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डूबने से बचाने के जिले में नहीं इंतजाम
Updated Tue, 27 Jun 2017 10:52 PM IST
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कासगंज।
जिले में नदी और नहरों में नहाते समय डूबने की तमाम घटनाएं होती हैं। इस दौरान समय पर मदद ने मिल पाने के कारण बहुत लोगों की जान चली जाती है। जिला प्रशासन के पास तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने के लिए कोई इंतजाम नहीं रहता। इस कारण मई और जून में ही 15 लोगों की जान जा चुकी है। हालत यह हैं कि नदी और नहर में लापता होने वालों के शव तक नहीं मिल पाते।
जिले में 51 किलोमीटर से अधिक गंगा नदी बहती है। इसके सहारे 100 से अधिक गांव बसे हुए हैं। दो बड़ी समानांतर हजारा नहर जिले की सीमा में बहती हैं। इसके अलावा गोरहा नहर और कई रजबहा भी हैं। गंगा नदी पर धार्मिक महत्व के दिनों और पर्वों पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इन नदी नहरों पर कहीं कोई घाट नहीं हैं, जिसके चलते आए दिन हादसे होते हैं।
गोरहा नहर और समानांतर हजारा नहर के किनारे सड़क मार्ग भी संचालित हैं, जहां आए दिन वाहन दुघर्टनाग्रस्त होकर नहर में गिर जाते हैं। ऐसे समय में ग्रामीण अपने स्तर से जो प्रयास कर लें उतने ही हो पाते हैं।
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प्रशासनिक स्तर से कोई मदद नहीं मिल पाती, क्योंकि जिले में न तो रिवर पुलिस की तैनाती हैं और न ही फायर ब्रिगेड के दस्ते काम आ पाते हैं। नदी व नहरों में डूब कर मरने वालों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। मई और जून माह में कई हुए हादसों में 15 लोगों की मौत हो चुकी हैं। डूबे हुए लोगों को नहीं बचाया जा सका और कई अभी तक लापता हैं।
दो माह में हुए हादसे
- 10 मई कादरगंज गंगा घाट पर डूबने से युवक की मौत
- 12 मई नबाबगंज नगरिया का बालक गंगा में डूबा
- 4 जून कछला गंगा घाट पर तीन डूबे, दो के शव मिले, एक लापता
- 10 जून को ऑल्टोकार नहर में गिरने से दंपति व एक बालक की मौत
- 10 जून को सोरों चंदवा में गंगा में डूबकर दो की मौत
- 26 जून कलश विसर्जन करने गए पांच युवक डूबे, दो की मौत
- 26 जून हजारा नहर में नहाते समय बिलराम का युवक डूबा, लापता
- 22 जून को लखनऊ का युवक हजारा नहर में स्नान करते हुए डूबा, लापता
जिले में गंगा नदी और बड़ी नहरें हैं। लोगों की नदी-नहर में नहाने की आदत है। लोग बचाव के साथ स्नान नहीं करते जिससे हादसे होते हैं। रिवर टीम की तैनाती मेले या बाढ़ के समय होती है। स्थायी तैनाती का प्रावधान नहीं है। स्थानीय गोताखोरों से ही मदद ली जाती है।
- सुनील कुमार सिंह, एसपी, कासगंज
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जिले में नदी और नहरों में नहाते समय डूबने की तमाम घटनाएं होती हैं। इस दौरान समय पर मदद ने मिल पाने के कारण बहुत लोगों की जान चली जाती है। जिला प्रशासन के पास तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने के लिए कोई इंतजाम नहीं रहता। इस कारण मई और जून में ही 15 लोगों की जान जा चुकी है। हालत यह हैं कि नदी और नहर में लापता होने वालों के शव तक नहीं मिल पाते।
जिले में 51 किलोमीटर से अधिक गंगा नदी बहती है। इसके सहारे 100 से अधिक गांव बसे हुए हैं। दो बड़ी समानांतर हजारा नहर जिले की सीमा में बहती हैं। इसके अलावा गोरहा नहर और कई रजबहा भी हैं। गंगा नदी पर धार्मिक महत्व के दिनों और पर्वों पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इन नदी नहरों पर कहीं कोई घाट नहीं हैं, जिसके चलते आए दिन हादसे होते हैं।
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गोरहा नहर और समानांतर हजारा नहर के किनारे सड़क मार्ग भी संचालित हैं, जहां आए दिन वाहन दुघर्टनाग्रस्त होकर नहर में गिर जाते हैं। ऐसे समय में ग्रामीण अपने स्तर से जो प्रयास कर लें उतने ही हो पाते हैं।
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प्रशासनिक स्तर से कोई मदद नहीं मिल पाती, क्योंकि जिले में न तो रिवर पुलिस की तैनाती हैं और न ही फायर ब्रिगेड के दस्ते काम आ पाते हैं। नदी व नहरों में डूब कर मरने वालों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। मई और जून माह में कई हुए हादसों में 15 लोगों की मौत हो चुकी हैं। डूबे हुए लोगों को नहीं बचाया जा सका और कई अभी तक लापता हैं।
दो माह में हुए हादसे
- 10 मई कादरगंज गंगा घाट पर डूबने से युवक की मौत
- 12 मई नबाबगंज नगरिया का बालक गंगा में डूबा
- 4 जून कछला गंगा घाट पर तीन डूबे, दो के शव मिले, एक लापता
- 10 जून को ऑल्टोकार नहर में गिरने से दंपति व एक बालक की मौत
- 10 जून को सोरों चंदवा में गंगा में डूबकर दो की मौत
- 26 जून कलश विसर्जन करने गए पांच युवक डूबे, दो की मौत
- 26 जून हजारा नहर में नहाते समय बिलराम का युवक डूबा, लापता
- 22 जून को लखनऊ का युवक हजारा नहर में स्नान करते हुए डूबा, लापता
जिले में गंगा नदी और बड़ी नहरें हैं। लोगों की नदी-नहर में नहाने की आदत है। लोग बचाव के साथ स्नान नहीं करते जिससे हादसे होते हैं। रिवर टीम की तैनाती मेले या बाढ़ के समय होती है। स्थायी तैनाती का प्रावधान नहीं है। स्थानीय गोताखोरों से ही मदद ली जाती है।
- सुनील कुमार सिंह, एसपी, कासगंज