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ऋण लिया ही नहीं पहुंचा दिए नोटिस
Updated Wed, 19 Jul 2017 11:19 PM IST
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करहल (मैनपुरी)। स्वयं सहायता समूह के नाम पर करोड़ों रुपये निकाल लिए गए। मामले का खुलासा तब हुआ जब 10 साल बाद लोगों के पास वसूली के लिए नोटिस पहुंचने शुरू हो गए। इसके बाद करहल क्षेत्र के कई गांवों में हड़कंप मचा है। वहीं अधिकारी कह रहे हैं कि जो ऋण लोगों ने बैंक से लिया है वह उन्हें लौटाना पड़ेगा। जबकि पीड़ित लोगों का कहना है कि जब उन्होंने ऋण लिया ही नहीं तो फिर चुकाएं क्यों।
करहल विकास खंड के गांव असरोही की ग्रामीण बैंक आफ आर्यावर्त से वर्ष 2008 से 2010 तक आसपास के गांवों के 250 स्वयं सहायता समूहों ने ऋण के लिए आवेदन किए थे। उक्त समूहों को बैंक ने कागजी कार्रवाई के बाद ऋण भी जारी कर दिए। जब किसी भी समूह ने ऋण ली गई राशि वापस नहीं की तो तीन दिन पहले संबंधित लोगों को नोटिज जारी करने की प्रक्रिया शुरू हुई। बड़ी संख्या में नोटिस पहुंचते ही लोगों में हड़कंप मच गया।
गांव जौथरी निवासी महिपाल सिंह यादव का कहना है कि हमने न तो कभी स्वयं सहायता समूह बनाया और न ही ऋण लिया। ऐसे में हम उक्त राशि कैसे जमा करें। इसकी जांच होनी चाहिए। वहीं नरेंद्र सिंह का कहना है कि बैंक के अधिकारियों और कुछ लोगों ने मिलकर हमारे नाम पर करोड़ों रुपये का घपला किया है। हमने कभी ऋण लिया ही नहीं तो वापस करने का सवाल ही नहीं उठता। इस संबंध में एलडीएम वीके अग्रवाल का कहना है कि उक्त मामले की जानकारी नहीं है। जांच करवाएंगे तब कुछ कहा जा सकता है। तभी पता चलेगा कि गड़बड़ी किस स्तर पर हुई है।
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करहल विकास खंड के गांव असरोही की ग्रामीण बैंक आफ आर्यावर्त से वर्ष 2008 से 2010 तक आसपास के गांवों के 250 स्वयं सहायता समूहों ने ऋण के लिए आवेदन किए थे। उक्त समूहों को बैंक ने कागजी कार्रवाई के बाद ऋण भी जारी कर दिए। जब किसी भी समूह ने ऋण ली गई राशि वापस नहीं की तो तीन दिन पहले संबंधित लोगों को नोटिज जारी करने की प्रक्रिया शुरू हुई। बड़ी संख्या में नोटिस पहुंचते ही लोगों में हड़कंप मच गया।
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गांव जौथरी निवासी महिपाल सिंह यादव का कहना है कि हमने न तो कभी स्वयं सहायता समूह बनाया और न ही ऋण लिया। ऐसे में हम उक्त राशि कैसे जमा करें। इसकी जांच होनी चाहिए। वहीं नरेंद्र सिंह का कहना है कि बैंक के अधिकारियों और कुछ लोगों ने मिलकर हमारे नाम पर करोड़ों रुपये का घपला किया है। हमने कभी ऋण लिया ही नहीं तो वापस करने का सवाल ही नहीं उठता। इस संबंध में एलडीएम वीके अग्रवाल का कहना है कि उक्त मामले की जानकारी नहीं है। जांच करवाएंगे तब कुछ कहा जा सकता है। तभी पता चलेगा कि गड़बड़ी किस स्तर पर हुई है।
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