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ओडीओपी बनी मजाक, करोड़ों खर्च के बाद भी नहीं खनके घुंघरू
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एटा। वन डिस्ट्रिक वन प्रोडक्ट योजना जिले में मजाक बन कर रह गई है। इस योजना के तहत सरकार की ओर से करोड़ों रुपये का ऋण दिया गया, लेकिन उद्योग स्थापित नहीं होने से योजना परवान नहीं चढ़ सकी। जिले में ओडीओपी योजना के तहत घंटी घुंघरू को चयनित किया गया है, इसे जिले भर में फैलाने की मंशा है। लेकिन ऐसा हो नहीं सका।
ओडीओपी योजना के तहत वित्तीय वर्ष में छह उद्यमियों को उद्योग बढ़ाने के लिए आर्थिक सहयोग दिया गया था। इनमें से दो उद्यमियों ने बड़ा उद्योग लगाया था, जबकि चार ने उद्योग विस्तार करने के लिए ऋण लिया था। बड़े उद्यमियों ने उद्योग स्थापित करने के लिए ऋण तो मोटा लिया, लेकिन उद्योग स्थापित करने में नाकाम रहे। इससे ओडीओपी योजना जिले में पूरी तरह से शासन की मंशा के अनुरूप नहीं पनप पाई। यही वजह रही है कि जिले के युवाओं को भी उद्योग से जुड़कर रोजगार नहीं मिल सका। जिले में घंटी घुंघरू के अलावा और कोई ऐसा उत्पाद नहीं है जिसको पहचान मिल सकी हो। घंटी घुंघरू जिले के कस्बा जलेसर में उत्पादन होता रहा है, लेकिन अब जलेसर पर ताज ट्रिपोजियम जोन की वजह से पहरा लगा दिया गया है। प्रदूषण की वजह से ताज को नुकसान न पहुंचे इसलिए जलेसर में उत्पादन नहीं करके जिले के अन्य भागों में उत्पादन करने पर जोर दिया जा रहा है। यही वजह रही है कि जिला मुख्यालय सहित अलीगंज तक योजना को विस्तारित करने पर जोर दिया जा रहा है। इसको लेकर वित्तीय वर्ष में पूरे जिले के उद्यमियों को लोन मुहैया कराई गई।
इन उद्यमियों को दी गई आर्थिक सहायता
ओडीओपी योजना के तहत छह उद्यमियों को आर्थिक सहयोग किया गया उनमें धर्मवीर सिंह गहलोत एटा, उमेश कुमार अलीगंज, जिनेंद्र प्रभा जैन एटा, मुहम्मद नईम जलेसर, सविता कुमार जलेसर और दिलीप कुमार जलेसर शामिल रहे हैं। इन उद्यमियों को दो करोड़ 98 लाख 28 हजार रुपये ओडीओपी योजना में ऋण दिए गए हैं।
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अनुदान पर रहती है उद्यमियों की नजर
सरकार की अन्य योजनाओं की तरह ओडीओपी पर भी उद्यमियों की अनुदान पर नजर है। यही वजह है कि सरकार से मिलने वाले 25 फीसदी अनुदान को डकारने के लिए ही बड़े लोन कराए गए हैं। धरातल पर एक वर्ष बीत जाने के बाद भी कोई भी इकाई फल फूल नहीं रही है।
ओडीओपी योजना के तहत घंटी घुंघरू की इकाइयों को बैंकों की तरफ से सहयोग नहीं मिल पा रहा है, यही कारण है कि उद्यमियों की ओर से अब तक उत्पादन नहीं शुरू कराया जा सका है। सरकार की नीति है कि अगर उद्यमी दो वर्ष तक उत्पादन नहीं करता है योजना के लाभ से वंचित कर दिया जाएगा।
सुधीर सिंह यादव, उपायुक्त उद्योग
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ओडीओपी योजना के तहत वित्तीय वर्ष में छह उद्यमियों को उद्योग बढ़ाने के लिए आर्थिक सहयोग दिया गया था। इनमें से दो उद्यमियों ने बड़ा उद्योग लगाया था, जबकि चार ने उद्योग विस्तार करने के लिए ऋण लिया था। बड़े उद्यमियों ने उद्योग स्थापित करने के लिए ऋण तो मोटा लिया, लेकिन उद्योग स्थापित करने में नाकाम रहे। इससे ओडीओपी योजना जिले में पूरी तरह से शासन की मंशा के अनुरूप नहीं पनप पाई। यही वजह रही है कि जिले के युवाओं को भी उद्योग से जुड़कर रोजगार नहीं मिल सका। जिले में घंटी घुंघरू के अलावा और कोई ऐसा उत्पाद नहीं है जिसको पहचान मिल सकी हो। घंटी घुंघरू जिले के कस्बा जलेसर में उत्पादन होता रहा है, लेकिन अब जलेसर पर ताज ट्रिपोजियम जोन की वजह से पहरा लगा दिया गया है। प्रदूषण की वजह से ताज को नुकसान न पहुंचे इसलिए जलेसर में उत्पादन नहीं करके जिले के अन्य भागों में उत्पादन करने पर जोर दिया जा रहा है। यही वजह रही है कि जिला मुख्यालय सहित अलीगंज तक योजना को विस्तारित करने पर जोर दिया जा रहा है। इसको लेकर वित्तीय वर्ष में पूरे जिले के उद्यमियों को लोन मुहैया कराई गई।
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इन उद्यमियों को दी गई आर्थिक सहायता
ओडीओपी योजना के तहत छह उद्यमियों को आर्थिक सहयोग किया गया उनमें धर्मवीर सिंह गहलोत एटा, उमेश कुमार अलीगंज, जिनेंद्र प्रभा जैन एटा, मुहम्मद नईम जलेसर, सविता कुमार जलेसर और दिलीप कुमार जलेसर शामिल रहे हैं। इन उद्यमियों को दो करोड़ 98 लाख 28 हजार रुपये ओडीओपी योजना में ऋण दिए गए हैं।
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अनुदान पर रहती है उद्यमियों की नजर
सरकार की अन्य योजनाओं की तरह ओडीओपी पर भी उद्यमियों की अनुदान पर नजर है। यही वजह है कि सरकार से मिलने वाले 25 फीसदी अनुदान को डकारने के लिए ही बड़े लोन कराए गए हैं। धरातल पर एक वर्ष बीत जाने के बाद भी कोई भी इकाई फल फूल नहीं रही है।
ओडीओपी योजना के तहत घंटी घुंघरू की इकाइयों को बैंकों की तरफ से सहयोग नहीं मिल पा रहा है, यही कारण है कि उद्यमियों की ओर से अब तक उत्पादन नहीं शुरू कराया जा सका है। सरकार की नीति है कि अगर उद्यमी दो वर्ष तक उत्पादन नहीं करता है योजना के लाभ से वंचित कर दिया जाएगा।
सुधीर सिंह यादव, उपायुक्त उद्योग