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एक मकान, छह अनुदान: प्रधानमंत्री आवास योजना में 15 लाख का फर्जीवाड़ा, डीएम ने दिए FIR के आदेश
Wed, 27 May 2026 10:22 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Wed, 27 May 2026 10:22 AM IST
सार
आगरा में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 15 लाख रुपये के फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है, जिसमें फर्जी मकान नंबर दिखाकर 6 लोगों को अनुदान जारी किया गया। डीएम ने मामले में एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं और जांच तेज कर दी गई है।
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प्रधानमंत्री आवास योजना
- फोटो : AI
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विस्तार
आगरा के ईदगाह के एक मकान पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत छह अनुदान देने के मामले में मालिक ने डीएम से मुलाकात कर प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग की है। अपर नगर आयुक्त की जांच तीन माह का समय गुजर जाने के बाद भी पूरी नहीं हुई है।
मकान मालिक पदमचंद ने बताया कि उनके मकान का फर्जी नंबर 108 धनीराम की बगीची दिखाकर 6 किरायेदारों ने कुल 15 लाख रुपये का अनुदान प्राप्त किया। डीएम मनीष बंसल से मिलकर पूरे मामले की जांच और घोटाले के आरोपियों पर प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग की। डीएम ने इस मामले में आपराधिक मामला दर्ज करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि डूडा कर्मचारियों की मिलीभगत से किए गए घोटाले के कारण दर-दर भटक रहे है।
प्रधानमंत्री आवास योजना में सर्वेयर को मौके पर जाकर जिओ कोऑर्डिनेट और फोटो के साथ पुष्टि करनी होती है। लोकेशन आधारित फोटो तीन बार खिंचवाए जाते हैं। पहली बार पहली किस्त में, दूसरी बार मकान की छत पड़ने पर और आखिरी बार जब मकान का निर्माण पूरा होता है, तब फोटो के साथ रिपोर्ट भेजने के बाद ही आखिरी किस्त लाभार्थी के खाते में आती है।
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इस मामले में सर्वेयर ने मिलीभगत कर फर्जी पते का भौतिक सत्यापन भी कर दिया। ऑफिस में बैठकर बिना किसी जांच-पड़ताल के ही खातों में अनुदान भेज दिया गया। पूर्व में डूडा के परियोजना अधिकारी मुनीष कुमार ने 20 से ज्यादा कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की थी और फर्जीवाड़े में एफआईआर दर्ज कराई थीं।
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मकान मालिक पदमचंद ने बताया कि उनके मकान का फर्जी नंबर 108 धनीराम की बगीची दिखाकर 6 किरायेदारों ने कुल 15 लाख रुपये का अनुदान प्राप्त किया। डीएम मनीष बंसल से मिलकर पूरे मामले की जांच और घोटाले के आरोपियों पर प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग की। डीएम ने इस मामले में आपराधिक मामला दर्ज करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि डूडा कर्मचारियों की मिलीभगत से किए गए घोटाले के कारण दर-दर भटक रहे है।
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प्रधानमंत्री आवास योजना में सर्वेयर को मौके पर जाकर जिओ कोऑर्डिनेट और फोटो के साथ पुष्टि करनी होती है। लोकेशन आधारित फोटो तीन बार खिंचवाए जाते हैं। पहली बार पहली किस्त में, दूसरी बार मकान की छत पड़ने पर और आखिरी बार जब मकान का निर्माण पूरा होता है, तब फोटो के साथ रिपोर्ट भेजने के बाद ही आखिरी किस्त लाभार्थी के खाते में आती है।
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इस मामले में सर्वेयर ने मिलीभगत कर फर्जी पते का भौतिक सत्यापन भी कर दिया। ऑफिस में बैठकर बिना किसी जांच-पड़ताल के ही खातों में अनुदान भेज दिया गया। पूर्व में डूडा के परियोजना अधिकारी मुनीष कुमार ने 20 से ज्यादा कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की थी और फर्जीवाड़े में एफआईआर दर्ज कराई थीं।