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योगी बाबा, हम गरीब बच्चों को भी ठंड लगती है
Updated Mon, 04 Dec 2017 10:58 PM IST
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एटा। योगी बाबा, हम गरीब बच्चों को भी ठंड लगती है। आपकी सरकार परिषदीय बच्चों को ही स्कूली बैग, स्वेटर, जूता-मोजा वितरित कर रही है, लेकिन हम गरीबों को नहीं। हमारा कसूर बस इतना है कि हम निकटवर्ती राजकीय एवं सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ रहे हैं।
सबका साथ सबका विकास का नारा देकर सत्ता में आई योगी सरकार की स्कूली योजनाओं पर पक्षपात की अंगुलियां उठ रही हैं। सरकार की नीतियों से अन्य सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे गरीब बच्चे मायूस हैं। स्कूली बैग वितरण से मायूस रहे राजकीय-एडेड स्कूलों के बच्चों को अब स्वेटर, जूता-मोजा लाभ से भी वंचित किया जा रहा है।
शासन की नीति से बच्चे ही नहीं निर्धन अभिभावक मायूस ही नहीं वरन इनका दर्द भी छलक उठा है। योगी सरकार के समय में शुरू हुई बैग, स्वेटर, जूता-मोजा योजनाओं का लाभ केवल परिषदीय बच्चों को ही मिल रहा है। मायूस बच्चों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री से संस्थाओं के नाम पर गरीब बच्चों में पक्षपात न करने की गुहार की है।
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मजदूर के बेटे व कक्षा छह के छात्र गोविंद का कहना है कि हम गरीबों को भी सर्दी लग रही है लेकिन आप द्वारा केवल परिषदीय स्कूलों के बच्चों की गरीबी को माना जा रहा है। यह हम जैसे हजारों गरीबों की उपेक्षा ही नहीं वरन अपमान भी है।
अभिभावक जगत सिंह, योगेश आदि का कहना है कि पूर्व सरकार ने परिषदीय, राजकीय एवं एडिड स्कूलों में पक्षपात नहीं किया। शुल्क माफी, पुस्तकें, ड्रेस एवं एमडीएम का लाभ अभी भी सबको मिल रहा है। लेकिन योगी सरकार की पक्षपातपूर्ण नीति से बच्चे व हम मायूस हैं। जिले में कुल 1.68 लाख बच्चे परिषदीय, राजकीय एवं एडेड स्कूलों में पंजीकृत हैं। इनमें केवल परिषदीय बच्चे 1.40 लाख हैं।
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सबका साथ सबका विकास का नारा देकर सत्ता में आई योगी सरकार की स्कूली योजनाओं पर पक्षपात की अंगुलियां उठ रही हैं। सरकार की नीतियों से अन्य सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे गरीब बच्चे मायूस हैं। स्कूली बैग वितरण से मायूस रहे राजकीय-एडेड स्कूलों के बच्चों को अब स्वेटर, जूता-मोजा लाभ से भी वंचित किया जा रहा है।
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शासन की नीति से बच्चे ही नहीं निर्धन अभिभावक मायूस ही नहीं वरन इनका दर्द भी छलक उठा है। योगी सरकार के समय में शुरू हुई बैग, स्वेटर, जूता-मोजा योजनाओं का लाभ केवल परिषदीय बच्चों को ही मिल रहा है। मायूस बच्चों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री से संस्थाओं के नाम पर गरीब बच्चों में पक्षपात न करने की गुहार की है।
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मजदूर के बेटे व कक्षा छह के छात्र गोविंद का कहना है कि हम गरीबों को भी सर्दी लग रही है लेकिन आप द्वारा केवल परिषदीय स्कूलों के बच्चों की गरीबी को माना जा रहा है। यह हम जैसे हजारों गरीबों की उपेक्षा ही नहीं वरन अपमान भी है।
अभिभावक जगत सिंह, योगेश आदि का कहना है कि पूर्व सरकार ने परिषदीय, राजकीय एवं एडिड स्कूलों में पक्षपात नहीं किया। शुल्क माफी, पुस्तकें, ड्रेस एवं एमडीएम का लाभ अभी भी सबको मिल रहा है। लेकिन योगी सरकार की पक्षपातपूर्ण नीति से बच्चे व हम मायूस हैं। जिले में कुल 1.68 लाख बच्चे परिषदीय, राजकीय एवं एडेड स्कूलों में पंजीकृत हैं। इनमें केवल परिषदीय बच्चे 1.40 लाख हैं।