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अब मंदिरनुमा नजर आएगा सोरों को रेलवे स्टेशन
Updated Fri, 08 Jun 2018 11:22 PM IST
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अब मंदिरनुमा नजर आएगा सोरों को रेलवे स्टेशन
- फोटो : अमर उजाला
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सोरों।
सोरों सूकर क्षेत्र को भले ही अभी तीर्थ स्थल का दर्जा न मिल पाया हो, लेकिन रेलवे ने सोरों के रेलवे स्टेशन को तीर्थ स्थल का लुक दिया है। रेलवे स्टेशन के अग्रभाग को बेहद आकर्षक तरीके से मंदिरनुमा बनाया जा रहा है। यह कार्य प्रगति पर है। निर्माण कार्य को देखकर ही तीर्थनगरी के बाशिंदे बेहद खुश हैं और आने जाने वाले पर्यटक भी आकर्षक निर्माण को देखकर खुश नजर आते हैं।
प्राचीन समय से सोरों तीर्थ नगरी में साधू, सन्यासियों, राजा, महाराजाओं का आवागमन रहा है। सोरों का इतिहास बेहद स्वर्णिम है। प्रदेश सरकार भी इस क्षेत्र के विकास को लेकर बेहद गंभीर है, लेकिन रेलवे ने इस क्षेत्र की पहचान के मुताबिक रेलवे स्टेशन को तीर्थस्थल के लुक में परिवर्तित करने में बाजी मार ली है। पिछले वर्ष 22 फरवरी को पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक आरके मिश्रा ने यहां के रेलवे स्टेशन का निरीक्षण किया तो तीर्थ नगरी के वाशिंदों ने बनारस व हरिद्वार के स्टेशनों की तर्ज पर यहां के स्टेशन के सुंदरीकरण की मांग उठाई थी। रेलवे महाप्रबंधक ने इस मांग को शीघ्र पूरा करने का भरोसा दिया और अब इस पर अमल भी करा दिया। पिछले काफी समय से रेलवे स्टेशन को तीर्थ स्थल जैसा लुक दिया जा रहा है। इसका अग्रभाग मंदिर नुमा है। अग्रभाग में दो भगवान वराह की प्रतिमाएं लगाई जा रहीं हैं। पच्चीकारी के पत्थर से गुंबद तैयार की जा रहीं हैं। वहीं रेलवे स्टेशन के अंदर के परिसर का भी सुंदरीकण हो रहा है।
कस्बे के लोग कर रहे रेलवे के कदम की सराहना
सोरों। तीर्थनगरी के लोग रेलवे के निर्माण कार्य को लेकर बेहद उत्साहित हैं। तीर्थ स्थल के रूप में मंदिर नुमा अग्रभाग बनाए जाने के कदम से तीर्थनगरी के लोग अच्छा बता रहे हैं। उनका कहना है कि इससे तीर्थ के विकास को लेकर लोग गंभीर बनेंगे। संत तुलसीदास नगर विकास समिति के डा. प्रभाकर, देव प्रकाश तिवारी, भारत किशोर दुबे, मुनेंद्र चौधरी, मान सिंह कुशवाह, स्वतंत्र अग्रवाल ने हर्ष जताते हुए रेलवे के कदम की सराहना की है।
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सोरों सूकर क्षेत्र को भले ही अभी तीर्थ स्थल का दर्जा न मिल पाया हो, लेकिन रेलवे ने सोरों के रेलवे स्टेशन को तीर्थ स्थल का लुक दिया है। रेलवे स्टेशन के अग्रभाग को बेहद आकर्षक तरीके से मंदिरनुमा बनाया जा रहा है। यह कार्य प्रगति पर है। निर्माण कार्य को देखकर ही तीर्थनगरी के बाशिंदे बेहद खुश हैं और आने जाने वाले पर्यटक भी आकर्षक निर्माण को देखकर खुश नजर आते हैं।
प्राचीन समय से सोरों तीर्थ नगरी में साधू, सन्यासियों, राजा, महाराजाओं का आवागमन रहा है। सोरों का इतिहास बेहद स्वर्णिम है। प्रदेश सरकार भी इस क्षेत्र के विकास को लेकर बेहद गंभीर है, लेकिन रेलवे ने इस क्षेत्र की पहचान के मुताबिक रेलवे स्टेशन को तीर्थस्थल के लुक में परिवर्तित करने में बाजी मार ली है। पिछले वर्ष 22 फरवरी को पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक आरके मिश्रा ने यहां के रेलवे स्टेशन का निरीक्षण किया तो तीर्थ नगरी के वाशिंदों ने बनारस व हरिद्वार के स्टेशनों की तर्ज पर यहां के स्टेशन के सुंदरीकरण की मांग उठाई थी। रेलवे महाप्रबंधक ने इस मांग को शीघ्र पूरा करने का भरोसा दिया और अब इस पर अमल भी करा दिया। पिछले काफी समय से रेलवे स्टेशन को तीर्थ स्थल जैसा लुक दिया जा रहा है। इसका अग्रभाग मंदिर नुमा है। अग्रभाग में दो भगवान वराह की प्रतिमाएं लगाई जा रहीं हैं। पच्चीकारी के पत्थर से गुंबद तैयार की जा रहीं हैं। वहीं रेलवे स्टेशन के अंदर के परिसर का भी सुंदरीकण हो रहा है।
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कस्बे के लोग कर रहे रेलवे के कदम की सराहना
सोरों। तीर्थनगरी के लोग रेलवे के निर्माण कार्य को लेकर बेहद उत्साहित हैं। तीर्थ स्थल के रूप में मंदिर नुमा अग्रभाग बनाए जाने के कदम से तीर्थनगरी के लोग अच्छा बता रहे हैं। उनका कहना है कि इससे तीर्थ के विकास को लेकर लोग गंभीर बनेंगे। संत तुलसीदास नगर विकास समिति के डा. प्रभाकर, देव प्रकाश तिवारी, भारत किशोर दुबे, मुनेंद्र चौधरी, मान सिंह कुशवाह, स्वतंत्र अग्रवाल ने हर्ष जताते हुए रेलवे के कदम की सराहना की है।
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