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अलूपुर में बुखार की दहशत से लोग कर रहे पलायन
Updated Tue, 25 Sep 2018 12:09 AM IST
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कुरावली। क्षेत्र के गांव अलूपुर में पिछले 15 दिनों में पांच लोगों की बुखार और गला बंद होने से मौत हो चुकी है। इसमें दो सगी बहनें भी शामिल हैं। वहीं, दूसरे परिवार की मां और बेटी सैफई में जिंदगी मौत से जूझ रही हैं।
गांव में बुखार के कहर से दहशत है। कई ग्रामीण गांव से पलायन कर गए हैं। स्थानीय लोगों की मानें तो बुखार की दहशत से लोग अपने रिश्तेदारों या फिर शहरों में रह रहे परिजनों के यहां जाने लगे हैं।
वहीं इलाज के नाम पर हो रही खानापूर्ति से आक्रोशित ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया। अलूपुर गांव में हाल यह है कि पहले लोग बुखार से पीड़ित होते हैं, धीरे-धीरे उनका गला बंद हो जाता है।
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नौ सितंबर से 24 सितंबर तक गांव में पांच लोगों की मौत हो चुकी है। पहली मौत गांव में नौ सितंबर को हुई जब गांव के हरदयाल सिंह के 50 वर्षीय पुत्र गणपति की बुखार से मौत हो गई।
दूसरी मौत 16 सिंतबर को हुई। गांव के अमरपाल की 10 वर्षीय पुत्री सोनी की बुखार से मौत हो गई। 19 सितंबर को गांव में दो बालिकाओं की मौत हुई। गांव के हृदेश सिंह की 13 वर्षीय पुत्री ओमवती और राजबहादुर की पुत्री प्रियंका की मौत हो गई।
राजबहादुर की दूसरी पुत्री पूजा भी बुखार की चपेट में थी, 23 सितंबर को उसकी भी मौत हो गई। गांव के मानपाल सिंह की पत्नी पिंकी और पुत्री काजल बुखार से पीड़ित होने पर सैफई में जिंदगी और मौत से जूझ रही हैं।
ग्रामीणों की मानें तो गांव में एक तालाब है जिसमें गंदा पानी भरा हुआ है। इसके अतिरिक्त गांव में सफाई कर्मचारी के न आने के कारण गांव की गलियों में भी कीचड़ और गंदा पानी भरा हुआ है।
वायरल फीवर में गला बंद होने की समस्या से पैदा होती है। यदि समय रहते इस बीमारी में उपचार न लिया जाए तो पीड़ित की मौत भी हो सकती है। गांव में टीम भेजकर जांच कराई जा रही है। -डॉ. एके पांडेय, सीएमओ
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गांव में बुखार के कहर से दहशत है। कई ग्रामीण गांव से पलायन कर गए हैं। स्थानीय लोगों की मानें तो बुखार की दहशत से लोग अपने रिश्तेदारों या फिर शहरों में रह रहे परिजनों के यहां जाने लगे हैं।
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वहीं इलाज के नाम पर हो रही खानापूर्ति से आक्रोशित ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया। अलूपुर गांव में हाल यह है कि पहले लोग बुखार से पीड़ित होते हैं, धीरे-धीरे उनका गला बंद हो जाता है।
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नौ सितंबर से 24 सितंबर तक गांव में पांच लोगों की मौत हो चुकी है। पहली मौत गांव में नौ सितंबर को हुई जब गांव के हरदयाल सिंह के 50 वर्षीय पुत्र गणपति की बुखार से मौत हो गई।
दूसरी मौत 16 सिंतबर को हुई। गांव के अमरपाल की 10 वर्षीय पुत्री सोनी की बुखार से मौत हो गई। 19 सितंबर को गांव में दो बालिकाओं की मौत हुई। गांव के हृदेश सिंह की 13 वर्षीय पुत्री ओमवती और राजबहादुर की पुत्री प्रियंका की मौत हो गई।
राजबहादुर की दूसरी पुत्री पूजा भी बुखार की चपेट में थी, 23 सितंबर को उसकी भी मौत हो गई। गांव के मानपाल सिंह की पत्नी पिंकी और पुत्री काजल बुखार से पीड़ित होने पर सैफई में जिंदगी और मौत से जूझ रही हैं।
ग्रामीणों की मानें तो गांव में एक तालाब है जिसमें गंदा पानी भरा हुआ है। इसके अतिरिक्त गांव में सफाई कर्मचारी के न आने के कारण गांव की गलियों में भी कीचड़ और गंदा पानी भरा हुआ है।
वायरल फीवर में गला बंद होने की समस्या से पैदा होती है। यदि समय रहते इस बीमारी में उपचार न लिया जाए तो पीड़ित की मौत भी हो सकती है। गांव में टीम भेजकर जांच कराई जा रही है। -डॉ. एके पांडेय, सीएमओ