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आगरा: लेने नहीं आए किसान, शीतगृह में सड़ गया सैकड़ों क्विंटल आलू
Updated Fri, 15 Dec 2017 11:05 PM IST
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आगरा। आलू निकासी को किसानों के न पहुंचने पर शीतगृह में ठंडा करने वाली मशीनों को बंद कर दिया है। इससे शीतगृह में रखा आलू अब सड़ने लगा है। शीतगृह की सफाई करने के लिए संचालक सड़ा हुआ आलू खुले में फेंक रहे हैं।
मंडी में किर्री के 50 किलो के एक पैकेट के 10 रुपये और गुल्ला के 30 से 40 रुपये दाम मिल रहे हैं। मंडी तक ले जाने में भाड़े का खर्च अलग है। अगर किसान शीतगृह से आलू निकालने पहुंचते हैं तो उन्हें प्रति पैकेट 110 रुपये का भाड़ा देना होगा।
इससे बचने को किसान आलू निकालने नहीं पहुंच रहा। इन हालातों में शीतगृह स्वामियों ने बिजली का खर्च बचाने के लिए ठंडा करने वाली मशीनों को बंद कर दिया है। इससे आलू सड़ने लगा है, जिनको बाहर फेंका जा रहे हैं।
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आगरा कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन के अध्यक्ष सुदर्शन सिंघल ने बताया कि शीतगृह में अभी भी 60 लाख पैकेट बचे हैं। किसान भी नहीं आ रहे, ऐसे में भंडारण कम होने पर एसी बंद करना मजबूरी हो गया है। मरम्मत के लिए सफाई भी करनी है।
त्वचा रोग, फेफड़े में संक्रमण का खतरा
खुले में पड़े सड़े आलू से बीमारी फैलने का खतरा बढ़ गया है। चिकित्सक मानते हैं कि इससे त्वचा और फेफड़े संबंधी दिक्कत हो सकती हैं। एसएन मेडिकल कॉलेज के फिजीशियन डा. टीपी सिंह बताते हैं कि सड़े हुए आलू के संपर्क में आने पर लोगों को फंगल इन्फेक्शन होने का खतरा रहता है। इसकी दूषित हवा फेफड़े की मरीजाें की दिक्कत बढ़ाएगी। इनमें संक्रमण का खतरा रहता है।
सड़े आलू खाने से पशुओं की हो सकती है मौत
सड़ा हुआ आलू पशुओं के लिए भी नुकसानदेह है। इसे खाने से पशुओं की मौत भी हो सकती है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. अजय सिन्हा बताते हैं कि खुले में आलू के ढेर पर पशु खाने जुट जाते हैं। अगर सड़ा हुआ आलू पशु ज्यादा खा ले और लगातार खाए तो उसके पेट में संक्रमण फैल सकता है। इससे पशु की मौत भी संभव है।
खुले में आलू फेंकने पर होगी कार्रवाई
उप निदेशक उद्यान विभाग कौशल कुमार का कहना है कि अगर कोई खुले में आलू फेंकता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। आलू निस्तारण के लिए नियम हैं, इसे गड्डा कर दबाना होगा। इसके निस्तारण और निगरानी के लिए नगर निगम, प्रदूषण बोर्ड, पशु चिकित्सा, कृषि, उद्यान विभाग के अधिकारियों की कमेटी बनाने के लिए प्रशासन के यहां प्रस्ताव भेजा जा रहा है।
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मंडी में किर्री के 50 किलो के एक पैकेट के 10 रुपये और गुल्ला के 30 से 40 रुपये दाम मिल रहे हैं। मंडी तक ले जाने में भाड़े का खर्च अलग है। अगर किसान शीतगृह से आलू निकालने पहुंचते हैं तो उन्हें प्रति पैकेट 110 रुपये का भाड़ा देना होगा।
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इससे बचने को किसान आलू निकालने नहीं पहुंच रहा। इन हालातों में शीतगृह स्वामियों ने बिजली का खर्च बचाने के लिए ठंडा करने वाली मशीनों को बंद कर दिया है। इससे आलू सड़ने लगा है, जिनको बाहर फेंका जा रहे हैं।
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आगरा कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन के अध्यक्ष सुदर्शन सिंघल ने बताया कि शीतगृह में अभी भी 60 लाख पैकेट बचे हैं। किसान भी नहीं आ रहे, ऐसे में भंडारण कम होने पर एसी बंद करना मजबूरी हो गया है। मरम्मत के लिए सफाई भी करनी है।
त्वचा रोग, फेफड़े में संक्रमण का खतरा
खुले में पड़े सड़े आलू से बीमारी फैलने का खतरा बढ़ गया है। चिकित्सक मानते हैं कि इससे त्वचा और फेफड़े संबंधी दिक्कत हो सकती हैं। एसएन मेडिकल कॉलेज के फिजीशियन डा. टीपी सिंह बताते हैं कि सड़े हुए आलू के संपर्क में आने पर लोगों को फंगल इन्फेक्शन होने का खतरा रहता है। इसकी दूषित हवा फेफड़े की मरीजाें की दिक्कत बढ़ाएगी। इनमें संक्रमण का खतरा रहता है।
सड़े आलू खाने से पशुओं की हो सकती है मौत
सड़ा हुआ आलू पशुओं के लिए भी नुकसानदेह है। इसे खाने से पशुओं की मौत भी हो सकती है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. अजय सिन्हा बताते हैं कि खुले में आलू के ढेर पर पशु खाने जुट जाते हैं। अगर सड़ा हुआ आलू पशु ज्यादा खा ले और लगातार खाए तो उसके पेट में संक्रमण फैल सकता है। इससे पशु की मौत भी संभव है।
खुले में आलू फेंकने पर होगी कार्रवाई
उप निदेशक उद्यान विभाग कौशल कुमार का कहना है कि अगर कोई खुले में आलू फेंकता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। आलू निस्तारण के लिए नियम हैं, इसे गड्डा कर दबाना होगा। इसके निस्तारण और निगरानी के लिए नगर निगम, प्रदूषण बोर्ड, पशु चिकित्सा, कृषि, उद्यान विभाग के अधिकारियों की कमेटी बनाने के लिए प्रशासन के यहां प्रस्ताव भेजा जा रहा है।