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संगीत ही जीवन का सच्चा आधार है-स्वामी ज्ञानानंद महाराज
Updated Fri, 01 Sep 2017 12:26 AM IST
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वृंदावन। ठाकुर राधा सनेह बिहारी मंदिर में गुरुवार को आयोजित स्वामी हरिदास संगीत सम्मेलन और कलारत्न समारोह का शुभारंभ स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने स्वामी जी के चित्रपट के समक्ष दीप प्रज्जवलन कर किया।
उन्होंने कहा कि संगीत ही जीवन का सच्चा आधार है, वह संगीत भले ही किसी देश या विधा का हो जिसने संगीत को जीवन का अंग बना लिया उसका जीवन पवित्र हो जाता है। शुभारंभ सत्र नृत्यांगना अरुनिमा सेनगुप्ता ने पारंपरिक सोलो कत्थक नृत्य के जरिए गणेश स्तुति की प्रस्तुति देकर किया।
प्रख्यात वॉयलिनवादक उस्ताद असगर हुसैन ने वायलिन पर अलग-अलग राग छेड़े तो दर्शक खुद को तालियां बजाने से न रोक सके। वहीं तबला वादक उस्ताद अख्तर हुसैन की उंगलियों ने तबले पर थाप दी। संगीत सम्मेलन में पहली बार आए पवन धानक ने क्लारनेट वादन की प्रस्तुति से दर्शकों को खूब लुभाया।
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इंग्लिश वाद्ययंत्र ने शास्त्रीय संगीत की सुर-लहरी जब बिखेरी तो श्रोताओं ने ताली बाजकर उसे खूब सराहा। अंत में दिल्ली के किरन कुमार ने बांसुरी वादन की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में आचार्य अतुलकृष्ण गोस्वामी, महामंडलेश्वर चित्त प्रकाशानंद, स्वामी महेशानंद सरस्वती, स्वामी आदित्यनंद महाराज, आनंद गोपाल मिश्रा, राम निहोर त्रिपाठी, राम विलास चतुर्वेदी, बालकृष्ण गौतम, प्रदीप गोस्वामी उपस्थित थे।
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उन्होंने कहा कि संगीत ही जीवन का सच्चा आधार है, वह संगीत भले ही किसी देश या विधा का हो जिसने संगीत को जीवन का अंग बना लिया उसका जीवन पवित्र हो जाता है। शुभारंभ सत्र नृत्यांगना अरुनिमा सेनगुप्ता ने पारंपरिक सोलो कत्थक नृत्य के जरिए गणेश स्तुति की प्रस्तुति देकर किया।
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प्रख्यात वॉयलिनवादक उस्ताद असगर हुसैन ने वायलिन पर अलग-अलग राग छेड़े तो दर्शक खुद को तालियां बजाने से न रोक सके। वहीं तबला वादक उस्ताद अख्तर हुसैन की उंगलियों ने तबले पर थाप दी। संगीत सम्मेलन में पहली बार आए पवन धानक ने क्लारनेट वादन की प्रस्तुति से दर्शकों को खूब लुभाया।
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इंग्लिश वाद्ययंत्र ने शास्त्रीय संगीत की सुर-लहरी जब बिखेरी तो श्रोताओं ने ताली बाजकर उसे खूब सराहा। अंत में दिल्ली के किरन कुमार ने बांसुरी वादन की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में आचार्य अतुलकृष्ण गोस्वामी, महामंडलेश्वर चित्त प्रकाशानंद, स्वामी महेशानंद सरस्वती, स्वामी आदित्यनंद महाराज, आनंद गोपाल मिश्रा, राम निहोर त्रिपाठी, राम विलास चतुर्वेदी, बालकृष्ण गौतम, प्रदीप गोस्वामी उपस्थित थे।