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रमेश चंद्र को विप्रा के सचिव पद से हटाया
Updated Fri, 15 Jun 2018 08:10 PM IST
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मथुरा। पिछले आठ महीने से प्राधिकरण में कार्यवाहक सचिव का पद संभाल रहे रमेश चंद्र को कमिश्नर ने हटा दिया है। मुख्य लेखाधिकारी संतोष कुमार को काम की जिम्मेदारी सौंपी गई है। रमेश चंद्र को सचिव पद से हटाने की वजह पर्याप्त समय न दे पाना बताया जा रहा है।
एडीएम कानून व्यवस्था रमेश चंद्र को प्राधिकरण के सचिव पद की अतिरिक्त जिम्मेदारी 25 अक्तूबर को दी गई थी। अब कमिश्नर के राम मोहन राव ने उन्हें हटा दिया है। उधर, प्राधिकरण में कार्यवाहक अधिकारियों से काम चलाया जा रहा है। नगर आयुक्त को कार्यवाहक उपाध्यक्ष बना रखा। सचिव की भी तैनाती नहीं हो पा रही है।
वहीं, प्राधिकरण को लेकर शासन तक शिकायतें गूंज रही हैं। नक्शे पास नहीं हो पा रहे हैं। अवैध कालोनियों बसती जा रही हैं लेकिन कोई रोकने वाला नहीं। अगर किसी भवन को सील कर दिया जाता है तो चुपके से काम भी शुरू करा दिया जाता है। विभाग के एक बाबू ने नक्शा और अन्य मामलों की पांच हजार फाइल गायब कर दी थीं।
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एक अन्य बाबू भी कई हजार फाइलोें और कागजातों को इधर-उधर कर दिया। एक जेई खुले आम रिश्वत लेते पकड़े गए उनका वीडियो तक वायरल हुआ। जेई और एई अवैध निर्माण में लिप्त होने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है। इन्हीं कर्मचारी और अधिकारियों की बदौलत रुक्मिणी विहार जैसे मेगा प्रोजेक्ट में आवास बेचने के लाले पड़ रहे हैं।
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एडीएम कानून व्यवस्था रमेश चंद्र को प्राधिकरण के सचिव पद की अतिरिक्त जिम्मेदारी 25 अक्तूबर को दी गई थी। अब कमिश्नर के राम मोहन राव ने उन्हें हटा दिया है। उधर, प्राधिकरण में कार्यवाहक अधिकारियों से काम चलाया जा रहा है। नगर आयुक्त को कार्यवाहक उपाध्यक्ष बना रखा। सचिव की भी तैनाती नहीं हो पा रही है।
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वहीं, प्राधिकरण को लेकर शासन तक शिकायतें गूंज रही हैं। नक्शे पास नहीं हो पा रहे हैं। अवैध कालोनियों बसती जा रही हैं लेकिन कोई रोकने वाला नहीं। अगर किसी भवन को सील कर दिया जाता है तो चुपके से काम भी शुरू करा दिया जाता है। विभाग के एक बाबू ने नक्शा और अन्य मामलों की पांच हजार फाइल गायब कर दी थीं।
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एक अन्य बाबू भी कई हजार फाइलोें और कागजातों को इधर-उधर कर दिया। एक जेई खुले आम रिश्वत लेते पकड़े गए उनका वीडियो तक वायरल हुआ। जेई और एई अवैध निर्माण में लिप्त होने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है। इन्हीं कर्मचारी और अधिकारियों की बदौलत रुक्मिणी विहार जैसे मेगा प्रोजेक्ट में आवास बेचने के लाले पड़ रहे हैं।