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प्रचार करके बने सांसद

Tue, 12 Mar 2019 09:59 PM IST
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Updated Tue, 12 Mar 2019 09:59 PM IST
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प्रचार करके बने सांसद
मैनपुरी। आजादी के आंदोलन में बढ़ चढ़कर भागीदारी करने वाले बादशाह गुप्ता जिले के पहले सांसद बने। इसके बाद उन्हें दूसरे चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। तीसरी लोकसभा के लिए हुए चुनाव में वे एक बार फिर सांसद बने। सत्तू और चबैना साथ लेकर साइकिल से चुनाव प्रचार करने वाले बादशाह गुप्ता अपनी बेबाक टिप्पणी करने के लिए जाने जाते थे।
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किशनी के रामनगर के रहने वाले जिले के पहले और तीसरे सांसद रहे बादशाह गुप्ता ने घर-घर जाकर मतदाताओं से सीधे संपर्क करते थे। खेत में काम करने वाले किसानों केे साथ खेत में बैठकर चुनावी चर्चा की। दो बार सांसद रहे बादशाह गुप्ता ने कभी दिखावा नहीं किया। चुनाव प्रचार के दौरान वह घर परिवार से दूर ही रहे। आजादी के आंदोलन में उनके साथियों ने ही उनकी चुनावी कमान संभाली। पहले चुनाव की अपेक्षा हर बार उनको मिले वोटों में गिरावट आती रही। मतदाताओं के साथ ही कांग्रेस नेताओं केे बीच वह बेबाक टिप्पणी कर देते थे। अधिकारियों को आदेश देने की बजाए वह हमेशा जायज काम कराने के लिए अड़ जाते थे।
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कांग्रेस कार्यालय की कराई थी स्थापना
पीसीसी सदस्य फैयाज अहमद सिद्दीकी बताते हैं बादशाह गुप्ता पैदल चलने के शौकीन थे। सांसद रहते हुए बाजार आने पर दुुकानदारों का हाल पूछना नहीं भूलते थे। कार्यकर्ता की समस्या का समाधान कराने के लिए पैदल और साइकिल से ही अधिकारियों को मिलने पहुंच जाते थे। उन्होंने पहल करके मंडी धर्मउास में पार्टी कार्यालय स्थापित कराया। जो आज भी उसी स्थान पर संचालित है।
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वोट मांगने चल देते थे ग्रामीण
पूर्व सहकारी बैंक अध्यक्ष सतीश यादव बताते हैं लोगों केे बीच बादशाह गुप्ता बेहद लोकप्रिय थे। चुनाव प्रचार के लिए वह जिस गांव में पहुंचते वहां के लोग उनके साथ वोट मंगवाने के लिए खुद ही चल देते थे। आसपास के गांवों तक लोग उनके साथ वोट मांगते थे।
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दो बार जीते वर्ष विजेता वोट मुख्य प्रतिद्वंद्वी वोट
1951 बादशाह गुप्ता 61736 रघुवीर सहाय 23265
1962 बादशाह गुप्ता 52328 रामनाथ 51524
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दो बार हारे
1957 वंशीदास धनगर 59902 बादशाह गुप्ता 56072
1971 महाराज सिंह 102981 बादशाह गुप्ता 33618

बदहाली का शिकार प्रथम सांसद का गांव
कुसमरा। एक समय अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों की सूची में प्राथमिकता पर रहा रामनगर आज बदहाली का शिकार है। टूटीं गलियां, बदहाल रास्ते, गंदगी से भरीं नालियां विकास को मुंह चिढ़ाती हैं। गांव में सबसे बड़ी समस्या तालाब है। जल निकासी के लिए बनवाया गया नाला अस्तित्वहीन हो चुका है। गांव की गलियों में हमेशा पानी भरा रहता है।


अब विकास के नाम पर देंगे वोट
कुसमरा। गांव के लगभग 1200 मतदाताओं को विकास का इंतजार है। ग्राम प्रधान कमलेश यादव राजू सागर, ब्रजेश चौहान, शीलू गुप्ता, अखिलेश गुप्ता, अनिल वर्मा, उदयभान वर्मा, रोहित वर्मा, अनुराग वर्मा, राजीव गुप्ता, रामप्रकाश गुप्ता का कहना है इस बार उसी को वोट देंगे जो गांव का विकास कराएगा।
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