{"_id":"5c3f37f1bdec2273574140e3","slug":"121547646961-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पूर्व तहसीलदार पर 25 हजार का जुर्माना लगाया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पूर्व तहसीलदार पर 25 हजार का जुर्माना लगाया
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मैनपुरी। सूचना अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी ने देने पर राज्य सूचना आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। कर्तव्य पालन में लापरवाही मानते हुए 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। राज्य सूचना आयुक्त ने डीएम और कोषाधिकारी मैनपुरी से तत्कालीन तहसीलदार सदर के वेतन से जुर्माने की धनराशि काटकर राजकोष में जमा कराने को कहा है।
थाना कोतवाली के नगला जुला निवासी अरुण कुमार सिंह ने वर्ष 2016 में सूचना अधिकार अधिनियम के तहत तत्कालीन तहसीलदार सदर नरेंद्र कुमार से राजस्व संबंधी सूचनाएं मांगी थीं। समय सीमा बीतने के बाद भी तहसीलदार द्वारा सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं। सूचना न मिलने पर पीड़ित ने राज्य सूचना आयोग की शरण ली। राज्य सूचना आयोग में मामले की सुनवाई की गई। तहसीलदार को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस भेजा गया।
तहसीलदार द्वारा दिए गए जवाब से संतुष्ट न होने पर राज्य सूचना आयुक्त गजेंद्र यादव ने कड़ा रुख अपनाया। मामले की सुनवाई करते हुए पारित आदेश में लिखा कि मामले को लंबित रखने का कोई औचित्य नहीं है। आयोग द्वारा 25 हजार रुपये का जुर्माना तत्कालीन तहसीलदार पर लगाया गया। डीएम और कोषाधिकारी को दिए गए आदेश में कहा गया है कि तत्कालीन तहसीलदार सदर नरेंद्र कुमार के वेतन से तीन किस्तों में जुर्माने की धनराशि वसूल की जाए और राजकोष में जमा कराई जाए।
विज्ञापन
पहले भी लग चुके हैं जुर्माने
सूचना अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गईं सूचनाएं न देने पर पहले भी अधिकारियों पर कार्रवाई हो चुकी है। पीड़ित को सूचनाएं उपलब्ध न कराने पर राज्य सूचना आयोग पहले भी कड़ा रूख अपना चुका है। बीएसए, डीआईओएस, सीएमओ, तहसीलदार पर 25-25 हजार रुपये का पूर्व में भी जुर्माना लग चुका है।
आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी पीड़ित को उपलब्ध कराने के निर्देश सभी विभागाध्यक्षों को दिए जा चुके हैं। कईबार ऐसी जानकारी मांगी जाती है जो दिया जाना संभव नहीं है। ऐसे में पीड़ित पक्ष राज्य सूचना आयोग तक जाता है। जानकारी न देने वाले संबंधितों के खिलाफ स्थानीय स्तर पर भी कार्रवाई की जाती है।
बीराम, एडीएम
विज्ञापन
थाना कोतवाली के नगला जुला निवासी अरुण कुमार सिंह ने वर्ष 2016 में सूचना अधिकार अधिनियम के तहत तत्कालीन तहसीलदार सदर नरेंद्र कुमार से राजस्व संबंधी सूचनाएं मांगी थीं। समय सीमा बीतने के बाद भी तहसीलदार द्वारा सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं। सूचना न मिलने पर पीड़ित ने राज्य सूचना आयोग की शरण ली। राज्य सूचना आयोग में मामले की सुनवाई की गई। तहसीलदार को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस भेजा गया।
विज्ञापन
तहसीलदार द्वारा दिए गए जवाब से संतुष्ट न होने पर राज्य सूचना आयुक्त गजेंद्र यादव ने कड़ा रुख अपनाया। मामले की सुनवाई करते हुए पारित आदेश में लिखा कि मामले को लंबित रखने का कोई औचित्य नहीं है। आयोग द्वारा 25 हजार रुपये का जुर्माना तत्कालीन तहसीलदार पर लगाया गया। डीएम और कोषाधिकारी को दिए गए आदेश में कहा गया है कि तत्कालीन तहसीलदार सदर नरेंद्र कुमार के वेतन से तीन किस्तों में जुर्माने की धनराशि वसूल की जाए और राजकोष में जमा कराई जाए।
विज्ञापन
पहले भी लग चुके हैं जुर्माने
सूचना अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गईं सूचनाएं न देने पर पहले भी अधिकारियों पर कार्रवाई हो चुकी है। पीड़ित को सूचनाएं उपलब्ध न कराने पर राज्य सूचना आयोग पहले भी कड़ा रूख अपना चुका है। बीएसए, डीआईओएस, सीएमओ, तहसीलदार पर 25-25 हजार रुपये का पूर्व में भी जुर्माना लग चुका है।
आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी पीड़ित को उपलब्ध कराने के निर्देश सभी विभागाध्यक्षों को दिए जा चुके हैं। कईबार ऐसी जानकारी मांगी जाती है जो दिया जाना संभव नहीं है। ऐसे में पीड़ित पक्ष राज्य सूचना आयोग तक जाता है। जानकारी न देने वाले संबंधितों के खिलाफ स्थानीय स्तर पर भी कार्रवाई की जाती है।
बीराम, एडीएम