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खुरपका, मुंहपका के टीकाकरण में फर्जीवाड़ा
Updated Tue, 18 Sep 2018 11:57 PM IST
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मथुरा। पशुओं में फैलने वाले रोग खुरपका, मुंहपका की रोकथाम को होने वाले टीकाकरण में पशु चिकित्सकों तथा पैरावेट की टीम जमकर फर्जीवाड़ा कर रही है। टीकाकरण में जुटे लोग टीका लगाने से कई गुना ज्यादा पशुओं को टीका लगाने की रिपोर्ट प्रस्तुत कर रहे हैं।
15 सितंबर से 30 अक्तूबर तक जनपद के 10 लाख पशुओं को खुरपका, मुंहपका के टीके लगाने का काम चल रहा है। इसमें पशुपालन विभाग की 30 टीमें तथा पैरावेट काम कर रहे हैं। टीका लगाने में टीम के लोग टीका लगाने से कई गुना ज्यादा पशुओं को टीका लगाने की संख्या बताकर रिपोर्ट प्रस्तुत कर फर्जीवाड़ा कर रहे हैं।
इसमेें राया ब्लाक के गांव तारापुर में 69 गायों को टीका लगाना, जबकि उस गांव में मात्र 25 लोग गाय पालते हैं, वहीं भूडऱी में 99 गायों को टीका लगना बताया। इस गांव में 50 गाय भी नहीं हैं। रमचेलिया में 38 गाय बताईं, जबकि इस गांव में 20 गो पालक हैं, इसी तरह भैंस व पड्डा, पड़िया की संख्या अधिक बताई जा रही है।
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ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी वैक्सीन को चिकित्सक प्राईवेट पशु चिकित्सकों को बेच देते हैं। बाद में प्राईवेट पशु चिकित्सक मंहगे दामों पर उक्त टीके लगाते हैं। इस तरह की शिकायतें शासन तक भी पहुंच चुकी हैं। लेकिन उसके बाद भी सुधार नहीं हो रहा है। विभाग में किसी का नियंत्रण रह ही नहीं गया है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. भूदेव सिंह का कहना है कि टीकाकरण मेें फर्जीवाड़े का मामला संज्ञान में नहीं है, ऐसा है तो इसकी जांच कराई जाएगी।
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15 सितंबर से 30 अक्तूबर तक जनपद के 10 लाख पशुओं को खुरपका, मुंहपका के टीके लगाने का काम चल रहा है। इसमें पशुपालन विभाग की 30 टीमें तथा पैरावेट काम कर रहे हैं। टीका लगाने में टीम के लोग टीका लगाने से कई गुना ज्यादा पशुओं को टीका लगाने की संख्या बताकर रिपोर्ट प्रस्तुत कर फर्जीवाड़ा कर रहे हैं।
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इसमेें राया ब्लाक के गांव तारापुर में 69 गायों को टीका लगाना, जबकि उस गांव में मात्र 25 लोग गाय पालते हैं, वहीं भूडऱी में 99 गायों को टीका लगना बताया। इस गांव में 50 गाय भी नहीं हैं। रमचेलिया में 38 गाय बताईं, जबकि इस गांव में 20 गो पालक हैं, इसी तरह भैंस व पड्डा, पड़िया की संख्या अधिक बताई जा रही है।
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ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी वैक्सीन को चिकित्सक प्राईवेट पशु चिकित्सकों को बेच देते हैं। बाद में प्राईवेट पशु चिकित्सक मंहगे दामों पर उक्त टीके लगाते हैं। इस तरह की शिकायतें शासन तक भी पहुंच चुकी हैं। लेकिन उसके बाद भी सुधार नहीं हो रहा है। विभाग में किसी का नियंत्रण रह ही नहीं गया है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. भूदेव सिंह का कहना है कि टीकाकरण मेें फर्जीवाड़े का मामला संज्ञान में नहीं है, ऐसा है तो इसकी जांच कराई जाएगी।