{"_id":"5b796d2c42c792465d1d21a3","slug":"131534684460-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मोटे महाराज मंदिर पर लगता है सोमवार को मेला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मोटे महाराज मंदिर पर लगता है सोमवार को मेला
Updated Sun, 19 Aug 2018 10:55 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मैनपुरी। नगर के आगरा रोड स्थित मोटे महाराज मंदिर पर सावन के सोमवार को बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। यहां साल भर भक्त सोमवार को पूजा अर्चना के लिए पहुंचते हैं। सावन के सोमवार को तो यहां मेले जैसा माहौल रहता है। बताया जाता है कि मैनपुरी के महाराजा तेज सिंह के पूर्वजों ने वर्ण व्यवस्था के आधार पर लगभग 352 साल पहले आगरा रोड पर शिव मंदिर बनवाया था।
मंदिर में मूंछों वाले भगवान शंकर की प्रतिमा स्थापित कराई गई थी। ऐसी प्रतिमा आसपास के किसी जिले में नहीं है। मंदिर बनाने के साथ ही वहां दलित समाज का पुजारी पूजा करने के लिए रखा गया था। पुजारी ही मंदिर की देखभाल करता था। 1952 से पहले दलित समाज के 13 लोगों की कमेटी मंदिर की देखभाल करती थी। 1952 में कमेटी ने तहसीलदार कोर्ट में मंदिर की देखभाल करने के लिए राजाराम अंबेश का मंदिर का सरवराकार बना दिया था। उसके बाद से मंदिर की देखभाल, रखरखाव, जीर्णोद्धार सरवराकार की देखरेख में ही किया जाता है।
मंदिर के सर्वराकार राजाराम अंबेश बताते हैं कि शिव मंदिर को मोटे महाराज मंदिर के नाम से जाना जाता है। मंदिर में अब हर सोमवार को समाज के सभी वर्गों के लोग पूजा करने के लिए आते हैं। मन्नत पूरी होने पर मंदिर का सौंदर्यीकरण भी कराते हैं। सावन के सोमवार को मंदिर पर मेला भी लगता है। वे बताते हैं कि बुजुर्गों के अनुसार अंग्रेजों से लड़ने के लिए जाते समय राजा तेज सिंह इस मंदिर पर भीम पूजा करने आए थे। अंग्रेजों से युद्ध करने से पहले और युद्ध के बाद भी वे मंदिर में पूजा अर्चना के लिए आते रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
मंदिर में मूंछों वाले भगवान शंकर की प्रतिमा स्थापित कराई गई थी। ऐसी प्रतिमा आसपास के किसी जिले में नहीं है। मंदिर बनाने के साथ ही वहां दलित समाज का पुजारी पूजा करने के लिए रखा गया था। पुजारी ही मंदिर की देखभाल करता था। 1952 से पहले दलित समाज के 13 लोगों की कमेटी मंदिर की देखभाल करती थी। 1952 में कमेटी ने तहसीलदार कोर्ट में मंदिर की देखभाल करने के लिए राजाराम अंबेश का मंदिर का सरवराकार बना दिया था। उसके बाद से मंदिर की देखभाल, रखरखाव, जीर्णोद्धार सरवराकार की देखरेख में ही किया जाता है।
विज्ञापन
मंदिर के सर्वराकार राजाराम अंबेश बताते हैं कि शिव मंदिर को मोटे महाराज मंदिर के नाम से जाना जाता है। मंदिर में अब हर सोमवार को समाज के सभी वर्गों के लोग पूजा करने के लिए आते हैं। मन्नत पूरी होने पर मंदिर का सौंदर्यीकरण भी कराते हैं। सावन के सोमवार को मंदिर पर मेला भी लगता है। वे बताते हैं कि बुजुर्गों के अनुसार अंग्रेजों से लड़ने के लिए जाते समय राजा तेज सिंह इस मंदिर पर भीम पूजा करने आए थे। अंग्रेजों से युद्ध करने से पहले और युद्ध के बाद भी वे मंदिर में पूजा अर्चना के लिए आते रहे।
विज्ञापन