फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   पटाखों का शोर, धुआं करेगा प्रदूषण से सराबोर

पटाखों का शोर, धुआं करेगा प्रदूषण से सराबोर

Sat, 07 Oct 2017 10:55 PM IST
Updated Sat, 07 Oct 2017 10:55 PM IST
विज्ञापन
पटाखों का शोर, धुआं करेगा प्रदूषण से सराबोर
एटा। दीवाली का त्योहार नजदीक है, तो धूम धड़ाका, पटाखे होना लाजिमी है। खुशियां मनाने के लिए पटाखे चलाए जाते हैं, लेकिन पटाखों का शोर और धुआं हर साल पर्यावरण में जहर घोल रहा है। आव-ओ-हवा दूषित होने से बीमारियों में इजाफा हो रहा है।
विज्ञापन

दीवाली त्योहार पर हर साल प्रदूषण कई गुना तक बढ़ जाता है। ध्वनि प्रदूषण पर गौर करें तो पटाखों की आवाज कानों को नुकसान पहुंचाने के साथ आकाश छूती नजर आती है। अधिकांश पटाखे 125 से 200 डेसिबल की आवाज में आ रहे हैं, जबकि मानक 100 डेसिबल के हैं। जानकारों की मानें तो 100 डेसिबल की आवाज को साधारण आदमी सिर्फ आठ घंटे ही झेल पाता है। इसके अलावा वायु प्रदूषण की भी स्थिति यह है कि शहर की आव-ओ-हवा में सल्फर डाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन आक्साइड के अलावा संस्पेडेड पार्टीकल्स ऑफ मैटर की मात्रा मानक के अनुरूप 120 माइक्रोग्राम होनी चाहिए, जो कि दीवाली पर कई गुना बढ़ जाती है। अलीगढ़ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी डा. केपी सिंह बताते हैं मानक से अधिक स्थिति प्रदूषण और इसके विपरीत असर को स्पष्ट करती है। इसलिए लोगों को पर्यावरण का ख्याल रखते हुए पटाखे चलाने चाहिए।
विज्ञापन

श्रवण क्षमता होती है प्रभावित
दीवाली पर तेज आवाज के पटाखे चलाने से श्रवण क्षमता प्रभावित होती है। डा. राजेश सक्सेना बताते हैं कि तेज आवाज से कान का पर्दा और नस फट सकती है। आतिशबाजी से निकलने वाला धुआं अस्थमा, ब्रेन हेमरेज और त्वचा संबंधी बीमारियां पैदा करता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

कहते हैं आकंड़े
ध्वनि प्रदूषण
वर्ष प्रदूषण की इकाई
2013 75 से 80 डेसिबल
2014 80 से 92 डेसिबल
2015 85 से 95 डेसिबल
2016 86 से 97 डेसिबल
वायु प्रदूषण (माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर)
वर्ष पीएम एसओ एनओ
2014 93 38 41
2015 94 40 43
2016 96 41 47
(आंकड़े अलीगढ़ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक)
पर्यावरण को लगातार हो रहा नुकसान
पर्यावरणविद् डा. ज्ञानेंद्र रावत कहते हैं कि पटाखोें से पर्यावरण को लगातार नुकसान हो रहा है। वैसे भी प्रकृति मनुष्य से रूठी है। ऐसे में हमें पर्यावरण को संरक्षित करने की जरूरत है। इको फ्रेंडली दीवाली मनाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दें।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed