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लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा में में लगाई ‘आस्था ’ की डुबकी
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लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा में में लगाई ‘आस्था ’ की डुबकी
- फोटो : अमर उजाला
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कासगंज। गंगा दशहरा पर्व पर बुधवार को लाखों श्रद्धालुओं ने हर-हर गंगे के जयकारों के बीच गंगा में आस्था की डुबकी लगाई। गंगा स्नान के जगह-जगह गंगाघाटों पर धार्मिक अनुष्ठान किए गए।
कछला गंगाघाट पर सर्वाधिक भीड़ का आलम रहा। सुबह से ही स्नान का सिलसिला शुरू हप गया। लहरा गंगाघाट, गंजडुंडवारा के कादरगंज गंगाघाट, सहवाजपुर एवं भकुरी गंगाघाट पर भी श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। गंगाघाटों पर श्रद्धा और भक्ति के संगम का नजारा हर किसी को लुभा रहा था। पर्व से एक दिन पूर्व ही गंगाघाटों पर श्रद्धालुओं की जबरदस्त भीड़ उमड़ी। जगह-जगह श्रद्धालुओं के डेरे गंगा किनारे नजर आ रहे थे। गंगाघाटों पर रात के समय लगातार श्रद्धालुओं वाहन पहुंच रहे थे। सुबह ब्रह्म मुहूर्त के साथ ही स्नान का सिलसिला शुरू हो गया। पूरे दिन गंगाघाट पर स्नान होता रहा। श्रद्धालुओं की भीड़ के आगे व्यवस्थाएं बौनी नजर आ रहीं थीं। श्रद्धालुओं ने मां गंगा की पैरावनी की। दुग्धाभिषेक किया। लड्डू प्रसाद अर्पित किए। ब्राह्मणों और गरीबों को दान दक्षिणा दी और भोजन कराया गया। मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात आदि क्षेत्र के तमाम श्रद्धालु पहुंचे और अपनी-अपनी परंपराओं के मुताबिक श्रद्धालुओं ने गंगाघाट पर देवताओं का पूजन किया और यज्ञ अनुष्ठान आयोजित किए।
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गर्मी में जाम में फंसे रहे श्रद्धालु
कासगंज-बरेली मार्ग पर सोरों से कछला तक की 14 किलोमीटर की दूरी तय करने में 2 से ढाई घंटे का समय श्रद्धालुओं को लगा। पुलिस प्रशासन ने जगह-जगह ट्रैफिक रोका। कछला से कासगंज तक 6 स्थानों पर रूट डायवर्जन किया गया। इसके बावजूद जाम के हालात बने। श्रद्धालुओं की भीड़ के कारण यह दिक्कतें उठानी पड़ी। दिनभर कासगंज और बदायूं की पुलिस जाम खुलवाने के लिए जूझती रही। कार से बरेली तक सफर के लिए निकले शहर के कारोबारी शशिकांत गर्ग ने बताया कि नगरिया से कछला तक काफी जाम था और उन्हें ढाई घंटे का समय लग गया। उन्हें बरेली जाना था। काफी समय जाम में बर्बाद हो गया। उन्होंने कहा कि हर बार स्नान पर्वों के मौके पर इसी तरह की समस्याएं होती हैं।
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बच्चों के कराए गए मुंडन संस्कार
कासगंज। गंगाघाटों पर बड़ी संख्या में लोगों ने अपने छोटे बच्चों के मुंडन संस्कार कराए। बुधवार को जगह-जगह मुंडन संस्कार होते नजर आए। तमाम परिवारों में गंगा किनारे मुंडन कराने की परंपरा है। इन परंपराओं को श्रद्धालु श्रद्धा के साथ पूरा करते नजर आ रहे थे।
खाद्य सामग्री का अभाव
कासगंज। गंगाघाटों पर भीड़ का जबरदस्त आलम होने के कारण जगह-जगह सजी खाद्य पदार्थों की दुकानों पर खाद्य सामग्री कम पड़ गई। गंगाघाट पर जगह-जगह पूड़ी सब्जी व अन्य खाद्य सामग्री की दुकानें सजी हुईं थीं। दुकानदार कई दिनों से तैयारियों में जुटे थे, लेकिन अधिक भीड़ के कारण दोपहर तक ज्यादातर दुकानदारों का सामान निपटने लगा तो दुकानदार नई तैयारी करते नजर आ रहे थे। चाट की दुकानों पर भी चाट की जमकर बिक्री हुई। लोगों ने छोले की चाट का जमकर लुत्फ उठाया।
खूब बिके तरबूज -खरबूज
कासगंज। गंगाघाटों पर दशहरा पर बिक्री के लिए तरबूज, खरबूज की तमाम दुकानें सजाई गई थीं। इन दुकानों पर सुबह से ही बिक्री का सिलसिला शुरू हो गया। श्रद्धालुओं ने दान के लिए तरबूज और खरबूज की खरीद की तो वहीं खुद के प्रयोग के लिए भी तरबूज- खरबूज खरीदे। तरबूज- खरबूज के लिए दुकानदारों ने ही नहीं, बल्कि किसानों ने भी अपनी दुकानें सजाईं थी, क्योंकि गंगा की तलहटी में तरबूज और खरबूज की काफी पैदावार होती है।
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कछला गंगाघाट पर सर्वाधिक भीड़ का आलम रहा। सुबह से ही स्नान का सिलसिला शुरू हप गया। लहरा गंगाघाट, गंजडुंडवारा के कादरगंज गंगाघाट, सहवाजपुर एवं भकुरी गंगाघाट पर भी श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। गंगाघाटों पर श्रद्धा और भक्ति के संगम का नजारा हर किसी को लुभा रहा था। पर्व से एक दिन पूर्व ही गंगाघाटों पर श्रद्धालुओं की जबरदस्त भीड़ उमड़ी। जगह-जगह श्रद्धालुओं के डेरे गंगा किनारे नजर आ रहे थे। गंगाघाटों पर रात के समय लगातार श्रद्धालुओं वाहन पहुंच रहे थे। सुबह ब्रह्म मुहूर्त के साथ ही स्नान का सिलसिला शुरू हो गया। पूरे दिन गंगाघाट पर स्नान होता रहा। श्रद्धालुओं की भीड़ के आगे व्यवस्थाएं बौनी नजर आ रहीं थीं। श्रद्धालुओं ने मां गंगा की पैरावनी की। दुग्धाभिषेक किया। लड्डू प्रसाद अर्पित किए। ब्राह्मणों और गरीबों को दान दक्षिणा दी और भोजन कराया गया। मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात आदि क्षेत्र के तमाम श्रद्धालु पहुंचे और अपनी-अपनी परंपराओं के मुताबिक श्रद्धालुओं ने गंगाघाट पर देवताओं का पूजन किया और यज्ञ अनुष्ठान आयोजित किए।
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गर्मी में जाम में फंसे रहे श्रद्धालु
कासगंज-बरेली मार्ग पर सोरों से कछला तक की 14 किलोमीटर की दूरी तय करने में 2 से ढाई घंटे का समय श्रद्धालुओं को लगा। पुलिस प्रशासन ने जगह-जगह ट्रैफिक रोका। कछला से कासगंज तक 6 स्थानों पर रूट डायवर्जन किया गया। इसके बावजूद जाम के हालात बने। श्रद्धालुओं की भीड़ के कारण यह दिक्कतें उठानी पड़ी। दिनभर कासगंज और बदायूं की पुलिस जाम खुलवाने के लिए जूझती रही। कार से बरेली तक सफर के लिए निकले शहर के कारोबारी शशिकांत गर्ग ने बताया कि नगरिया से कछला तक काफी जाम था और उन्हें ढाई घंटे का समय लग गया। उन्हें बरेली जाना था। काफी समय जाम में बर्बाद हो गया। उन्होंने कहा कि हर बार स्नान पर्वों के मौके पर इसी तरह की समस्याएं होती हैं।
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बच्चों के कराए गए मुंडन संस्कार
कासगंज। गंगाघाटों पर बड़ी संख्या में लोगों ने अपने छोटे बच्चों के मुंडन संस्कार कराए। बुधवार को जगह-जगह मुंडन संस्कार होते नजर आए। तमाम परिवारों में गंगा किनारे मुंडन कराने की परंपरा है। इन परंपराओं को श्रद्धालु श्रद्धा के साथ पूरा करते नजर आ रहे थे।
खाद्य सामग्री का अभाव
कासगंज। गंगाघाटों पर भीड़ का जबरदस्त आलम होने के कारण जगह-जगह सजी खाद्य पदार्थों की दुकानों पर खाद्य सामग्री कम पड़ गई। गंगाघाट पर जगह-जगह पूड़ी सब्जी व अन्य खाद्य सामग्री की दुकानें सजी हुईं थीं। दुकानदार कई दिनों से तैयारियों में जुटे थे, लेकिन अधिक भीड़ के कारण दोपहर तक ज्यादातर दुकानदारों का सामान निपटने लगा तो दुकानदार नई तैयारी करते नजर आ रहे थे। चाट की दुकानों पर भी चाट की जमकर बिक्री हुई। लोगों ने छोले की चाट का जमकर लुत्फ उठाया।
खूब बिके तरबूज -खरबूज
कासगंज। गंगाघाटों पर दशहरा पर बिक्री के लिए तरबूज, खरबूज की तमाम दुकानें सजाई गई थीं। इन दुकानों पर सुबह से ही बिक्री का सिलसिला शुरू हो गया। श्रद्धालुओं ने दान के लिए तरबूज और खरबूज की खरीद की तो वहीं खुद के प्रयोग के लिए भी तरबूज- खरबूज खरीदे। तरबूज- खरबूज के लिए दुकानदारों ने ही नहीं, बल्कि किसानों ने भी अपनी दुकानें सजाईं थी, क्योंकि गंगा की तलहटी में तरबूज और खरबूज की काफी पैदावार होती है।