखा जाएगा।
एसके वर्मा, एक्सईएन