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दहेज हत्या में सास को दस साल की सजा
Updated Wed, 03 Oct 2018 10:49 PM IST
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दहेज हत्या में सास को दस साल की सजा
- फोटो : अमर उजाला
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कासगंज। जिला सत्र न्यायाधीश राजीव शर्मा की अदालत ने दहेज हत्या के मामले में सास को 10 साल की सजा सुनाई है। साथ ही सास पर दो हजार का अर्थदंड भी लगाया गया है।
ज्योति की शादी शैलेंद्र पुत्र ओमवीर निवासी सुभाष नगर अमांपुर के साथ 24 नवंबर 2012 को हुई। ससुरालीजन शादी में मिले दान दहेज से संतुष्ट नहीं हुए। पति द्वारा 50 हजार रुपये की मांग की जाने लगी। मांग पूरी न होने पर पति व सास किरन ने ज्योति की 31 मार्च 2014 को गला दबाकर हत्या कर दी। उसके भाई रघुवीर ने दोनों को नामजद करते हुए थाने में मामला दर्ज कराया। मामले की विवेचना तत्कालीन सीओ सहावर अमृत लाल ने की। पति के नाबालिग होने पर उसका मामला जुवेनाइल कोर्ट में भेज दिया गया। जबकि सास को दहेज हत्या का दोषी मानते हुए आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया। जिला शासकीय अधिवक्ता रमेश चंद्र गोला ने मामले की पैरवी की। न्यायालय ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्य एवं गवाहों के बयान आदि के आधार सास किरन को दोषी पाया। न्यायालय ने धारा 304 बी के तहत सास को 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। जबकि धारा 498 ए के तहत 3 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा व एक हजार रुपये जुर्माना, धारा 4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत 2 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा व एक हजार रुपये जुर्माना लगाया। जुर्माना अदा न करने पर एक माह के अतिरिक्त कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। जेल में बिताई गई अवधि सजा में समायोजित की जाएंगी।
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ज्योति की शादी शैलेंद्र पुत्र ओमवीर निवासी सुभाष नगर अमांपुर के साथ 24 नवंबर 2012 को हुई। ससुरालीजन शादी में मिले दान दहेज से संतुष्ट नहीं हुए। पति द्वारा 50 हजार रुपये की मांग की जाने लगी। मांग पूरी न होने पर पति व सास किरन ने ज्योति की 31 मार्च 2014 को गला दबाकर हत्या कर दी। उसके भाई रघुवीर ने दोनों को नामजद करते हुए थाने में मामला दर्ज कराया। मामले की विवेचना तत्कालीन सीओ सहावर अमृत लाल ने की। पति के नाबालिग होने पर उसका मामला जुवेनाइल कोर्ट में भेज दिया गया। जबकि सास को दहेज हत्या का दोषी मानते हुए आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया। जिला शासकीय अधिवक्ता रमेश चंद्र गोला ने मामले की पैरवी की। न्यायालय ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्य एवं गवाहों के बयान आदि के आधार सास किरन को दोषी पाया। न्यायालय ने धारा 304 बी के तहत सास को 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। जबकि धारा 498 ए के तहत 3 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा व एक हजार रुपये जुर्माना, धारा 4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत 2 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा व एक हजार रुपये जुर्माना लगाया। जुर्माना अदा न करने पर एक माह के अतिरिक्त कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। जेल में बिताई गई अवधि सजा में समायोजित की जाएंगी।
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