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सहस्त्रधारा स्नान कर बीमार हुए प्रभु, 25 को देंगे दर्शन
Updated Sat, 10 Jun 2017 10:11 PM IST
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वृंदावन/राधाकुंड। ज्येष्ठ पूर्णिमा को भीषण गर्मी की तपिश से बचाने के लिए भक्तों ने शुक्रवार को भगवान जगन्नाथ को सहस्त्रधारा स्नान कराया। भक्तों के प्रेम में वशीभूत होकर स्नान करने वाले प्रभु बीमार हो गए हैं। भगवान जगन्नाथ को स्वस्थ करने के लिए भक्त अंगराग सेवा के माध्यम से उनकी आराधना कर रहे हैं।
जगन्नाथ घाट स्थित प्राचीन ठाकुर जगन्नाथ मंदिर में शनिवार से प्रारंभ हुई अंगराग सेवा में अब 15 दिनों तक भगवान जगन्नाथ को स्वस्थ करने के लिए भक्तों द्वारा प्रतिदिन सुबह-शाम अनेक प्रकार की जड़ी-बूटियों से निर्मित काढ़ा निवेदित करने के साथ मौसमी फलों का भोग लगाया जा रहा है।
मान्यता है कि भीषण गर्मी में 108 घड़ों के शीतल जल से ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन सहस्त्रधारा स्नान के बाद भगवान जगन्नाथ बीमार हो जाते हैं, अर्थात प्रभु को बुखार आ जाता है। इसके पश्चात भगवान जगन्नाथ को स्वस्थ करने के लिए उनकी अंगराग सेवा के माध्यम से आराधना की जाती है।
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15 दिन तक चलने वाली अंगराग सेवा में भगवान को प्रतिदिन गर्म पेय पदार्थों का प्रसाद निवेदित किया जाता है। इसके बाद भगवान जगन्नाथ बुखार के रोग से मुक्त होकर पुन: अपने भक्तों को 25 जून को स्वस्थ हो दर्शन देंगे।
राधारानी परिक्रमा मार्ग स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में जगन्नाथ जी को पंचामृत से दिव्य अभिषेक किया गया। शाम को श्रृंगार आरती की गई। शनिवार की शाम काढे़ के भोग के साथ उपचार शुरू हो गया। जगन्नाथ जी के स्वस्थ होते ही तीन दिवसीय रथयात्रा शुरू हो जाएगी।
ऐसे तैयार हो रहा काढ़ा
राधाकुंड (ब्यूरो)। छोटी व बड़ी इलायची, तुलसी, गंगाजल, गुलाब जल, जायफल, लौंग आदि का काढ़ा बना कर भगवान जगन्नाथ जी को भोग लगाया जा रहा है। अन्य जड़ी-बूटियों से भी इलाज किया जाएगा।
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जगन्नाथ घाट स्थित प्राचीन ठाकुर जगन्नाथ मंदिर में शनिवार से प्रारंभ हुई अंगराग सेवा में अब 15 दिनों तक भगवान जगन्नाथ को स्वस्थ करने के लिए भक्तों द्वारा प्रतिदिन सुबह-शाम अनेक प्रकार की जड़ी-बूटियों से निर्मित काढ़ा निवेदित करने के साथ मौसमी फलों का भोग लगाया जा रहा है।
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मान्यता है कि भीषण गर्मी में 108 घड़ों के शीतल जल से ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन सहस्त्रधारा स्नान के बाद भगवान जगन्नाथ बीमार हो जाते हैं, अर्थात प्रभु को बुखार आ जाता है। इसके पश्चात भगवान जगन्नाथ को स्वस्थ करने के लिए उनकी अंगराग सेवा के माध्यम से आराधना की जाती है।
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15 दिन तक चलने वाली अंगराग सेवा में भगवान को प्रतिदिन गर्म पेय पदार्थों का प्रसाद निवेदित किया जाता है। इसके बाद भगवान जगन्नाथ बुखार के रोग से मुक्त होकर पुन: अपने भक्तों को 25 जून को स्वस्थ हो दर्शन देंगे।
राधारानी परिक्रमा मार्ग स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में जगन्नाथ जी को पंचामृत से दिव्य अभिषेक किया गया। शाम को श्रृंगार आरती की गई। शनिवार की शाम काढे़ के भोग के साथ उपचार शुरू हो गया। जगन्नाथ जी के स्वस्थ होते ही तीन दिवसीय रथयात्रा शुरू हो जाएगी।
ऐसे तैयार हो रहा काढ़ा
राधाकुंड (ब्यूरो)। छोटी व बड़ी इलायची, तुलसी, गंगाजल, गुलाब जल, जायफल, लौंग आदि का काढ़ा बना कर भगवान जगन्नाथ जी को भोग लगाया जा रहा है। अन्य जड़ी-बूटियों से भी इलाज किया जाएगा।