{"_id":"599884bc4f1c1bfe028b480e","slug":"171503167676-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आंदोलन में गुरुजी, स्कूलों में पढ़ाई चौपट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आंदोलन में गुरुजी, स्कूलों में पढ़ाई चौपट
Updated Sun, 20 Aug 2017 12:15 AM IST
विज्ञापन
आंदोलन कर रहे शिक्षामित्र
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फिरोजाबाद। समायोजित शिक्षकों एवं असमायोजित शिक्षामित्रों के आंदोलन से शनिवार को भी कई स्कूल नहीं खुलने से बच्चे गुरुजी का इंतजार करने के बाद घर लौट गए। अधिकांश प्राथमिक स्कूलों में समायोजित शिक्षक तैनात थे, लेकिन उनके स्कूल नहीं पहुंचने से एक-दो शिक्षक बचे हैं। इसके चलते स्कूलों में पठन-पाठन का माहौल नहीं बन पा रहा है।
समायोजित शिक्षकों का आंदोलन 26 से 30 जुलाई तक लगातार चला। उस समय भी प्राथमिक स्कूल बंद रहे थे। मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद कार्रवाई नहीं होने पर 14 अगस्त से धरना प्रदर्शन की शुरुआत दोबारा हुई। इस बार असमायोजित शिक्षामित्र धरने में शामिल हैं।
इसके चलते पढ़ाई का माहौल प्राथमिक स्कूलों से दूर हो चुका है। इन विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए विभागीय अधिकारी चुप्पी साधे हैं और शासन के आदेश का इंतजार कर रहे हैं। जिन स्कूलों में छात्र संख्या अधिक है, उन स्कूलों में एक या दो शिक्षकों को व्यवस्थाएं संभालना मुश्किल हो रहा है।
विज्ञापन
क्या कहते हैं बीएसए
आखिर बच्चों का क्या दोष है? हम स्कूल खुलवाने का प्रयास कर रहे हैं। जो स्कूल बंद हैं, उन्हें खुलवाएंगे। फिलहाल शासन के आदेश का इंतजार कर रहे हैं।
सचिदानंद यादव, बीएसए
विज्ञापन
समायोजित शिक्षकों का आंदोलन 26 से 30 जुलाई तक लगातार चला। उस समय भी प्राथमिक स्कूल बंद रहे थे। मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद कार्रवाई नहीं होने पर 14 अगस्त से धरना प्रदर्शन की शुरुआत दोबारा हुई। इस बार असमायोजित शिक्षामित्र धरने में शामिल हैं।
विज्ञापन
इसके चलते पढ़ाई का माहौल प्राथमिक स्कूलों से दूर हो चुका है। इन विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए विभागीय अधिकारी चुप्पी साधे हैं और शासन के आदेश का इंतजार कर रहे हैं। जिन स्कूलों में छात्र संख्या अधिक है, उन स्कूलों में एक या दो शिक्षकों को व्यवस्थाएं संभालना मुश्किल हो रहा है।
विज्ञापन
क्या कहते हैं बीएसए
आखिर बच्चों का क्या दोष है? हम स्कूल खुलवाने का प्रयास कर रहे हैं। जो स्कूल बंद हैं, उन्हें खुलवाएंगे। फिलहाल शासन के आदेश का इंतजार कर रहे हैं।
सचिदानंद यादव, बीएसए