{"_id":"5999b9f14f1c1b545b8b45c9","slug":"141503246833-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"एलएलबी: बीसीआई से मान्यता प्राप्त कालेजों में भेजे जाएंगे विद्यार्थी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एलएलबी: बीसीआई से मान्यता प्राप्त कालेजों में भेजे जाएंगे विद्यार्थी
Updated Mon, 21 Aug 2017 12:52 PM IST
विज्ञापन
आगरा। डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय से संबद्ध बड़ी संख्या में एलएलबी कालेजों को शैक्षणिक सत्र 2017-18 में विद्यार्थी नसीब नहीं हाेंगे। कुल सीटाें के सापेक्ष छात्रों का आवेदन एक चौथाई भी नहीं है। दूसरे, विश्वविद्यालय ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया से मान्यता प्राप्त कालेजों को ही छात्र आवंटित करने की योजना बनाई है।
विश्वविद्यालय से संबद्ध एलएलबी के कालेजाें की संख्या 34 हैं। इनमें कुल 2260 सीटें हैं। बीसीआई से मान्यता प्राप्त कालेजों की संख्या महज आठ है। इस बार कालेजों में सीधे प्रवेश लिए जाने की प्रक्रिया खत्म कर दी गई है। विश्वविद्यालय स्तर से एलएलबी की प्रवेश परीक्षा कराई गई। इसमें महज 285 छात्र-छात्राआें ने ही हिस्सा लिया। यह संख्या कुल सीटों के सापेक्ष एक चौथाई भी नहीं हैं। ऐसे में एलएलबी की सीटें भरना मुश्किल है।
जनसंपर्क अधिकारी डा. गिरजाशंकर शर्मा का कहना है कि एलएलबी कालेजों के संचालन के लिए बीसीआई की मान्यता अनिवार्य है। मान्यता प्राप्त कालेजों को ही सीटें आवंटित करने की योजना है। उन कालेजों पर भी विचार किया जाएगा, जो एफिडेविट देंगे कि दो माह के अंदर बीसीआई से मान्यता प्राप्त कर लेंगे। निर्धारित अवधि में मान्यता प्राप्त न करने की स्थिति में विश्वविद्यालय संबंधित कालेज में आवंटित छात्रों को मान्यता प्राप्त कालेजों में समायोजित कर देगा।
विज्ञापन
सख्ती से कम हुए विद्यार्थी
एलएलबी में छात्रों की संख्या कम होने का मुख्य कारण विश्वविद्यालय की सख्ती है। मुख्य परीक्षा और मूल्यांकन में कड़ाई का असर रहा कि करीब 90 फीसदी परीक्षार्थी असफल रहे। 2500 परीक्षार्थियों ने स्क्रूटनी के लिए आवेदन किया। एक फीसदी से भी कम परीक्षार्थियों का परिणाम बदला। कुछ के अंक बढ़े तो कुछ के और कम हो गए। कम वालाें का मामला परीक्षा समिति में रखा जाना है। कापियों की स्क्रीनिंग कराई गई थी।
विज्ञापन
विश्वविद्यालय से संबद्ध एलएलबी के कालेजाें की संख्या 34 हैं। इनमें कुल 2260 सीटें हैं। बीसीआई से मान्यता प्राप्त कालेजों की संख्या महज आठ है। इस बार कालेजों में सीधे प्रवेश लिए जाने की प्रक्रिया खत्म कर दी गई है। विश्वविद्यालय स्तर से एलएलबी की प्रवेश परीक्षा कराई गई। इसमें महज 285 छात्र-छात्राआें ने ही हिस्सा लिया। यह संख्या कुल सीटों के सापेक्ष एक चौथाई भी नहीं हैं। ऐसे में एलएलबी की सीटें भरना मुश्किल है।
विज्ञापन
जनसंपर्क अधिकारी डा. गिरजाशंकर शर्मा का कहना है कि एलएलबी कालेजों के संचालन के लिए बीसीआई की मान्यता अनिवार्य है। मान्यता प्राप्त कालेजों को ही सीटें आवंटित करने की योजना है। उन कालेजों पर भी विचार किया जाएगा, जो एफिडेविट देंगे कि दो माह के अंदर बीसीआई से मान्यता प्राप्त कर लेंगे। निर्धारित अवधि में मान्यता प्राप्त न करने की स्थिति में विश्वविद्यालय संबंधित कालेज में आवंटित छात्रों को मान्यता प्राप्त कालेजों में समायोजित कर देगा।
विज्ञापन
सख्ती से कम हुए विद्यार्थी
एलएलबी में छात्रों की संख्या कम होने का मुख्य कारण विश्वविद्यालय की सख्ती है। मुख्य परीक्षा और मूल्यांकन में कड़ाई का असर रहा कि करीब 90 फीसदी परीक्षार्थी असफल रहे। 2500 परीक्षार्थियों ने स्क्रूटनी के लिए आवेदन किया। एक फीसदी से भी कम परीक्षार्थियों का परिणाम बदला। कुछ के अंक बढ़े तो कुछ के और कम हो गए। कम वालाें का मामला परीक्षा समिति में रखा जाना है। कापियों की स्क्रीनिंग कराई गई थी।