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चाइनीज राखी ना भईया ना
Updated Sat, 05 Aug 2017 11:47 PM IST
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BSNL Rakhi pe Saugaat
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कासगंज।
चीन के साथ चल रहे सीमा विवाद का असर राखी बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। बाजार में चाइनीज राखी की बिक्री नहीं हो रही। बहनें देशी राखियों की खरीद को ही तवज्जो दे रही हैं। जिन कारोबारियों ने इन राखियों को मंगाया है वे मायूस नजर आ रहे हैं।
रक्षाबंधन पर्व में सिर्फ एक दिन शेष है। पर्व को देखते हुए जिले में जगह जगह राखी बाजार सजे हुए हैं। इस बार राखी बाजार का स्वरूप बदला हुआ नजर आ रहा है। चाइनीज राखी के स्थान पर देशी राखियां बाजार में छाई हुई हैं। डोकलाम विवाद के चलते विक्रेताओं ने चाइनीज राखियों को काफी कम मात्रा में मंगाया है। कारोबारियों ने देशी राखियों को अधिक मात्रा में मंगाया। इनमें भी तमाम आकर्षक डिजाइनें बाजार में मौजूद हैं। कारीगरों ने इसमें भी कई तरह की राखियां तैयार की हैं। बाजारों में लगातार खरीद हो रही है। लेकिन इस बार राखी खरीद का ट्रेंड बदला हुआ है। जो चाइनीज राखियां को इस बार खरीददार भी नहीं मिल रहे। बाजार मे सजी जरकिन के नगों की देशी राखियां बहनों के मन लुभा रही हैं। बाजार में पांच से लेकर पांच सौ रुपये की भी राखियां मौजूद हैं। इन राखियों को खरीदने को अधिक प्राथमिकता दी जा रही है। इसके अलावा आकर्षक धागे भी लोगों को लुभा रहे हैं। राखी विक्रेता सुनील ने बताया कि उन्होंने इस बार चाइनीज राखी नहीं मंगाई। धागे व जरकिन की राखियों को ही मंगाया है। विक्रेता दीपक ने बताया कि उन्होंने चाइनीज राखी काफी कम मात्रा में मंगाई। जो राखी मंगाई गई हैं उनकी भी बिक्री नहीं हो रही। देशी राखी खरीदने को ही लोग प्राथमिकता दे रहे हैं। ऐसे में चाइनीज राखी के बचने की संभावना है। ग्राहक जरकिन, राजस्थानी एवं धागों को खरीद रहे हैं।
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चीन के साथ चल रहे सीमा विवाद का असर राखी बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। बाजार में चाइनीज राखी की बिक्री नहीं हो रही। बहनें देशी राखियों की खरीद को ही तवज्जो दे रही हैं। जिन कारोबारियों ने इन राखियों को मंगाया है वे मायूस नजर आ रहे हैं।
रक्षाबंधन पर्व में सिर्फ एक दिन शेष है। पर्व को देखते हुए जिले में जगह जगह राखी बाजार सजे हुए हैं। इस बार राखी बाजार का स्वरूप बदला हुआ नजर आ रहा है। चाइनीज राखी के स्थान पर देशी राखियां बाजार में छाई हुई हैं। डोकलाम विवाद के चलते विक्रेताओं ने चाइनीज राखियों को काफी कम मात्रा में मंगाया है। कारोबारियों ने देशी राखियों को अधिक मात्रा में मंगाया। इनमें भी तमाम आकर्षक डिजाइनें बाजार में मौजूद हैं। कारीगरों ने इसमें भी कई तरह की राखियां तैयार की हैं। बाजारों में लगातार खरीद हो रही है। लेकिन इस बार राखी खरीद का ट्रेंड बदला हुआ है। जो चाइनीज राखियां को इस बार खरीददार भी नहीं मिल रहे। बाजार मे सजी जरकिन के नगों की देशी राखियां बहनों के मन लुभा रही हैं। बाजार में पांच से लेकर पांच सौ रुपये की भी राखियां मौजूद हैं। इन राखियों को खरीदने को अधिक प्राथमिकता दी जा रही है। इसके अलावा आकर्षक धागे भी लोगों को लुभा रहे हैं। राखी विक्रेता सुनील ने बताया कि उन्होंने इस बार चाइनीज राखी नहीं मंगाई। धागे व जरकिन की राखियों को ही मंगाया है। विक्रेता दीपक ने बताया कि उन्होंने चाइनीज राखी काफी कम मात्रा में मंगाई। जो राखी मंगाई गई हैं उनकी भी बिक्री नहीं हो रही। देशी राखी खरीदने को ही लोग प्राथमिकता दे रहे हैं। ऐसे में चाइनीज राखी के बचने की संभावना है। ग्राहक जरकिन, राजस्थानी एवं धागों को खरीद रहे हैं।
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