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चंद किलोमीटर चलकर हांफने लगती हैं बूढ़ीं एंबुलेंस

Fri, 07 Jun 2019 10:49 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Fri, 07 Jun 2019 10:49 PM IST
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चंद किलोमीटर चलकर हांफने लगती हैं बूढ़ीं एंबुलेंस
एंबुलेंस ख्ाराब - फोटो : अमर उजाला
मैनपुरी। जिले में बूढ़ी हो चुकीं एंबुलेंसों को जबरन दौड़ाया जा रहा है। ऐसे में चंद किलोमीटर चलने पर ही इनकी सांसें फूलने लगती हैं। इससे इमरजेंसी के मरीजों की मौत तक हो जाती है। स्वास्थ्य सेवाओं में 108 और 102 एंबुलेंस का विशेष योगदान हैं। जिले की अधिकतर एंबुलेंस अपनी उम्र पूरी कर चुकी हैं। इसीलिए जिले की सड़कों पर तीमारदार एंबुलेंस में धक्का लगाते हुए मिल जाएंगे। फिर भी न तो कार्यदायी संस्था इस ओर ध्यान दे रही है और न ही स्वास्थ्य विभाग के आला अफसर।
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जिले में 108 की कुल 16 एंबुलेंस संचालित हो रही हैं। यह एंबुलेंस जिले को वर्ष 2012 में मिली थीं। एंबुलेंस का संचालन जीवीके इमरजेंसी मैनेजमेंट रिसर्च इंस्टीट्यूट की ओर से किया जा रहा है। मानक के अनुसार एंबुलेंस को तीन लाख किलोमीटर तक ही चलाया जा सकता है, लेकिन 16 में 12 एंबुलेंस चार लाख किलोमीटर का आंकड़ा छूने जा रही हैं। कुल मिलाकर 12 एंबुलेंस की उम्र पूरी हो चुकी है। इनमें पांच एंबुलेंस जिला अस्पताल से और सात एंबुलेंस सीएचसी से अटैच हैं।
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जिले में जो 108 और 102 नंबर एंबुलेंस संचालित हो रही हैं। इनकी मरम्मत भी समय से नहीं होती है। ऐसी गर्मी में शायद ही किसी एंबुलेंस का एसी काम कर रहा हो। कई एंबुलेंस में तो शीशे तक टूटे हैं। साथ ही कई एंबुलेंस में बैक लाइट तक नहीं है। इसका सीधा मतलब है कि एंबुलेंस का कागजों में तो मेंटेनेंस होता है, लेकिन हकीकत में इन पर ध्यान नहीं दिया जाता।
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