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नहीं ली अनुमति, टुकड़ों में कराए विकास कार्य, जांच बैठाई
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मैनपुरी। प्रशासनिक वित्तीय स्वीकृति लेने से बचने के लिए ग्राम पंचायतों ने जमकर खेल किया। टुकड़ों में विकास कार्य करवाकर उन्होंने स्वीकृति नहीं ली। मामला संज्ञान में आने के बाद जिला पंचायत राज विभाग ने सभी ग्राम पंचायतों में जांच शुरू कर दी है। इसके बाद ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव को कार्रवाई का डर सता रहा है।
जिले में 552 ग्राम पंचायतें हैं। इन ग्राम पंचायतों में हर महीने करोड़ों रुपये की धनराशि से विकास कार्य कराए जाते हैं। लेकिन अपनी जेबें भरने के चक्कर में ग्राम पंचायतों में जमकर खेल भी चलता है। इस बार भी ऐसा ही कुछ हुआ है। ग्राम प्रधान व पंचायत सचिव ने बड़े कार्य टुकड़ों में कराकर प्रशासन से वित्तीय स्वीकृति नहीं ली। मामला सामने आने के बाद अब सभी ग्राम पंचायतों की जांच की जा रही है।
नियमानुसार दो लाख रुपये तक के विकास कार्य ग्राम पंचायत करा सकती है। इसके बाद ढाई लाख तक के लिए एडीओ पंचायत, पांच लाख तक के लिए जिला पंचायत राज अधिकारी और इससे अधिक की धनराशि स्वीकृत करने के लिए डीएम की अनुमति अनिवार्य है। गत वित्तीय वर्ष में डीपीआरओ से भी केवल नौ कार्यों के लिए ही अनुमति ली गई। ऐसे में ग्राम पंचायतों ने बड़ा खेल किया। जांच शुरू होने के बाद अब ग्राम प्रधान और सचिवों की नींद उड़ गई है।
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जिले में 552 ग्राम पंचायतें हैं। इन ग्राम पंचायतों में हर महीने करोड़ों रुपये की धनराशि से विकास कार्य कराए जाते हैं। लेकिन अपनी जेबें भरने के चक्कर में ग्राम पंचायतों में जमकर खेल भी चलता है। इस बार भी ऐसा ही कुछ हुआ है। ग्राम प्रधान व पंचायत सचिव ने बड़े कार्य टुकड़ों में कराकर प्रशासन से वित्तीय स्वीकृति नहीं ली। मामला सामने आने के बाद अब सभी ग्राम पंचायतों की जांच की जा रही है।
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नियमानुसार दो लाख रुपये तक के विकास कार्य ग्राम पंचायत करा सकती है। इसके बाद ढाई लाख तक के लिए एडीओ पंचायत, पांच लाख तक के लिए जिला पंचायत राज अधिकारी और इससे अधिक की धनराशि स्वीकृत करने के लिए डीएम की अनुमति अनिवार्य है। गत वित्तीय वर्ष में डीपीआरओ से भी केवल नौ कार्यों के लिए ही अनुमति ली गई। ऐसे में ग्राम पंचायतों ने बड़ा खेल किया। जांच शुरू होने के बाद अब ग्राम प्रधान और सचिवों की नींद उड़ गई है।
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