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प्लास्टिक फैक्ट्री में लगी आग, लाखों का नुकसान
Updated Sat, 17 Jun 2017 12:06 AM IST
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फिरोजाबाद। लाइनपार थाना क्षेत्र के छारबाग स्थित प्लास्टिक का गोला बनाने वाली फैक्ट्री में शुक्रवार की सुबह आग लग गई। लपटेें देख इलाके में हड़कंप मच गया। पुलिस के साथ फायर विभाग की गाड़िया भी मौके पर पहुंच कई। करीब दो घंटे तक जूझने के बाद दमकल कर्मी आग पर काबू पा सके। इस दौरान लाखों रुपये का सामान राख हो गया। साथ ही मकान भी पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है।
लाइनपार थाना क्षेत्र के मोहल्ला रामनगर निवासी रवि शर्मा का छारबाग में मकान है। मकान में रामनगर निवासी इंद्रपाल राठौर पुत्र गुलजारी लाल राठौर प्लास्टिक के बोरे जलाकर गोला बनाने की फैक्ट्री चलाते हैं। गोलों से कपड़े धोने वाले ब्रश आगरा में तैयार किए जाते थे। फैक्ट्री आबादी के बाहर थी। आसपास आबादी न होने से आग लगने की जानकारी लोगों को तब हुई, जब लपटें आसमान चूमने लगीं। इस पर फैक्ट्री मालिक के साथ क्षेत्रीय लोग भी मौके पर पहुंचे।
रामनगर चौकी प्रभारी शैलेश निगम पुलिस बल के साथ पहुंचे। लेकिन समय से दमकल न आने के कारण वहां मौजूद लोग और पुलिसकर्मी बेबस खड़े रहे। करीब एक घंटे बाद फायर विभाग की गाड़ियां मौके पर पहुंची, तब कहीं जाकर आग बुझाने का काम शुरू हो सका। करीब दो घंटे तक चले अथक प्रयास के बाद आग पर काबू पाया जा सका। हालांकि तब तक लाखाें रुपये का सामान राख हो गया। आग लगने का कारण पता नहीं चल सका है।
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आग की सूचना पर मौके पर पहुंचने के लिए फायर विभाग की गाड़ियों के लिए एक बार फिर रेलवे लाइन बाधक बन गई। पैमेश्वर और चंद्रवार गेट के नीचे से दमकलों के न निकलने के कारण फायर कर्मचारियों को आसफबाद फाटक से होकर आना पड़ा। इसके चलते करीब एक घंटे से अधिक का समय रास्ते में फायर कर्मचारियों को लग गया।
लपटों के बीच घिरी फैक्ट्री को देख पीड़ित इंद्रपाल की जवां से एक ही शब्द निकल रहा था। न जाने कौन दुश्मन मर गयो जो मुझे तबाह कर गयो। बता दें कि इंद्रपाल का आय का इसके अलावा कोई दूसरा साधन भी नहीं है। परिवार का भरण पोषण के साथ ही उसने अपनी बेटियों की शादी के लिए भी सपने इसी फैक्ट्री से होने वाली आय से सजाए थे।
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लाइनपार थाना क्षेत्र के मोहल्ला रामनगर निवासी रवि शर्मा का छारबाग में मकान है। मकान में रामनगर निवासी इंद्रपाल राठौर पुत्र गुलजारी लाल राठौर प्लास्टिक के बोरे जलाकर गोला बनाने की फैक्ट्री चलाते हैं। गोलों से कपड़े धोने वाले ब्रश आगरा में तैयार किए जाते थे। फैक्ट्री आबादी के बाहर थी। आसपास आबादी न होने से आग लगने की जानकारी लोगों को तब हुई, जब लपटें आसमान चूमने लगीं। इस पर फैक्ट्री मालिक के साथ क्षेत्रीय लोग भी मौके पर पहुंचे।
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रामनगर चौकी प्रभारी शैलेश निगम पुलिस बल के साथ पहुंचे। लेकिन समय से दमकल न आने के कारण वहां मौजूद लोग और पुलिसकर्मी बेबस खड़े रहे। करीब एक घंटे बाद फायर विभाग की गाड़ियां मौके पर पहुंची, तब कहीं जाकर आग बुझाने का काम शुरू हो सका। करीब दो घंटे तक चले अथक प्रयास के बाद आग पर काबू पाया जा सका। हालांकि तब तक लाखाें रुपये का सामान राख हो गया। आग लगने का कारण पता नहीं चल सका है।
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आग की सूचना पर मौके पर पहुंचने के लिए फायर विभाग की गाड़ियों के लिए एक बार फिर रेलवे लाइन बाधक बन गई। पैमेश्वर और चंद्रवार गेट के नीचे से दमकलों के न निकलने के कारण फायर कर्मचारियों को आसफबाद फाटक से होकर आना पड़ा। इसके चलते करीब एक घंटे से अधिक का समय रास्ते में फायर कर्मचारियों को लग गया।
लपटों के बीच घिरी फैक्ट्री को देख पीड़ित इंद्रपाल की जवां से एक ही शब्द निकल रहा था। न जाने कौन दुश्मन मर गयो जो मुझे तबाह कर गयो। बता दें कि इंद्रपाल का आय का इसके अलावा कोई दूसरा साधन भी नहीं है। परिवार का भरण पोषण के साथ ही उसने अपनी बेटियों की शादी के लिए भी सपने इसी फैक्ट्री से होने वाली आय से सजाए थे।