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सुगंधा ने रोकी धान खरीद की रफ्तार
Updated Mon, 12 Nov 2018 10:25 PM IST
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मड़िहान में मिल में रखा चावल।
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एटा। सुगंधा ने जिले में धान खरीद की रफ्तार को थाम दिया है। आलम यह है कि किसान सरकारी क्रय केंद्रों पर नहीं पहुंच रहे हैं। इसके पीछे सुगंधा धान का उत्पादन प्रमुख वजह माना जा रहा है।
जिले में विपणन विभाग को इस बार 2250 एमटी धान खरीद का लक्ष्य है। हालांकि अब तक महज 4500 क्विंटल धान की खरीद हो सकी है। बताया जाता है कि सरकारी क्रय केंद्रों पर मोटे धान की खरीद की जाती है और जिले में अधिकतर किसान सुगंधा धान का उत्पादन करते हैं। मंडी में आढ़तियों के यहां भी धान की खरीद सुस्त है। दिवाली के बाद अब तक किसान धान खरीद को कम रुख कर रहे हैं। आढ़तियों की मानें तो गत वर्ष की अपेक्षा इस बार धान की आवक एक चौथाई भी नहीं हैं। ऐसे में उनका धान का व्यापार भी प्रभावित हो रहा है।
समर्थन मूल्य बढ़ा, लेकिन आवक कम
जिले में 13 सरकारी धान क्रय केंद्रों का हाल बदहाल है। समर्थन मूल्य बढ़ जाने के बाद भी किसान क्रय केंद्रों से किनारा कर रहे हैं। दो वर्ष साल पहले समर्थन मूल्य 1470 और 1510 रुपये था। विगत साल यह बढ़ाकर 1550 और 1570 रुपये कर दिया गया। इस बार समर्थन मूल्य फिर बढ़कर 1750 और 1770 रुपये कर दिया गया, लेकिन इसके बाद भी क्रय केंद्रों पर धान की आवक कम है।
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सरकारी क्रय केंद्रों पर मोटा धान लिया जाता है। इसके चलते आढ़तिया को ही धान बेच रहे हैं।
रमेश, रजपुरा
सुगंधा धान की खरीद सरकारी क्रय केंद्रों पर नहीं होती है। इसके चलते आढ़तिया के यहां जा रहे हैं।
राजेश, शीतलपुर
इनका कहना है
केंद्रों पर मोटे धान की खरीद की जाती है। मगर केंद्रों पर अच्छा समर्थन मूल्य मिल रहा है। धान खरीद को लेकर किसान परेशान नहीं हों।
प्रज्ञा शर्मा, खाद्य एवं विपणन अधिकारी, एटा
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जिले में विपणन विभाग को इस बार 2250 एमटी धान खरीद का लक्ष्य है। हालांकि अब तक महज 4500 क्विंटल धान की खरीद हो सकी है। बताया जाता है कि सरकारी क्रय केंद्रों पर मोटे धान की खरीद की जाती है और जिले में अधिकतर किसान सुगंधा धान का उत्पादन करते हैं। मंडी में आढ़तियों के यहां भी धान की खरीद सुस्त है। दिवाली के बाद अब तक किसान धान खरीद को कम रुख कर रहे हैं। आढ़तियों की मानें तो गत वर्ष की अपेक्षा इस बार धान की आवक एक चौथाई भी नहीं हैं। ऐसे में उनका धान का व्यापार भी प्रभावित हो रहा है।
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समर्थन मूल्य बढ़ा, लेकिन आवक कम
जिले में 13 सरकारी धान क्रय केंद्रों का हाल बदहाल है। समर्थन मूल्य बढ़ जाने के बाद भी किसान क्रय केंद्रों से किनारा कर रहे हैं। दो वर्ष साल पहले समर्थन मूल्य 1470 और 1510 रुपये था। विगत साल यह बढ़ाकर 1550 और 1570 रुपये कर दिया गया। इस बार समर्थन मूल्य फिर बढ़कर 1750 और 1770 रुपये कर दिया गया, लेकिन इसके बाद भी क्रय केंद्रों पर धान की आवक कम है।
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सरकारी क्रय केंद्रों पर मोटा धान लिया जाता है। इसके चलते आढ़तिया को ही धान बेच रहे हैं।
रमेश, रजपुरा
सुगंधा धान की खरीद सरकारी क्रय केंद्रों पर नहीं होती है। इसके चलते आढ़तिया के यहां जा रहे हैं।
राजेश, शीतलपुर
इनका कहना है
केंद्रों पर मोटे धान की खरीद की जाती है। मगर केंद्रों पर अच्छा समर्थन मूल्य मिल रहा है। धान खरीद को लेकर किसान परेशान नहीं हों।
प्रज्ञा शर्मा, खाद्य एवं विपणन अधिकारी, एटा