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बंदी की कलम से निकले ‘वेदना के स्वर’
Updated Sat, 24 Feb 2018 11:50 PM IST
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कारागार
- फोटो : अमर उजाला
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एटा। जिला कारागार में आजीवन करावास की सजा काट रहे बंदी की कलम से वेदना के स्वर निकले। आठ साल से जेल में निरुद्ध बंदी ने वक्त को कागजों पर उतारते हुए काव्य संग्रह लिखा। जेल प्रशासन ने पुस्तक प्रकाशन कराते हुए उसे शासन स्तर तक भेजने की बात कही है।
थाना अलीगंज क्षेत्र के गांव किनौड़ी खेराबाद निवासी रामदेव शास्त्री भाई सुखवीर की हत्या के मामले में वर्ष 2010 से बंद है। भाई की हत्या के मामले में उसे आजीवन कारावास की सजा हो चुकी है। सजा के बाद वह आठ साल जेल में बिता चुका है। इन आठ सालो को उसने जाया नहीं जाने दिया और उसने जेल प्रशासन, बच्चे, समाज को लेकर वेदना के स्वर नामक काव्य को लिख डाला। जानकारी पर जेल प्रशासन ने बंदी के कारनामे को सराहते हुए पुस्तक का प्रकाशन कराने की तैयारी की। शनिवार को जेल अधीक्षक पीपीसिंह और जेल सुधार कार्यकर्ता एवं युवा शक्ति प्रमुख प्रदीप रघुनंदन की पहल से बंदी के काव्य संग्रह का विमोचन जेल में किया गया। बंदी ने अपने काव्य संग्रह ‘वेदना के स्वर’ में जुआ, शराब जैसी कुरीतियों से दूर रहने के साथ ही शिक्षा के स्तर से समाज को सुधारने जैसी कविताएं लिखी है। इस मौके पर जेल अधीक्षक पीपीसिंह ने कहा कि बंदी के लिखे काव्य संग्रह को शासन तक पहुंचाकर काव्यकार को प्रोत्साहित करने की मांग करेंगे। इस मौके पर जेलर कुलदीप सिंह भदौरिया, डिप्टी जेलर रवींद्र सिंह, बंदी रक्षक प्रभुदयाल कुशवाह, बंदी अरुण, बबलू, मुनेंद्र, पंकज, कंचन आदि मौजूद रहे।
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थाना अलीगंज क्षेत्र के गांव किनौड़ी खेराबाद निवासी रामदेव शास्त्री भाई सुखवीर की हत्या के मामले में वर्ष 2010 से बंद है। भाई की हत्या के मामले में उसे आजीवन कारावास की सजा हो चुकी है। सजा के बाद वह आठ साल जेल में बिता चुका है। इन आठ सालो को उसने जाया नहीं जाने दिया और उसने जेल प्रशासन, बच्चे, समाज को लेकर वेदना के स्वर नामक काव्य को लिख डाला। जानकारी पर जेल प्रशासन ने बंदी के कारनामे को सराहते हुए पुस्तक का प्रकाशन कराने की तैयारी की। शनिवार को जेल अधीक्षक पीपीसिंह और जेल सुधार कार्यकर्ता एवं युवा शक्ति प्रमुख प्रदीप रघुनंदन की पहल से बंदी के काव्य संग्रह का विमोचन जेल में किया गया। बंदी ने अपने काव्य संग्रह ‘वेदना के स्वर’ में जुआ, शराब जैसी कुरीतियों से दूर रहने के साथ ही शिक्षा के स्तर से समाज को सुधारने जैसी कविताएं लिखी है। इस मौके पर जेल अधीक्षक पीपीसिंह ने कहा कि बंदी के लिखे काव्य संग्रह को शासन तक पहुंचाकर काव्यकार को प्रोत्साहित करने की मांग करेंगे। इस मौके पर जेलर कुलदीप सिंह भदौरिया, डिप्टी जेलर रवींद्र सिंह, बंदी रक्षक प्रभुदयाल कुशवाह, बंदी अरुण, बबलू, मुनेंद्र, पंकज, कंचन आदि मौजूद रहे।
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