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यमुना में विशालकाय कछुओं की मौत का रहस्य गहराया
Updated Sat, 29 Jul 2017 12:59 PM IST
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आगरा कछुआ
- फोटो : SELF
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आगरा। यमुना नदी में जवाहर पुल के नीचे दो दर्जन से ज्यादा कछुओं के मरने का राज गहरा रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अधिकारियों की टीम ने शुक्रवार को नदी के पानी के सैंपल भरे और मौके पर जाकर जायजा लिया। टीम को शुक्रवार को मृत कछुए नजर नहीं आए।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारियों के मुताबिक, नदी में इन दिनों इतना प्रदूषण नहीं है, जिसमें कछुए मर जाएं। ऐसे में मामला कछुओं की तस्करी और किसी फैक्ट्री से अचानक छोड़े गए जहरीले रसायन के बीच फंसा है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी अतुलेश यादव ने डा. विश्वनाथ शर्मा समेत तीन लोगों की टीम बनाकर जांच को भेजी। टीम ने स्थानीय लोगों से बात भी की। नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ पानी की क्वालिटी भी बेहतर नजर आई। हालांकि विस्तृत जांच रिपोर्ट आनी बाकी है। अधिकारियों के मुताबिक, किसी शहर में किसी फैक्ट्री से घातक रसायनों के अचानक छोड़े जाने से ऐसा हुआ हो और वहां से कछुए पानी में बहकर आगरा आ गए हों, इस तथ्य पर भी गौर किया जा रहा है। आगरा और मथुरा में किसी फैक्ट्री से बड़े डिस्चार्ज की सूचना भी मांगी जा रही है।
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कछुओं के मरने के मामले में नदी से सैंपल लिए गए हैं। इसकी विस्तृत जांच रिपोर्ट आनी बाकी है। हालांकि इन दिनों नदी में इतना प्रदूषण नहीं होता कि जीव जंतु मरने लगें। अपस्ट्रीम में किसी अन्य शहर से भी यह नदी में आए लगते हैं।
- अतुलेश यादव, क्षेत्रीय अधिकारी, उ.प्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारियों के मुताबिक, नदी में इन दिनों इतना प्रदूषण नहीं है, जिसमें कछुए मर जाएं। ऐसे में मामला कछुओं की तस्करी और किसी फैक्ट्री से अचानक छोड़े गए जहरीले रसायन के बीच फंसा है।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी अतुलेश यादव ने डा. विश्वनाथ शर्मा समेत तीन लोगों की टीम बनाकर जांच को भेजी। टीम ने स्थानीय लोगों से बात भी की। नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ पानी की क्वालिटी भी बेहतर नजर आई। हालांकि विस्तृत जांच रिपोर्ट आनी बाकी है। अधिकारियों के मुताबिक, किसी शहर में किसी फैक्ट्री से घातक रसायनों के अचानक छोड़े जाने से ऐसा हुआ हो और वहां से कछुए पानी में बहकर आगरा आ गए हों, इस तथ्य पर भी गौर किया जा रहा है। आगरा और मथुरा में किसी फैक्ट्री से बड़े डिस्चार्ज की सूचना भी मांगी जा रही है।
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कछुओं के मरने के मामले में नदी से सैंपल लिए गए हैं। इसकी विस्तृत जांच रिपोर्ट आनी बाकी है। हालांकि इन दिनों नदी में इतना प्रदूषण नहीं होता कि जीव जंतु मरने लगें। अपस्ट्रीम में किसी अन्य शहर से भी यह नदी में आए लगते हैं।
- अतुलेश यादव, क्षेत्रीय अधिकारी, उ.प्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड