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अधर्म पर धरम की जीत कौ गवाह है कंस टीलौ
Updated Sat, 31 Mar 2018 08:15 PM IST
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कृष्णा
- फोटो : डैमो
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मथुरा। मथुरा-आगरा रोड स्थित कंस का टीला अधर्म पर धर्म की और अन्याय पर न्याय की जीत का गवाह रहा है। यहीं पर कंस की कचहरी थी और कंस अपने शत्रुओं को मल्ल विद्या में पारंगत पहलवानों से मरवा देता था। इस टीले पर खड़े होकर समूचे मथुरा के दर्शन हो जाते हैं।
मथुरा आगरा रोड पर आप रंगेश्वर मंदिर गली के निकट पहुंचेंगे तो यहीं से एक ऊंचा टीला नजर आने लगेगा। इस टीले का इतिहास कृष्ण काल से जुड़ा है। कहा जाता है यहां कंस की कचहरी लगती थी। टीले पर बने अखाड़े में कंस के मल्ल अभ्यास करते थे।
कंस अपने शत्रुओं को इन मल्लों से लड़वाकर मरवा देता था। भगवान श्रीकृष्ण और बलराम ने इसी अखाड़े में पहले कंस के मल्लों को मारा और फिर कंस को पटककर मार दिया। दिलचस्प कथा ये भी है कि कंस के वध के बाद भगवान श्रीकृष्ण और बलराम में विवाद हो गया इस विवाद का निपटारा रंगेश्वर महादेव ने किया।
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श्रीमाथुर चतुर्वेद परिषद के उपाध्यक्ष राकेश तिवारी ने बताया समाज के कंस मेला में आज भी इस लीला को जीवंत किया जाता है। भगवान श्रीकृष्ण और बलराम के स्वरूप छड़ी से इशारा करते हैं चतुर्वेदी समाज के युवा लाठियों से कंस के पुतले का धराशाई कर देते हैं। इस टीले पर आज भी मल्ल विद्या होती है। यहां वर्तमान कृष्ण बलराम का मंदिर है। यहां कंस भी विराजमान है। बताते हैं कि कभी इस टीला से संपूर्ण शहर नजर आता था, जो अब ज्यादा ऊंचा नहीं रह गया है।
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मथुरा आगरा रोड पर आप रंगेश्वर मंदिर गली के निकट पहुंचेंगे तो यहीं से एक ऊंचा टीला नजर आने लगेगा। इस टीले का इतिहास कृष्ण काल से जुड़ा है। कहा जाता है यहां कंस की कचहरी लगती थी। टीले पर बने अखाड़े में कंस के मल्ल अभ्यास करते थे।
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कंस अपने शत्रुओं को इन मल्लों से लड़वाकर मरवा देता था। भगवान श्रीकृष्ण और बलराम ने इसी अखाड़े में पहले कंस के मल्लों को मारा और फिर कंस को पटककर मार दिया। दिलचस्प कथा ये भी है कि कंस के वध के बाद भगवान श्रीकृष्ण और बलराम में विवाद हो गया इस विवाद का निपटारा रंगेश्वर महादेव ने किया।
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श्रीमाथुर चतुर्वेद परिषद के उपाध्यक्ष राकेश तिवारी ने बताया समाज के कंस मेला में आज भी इस लीला को जीवंत किया जाता है। भगवान श्रीकृष्ण और बलराम के स्वरूप छड़ी से इशारा करते हैं चतुर्वेदी समाज के युवा लाठियों से कंस के पुतले का धराशाई कर देते हैं। इस टीले पर आज भी मल्ल विद्या होती है। यहां वर्तमान कृष्ण बलराम का मंदिर है। यहां कंस भी विराजमान है। बताते हैं कि कभी इस टीला से संपूर्ण शहर नजर आता था, जो अब ज्यादा ऊंचा नहीं रह गया है।