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इमाम-ए-हसन ने अमन से रहने का दिया पैगाम
Updated Tue, 18 Sep 2018 10:04 PM IST
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अलम का जुलूस निकालते अलमदार।
- फोटो : अमर उजाला
मैनपुरी-भोगांव। मोहर्रम की सात तारीख को बड़े अलम का जुलूस नगर मेें निकाला गया। युवाओं ने अखाड़ा खेलकर मातम किया। जुलूस करियानीम मोहल्ले से फातिहा ख्वानी के साथ मोहल्ला हवेली, प्रेमचिरैया, मोहम्मद सईद, मिर्धा, सब्जी मंडी चौराहे, कबीरगंज, जौहरी, चौधरी होता हुआ करियानीम पहुंचकर समाप्त हो गया। अलमदार शाकिर अली, आकिब शैख, हमीद हुसैन, इमरान एजाज खलीफा, बबलू खान, इदरीश, जावेद, सादाब, रिजवान, इमरान, शकील, साजिद, हामिद, छागल, शानू, नाजिम, मुफीद, नवी हुसैन, खाजिम, कफील मौजूद रहे।
कुरावली में मोहर्रम की सातवीं तारीख पर हुसैनी मोहर्रम कमेटी द्वारा हजरत इमाम-ए- हसन की याद में गमगीन माहौल में सद्दे का जुलूस निकाला गया। हाफिज मोहम्मद कलीम ने बताया सात तारीख को हजरत इमाम-ए- हसन जंग के मैदान करबला में गए थे, वहां पर हजरत को यजीदियों द्वारा सताया गया और हमला किया गया था। इसके बाद भी हजरत इमाम-ए- हसन ने सबको आपस में शांति बनाए रखने को प्रेरित किया। इस्लाम धर्म में जुआ, सट्टा, शराब हराम है इससे बचो। जुलूस तकिया वाली मस्जिद से शुरू होकर मोहल्ला पठानान, घरनाजपुर, कुरैशियान, महाजनान, सदर बाजार होते हुए मोहल्ला सराय में पहुंचा। कमेटी अध्यक्ष मोहम्मद कासिफ कुरैशी, नायब सदर राजखां, खजांची आसिफ फारूखी, नवेद हसन फारूखी, जुलूस सदर रईस उर्फ निक्का, आमिर फारूखी, शोयेल, नईम मंसूरी, बिलाल कुरैशी, मोहम्मद वारिश फारूखी मौजूद रहे।
बेवर में मोहर्रम माह में मंगलवार की देर शाम छोटे अलमों का जुलूस इमामबाड़ा ईदगाह रोड से मातमी धुनों के बीच निकाला गया। मोहर्रम कमेटी के जुल्फिकार अली ने बताया इस्लाम में साल कुर्बानी से शुरू और कुर्बानी से ही समाप्त होती है। हाजी इदरीश अली, हैदर अली, मोहम्मद अनस, मोनू अल्वी, सोनू अल्वी, जाहिद अली, अकरम खान, हसनेन मौजूद रहे।
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करहल में मोहर्रम के दौरान मुस्लिम बहुल बस्तियों में मजलिसों का दौर चल रहा है और हजरत इमाम हुसैन की शहादत याद करके उन्हें श्रद्धांजलि दी जा रही है। मंगलवार को मोहर्रम की सात तारीख पर अलम का जुलूस गम के माहौल में निकाला गया। गम की धुनें बजाकर हजरत इमाम हुसैन को याद किया गया। मजलिस में मौलाना असजद हुसैन ने अपनी तकरीर में कहा हिंदुस्तान ही इकलौता ऐसा देश है जहां सवा दो महीने तक अजादार गमे हुसैन मनाया जाता है।
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कुरावली में मोहर्रम की सातवीं तारीख पर हुसैनी मोहर्रम कमेटी द्वारा हजरत इमाम-ए- हसन की याद में गमगीन माहौल में सद्दे का जुलूस निकाला गया। हाफिज मोहम्मद कलीम ने बताया सात तारीख को हजरत इमाम-ए- हसन जंग के मैदान करबला में गए थे, वहां पर हजरत को यजीदियों द्वारा सताया गया और हमला किया गया था। इसके बाद भी हजरत इमाम-ए- हसन ने सबको आपस में शांति बनाए रखने को प्रेरित किया। इस्लाम धर्म में जुआ, सट्टा, शराब हराम है इससे बचो। जुलूस तकिया वाली मस्जिद से शुरू होकर मोहल्ला पठानान, घरनाजपुर, कुरैशियान, महाजनान, सदर बाजार होते हुए मोहल्ला सराय में पहुंचा। कमेटी अध्यक्ष मोहम्मद कासिफ कुरैशी, नायब सदर राजखां, खजांची आसिफ फारूखी, नवेद हसन फारूखी, जुलूस सदर रईस उर्फ निक्का, आमिर फारूखी, शोयेल, नईम मंसूरी, बिलाल कुरैशी, मोहम्मद वारिश फारूखी मौजूद रहे।
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बेवर में मोहर्रम माह में मंगलवार की देर शाम छोटे अलमों का जुलूस इमामबाड़ा ईदगाह रोड से मातमी धुनों के बीच निकाला गया। मोहर्रम कमेटी के जुल्फिकार अली ने बताया इस्लाम में साल कुर्बानी से शुरू और कुर्बानी से ही समाप्त होती है। हाजी इदरीश अली, हैदर अली, मोहम्मद अनस, मोनू अल्वी, सोनू अल्वी, जाहिद अली, अकरम खान, हसनेन मौजूद रहे।
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करहल में मोहर्रम के दौरान मुस्लिम बहुल बस्तियों में मजलिसों का दौर चल रहा है और हजरत इमाम हुसैन की शहादत याद करके उन्हें श्रद्धांजलि दी जा रही है। मंगलवार को मोहर्रम की सात तारीख पर अलम का जुलूस गम के माहौल में निकाला गया। गम की धुनें बजाकर हजरत इमाम हुसैन को याद किया गया। मजलिस में मौलाना असजद हुसैन ने अपनी तकरीर में कहा हिंदुस्तान ही इकलौता ऐसा देश है जहां सवा दो महीने तक अजादार गमे हुसैन मनाया जाता है।