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टीटीजेड के फरमान ने बढ़ाई अफसरों की मुश्किल
Updated Tue, 17 Jul 2018 11:56 PM IST
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फिरोजाबाद। टीटीजेड के फरमान से उद्योग विभाग के अफसरों के होश उड़ गए हैं। सुहागनगरी में 1983 से अब तक कितनी इकाइयों रजिस्टर्ड हुईं, उनके द्वारा क्या उत्पाद बनाए जा रहे। रजिस्टर्ड इकाइयों में कितनी बंद, कितनी चालू हैं, इसका पूरा ब्योरा टीटीजेड से तलब किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने ताजमहल संरक्षण को लेकर तल्ख टिप्पणी किए जाने के बाद टीटीजेड अथॉरिटी कटघरे में आ गई है। टीटीजेड में बढ़ते प्रदूषण के मामले में खुद को घिरता देख कांच उद्योग का पूरा ब्योर तलब किया है। फिरोजाबाद में वर्ष 1996 से पूर्व कोयले से कांच इकाइयों का संचालन होता था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर टीटीजेड में कोयले पर प्रतिबंध लगा दिया था। वर्ष 1996 से नेचुरल गैस से कांच इकाइयों का संचालन हो रहा है। इसके बाद कांच उद्योग से होने वाले प्रदूषण को लेकर लगातार शिकायतें हो रही हैं। ताजमहल संरक्षण में लापरवाही बरतने पर टीटीजेड अथॉरिटी सवालों के घेरे में है।
ऐसे में टीटीजेड अथॉरिटी ने अपने बचाव का रास्ता खोजने के लिए उद्योग विभाग से वर्ष 1983 से अब तक जनपद में कितनी इकाइयां रजिस्टर्ड हैं। इकाइयों में क्या उत्पाद बन रहे हैं, कितनी इकाइयां बंद और चालू हैं, कितनी गैस की खपत हो रही है सहित विभिन्न बिंदुओं पर रिपोर्ट तलब की है। उद्योग विभाग के अफसर रिपोर्ट तैयार करने के लिए बंद कमरे में सालों पुराना रिकार्ड खंगाल रहे हैं, लेकिन अभी तक सूची फाइनल नहीं हुई है।
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सुप्रीम कोर्ट ने ताजमहल संरक्षण को लेकर तल्ख टिप्पणी किए जाने के बाद टीटीजेड अथॉरिटी कटघरे में आ गई है। टीटीजेड में बढ़ते प्रदूषण के मामले में खुद को घिरता देख कांच उद्योग का पूरा ब्योर तलब किया है। फिरोजाबाद में वर्ष 1996 से पूर्व कोयले से कांच इकाइयों का संचालन होता था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर टीटीजेड में कोयले पर प्रतिबंध लगा दिया था। वर्ष 1996 से नेचुरल गैस से कांच इकाइयों का संचालन हो रहा है। इसके बाद कांच उद्योग से होने वाले प्रदूषण को लेकर लगातार शिकायतें हो रही हैं। ताजमहल संरक्षण में लापरवाही बरतने पर टीटीजेड अथॉरिटी सवालों के घेरे में है।
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ऐसे में टीटीजेड अथॉरिटी ने अपने बचाव का रास्ता खोजने के लिए उद्योग विभाग से वर्ष 1983 से अब तक जनपद में कितनी इकाइयां रजिस्टर्ड हैं। इकाइयों में क्या उत्पाद बन रहे हैं, कितनी इकाइयां बंद और चालू हैं, कितनी गैस की खपत हो रही है सहित विभिन्न बिंदुओं पर रिपोर्ट तलब की है। उद्योग विभाग के अफसर रिपोर्ट तैयार करने के लिए बंद कमरे में सालों पुराना रिकार्ड खंगाल रहे हैं, लेकिन अभी तक सूची फाइनल नहीं हुई है।
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