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अब एक क्लिक में ही देख सकेंगे शिक्षक की कुंडली
Updated Fri, 31 Aug 2018 11:25 PM IST
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मैनपुरी। माध्यमिक शिक्षा परिषद अब ऐसी व्यवस्था करने जा रहा है जिससे एक क्लिक में ही यह पता चल जाएगा कि कौन सा शिक्षक कहां तैनात है और किस विषय का अध्यापक है। विभाग ने इसके लिए शिक्षकों का डाटा ऑनलाइन करने का निर्णय लिया है। डीआईओएस ने सभी कालेज संचालकों को शिक्षकों का डाटा ऑनलाइन कराने के निर्देश दिए हैं।
माध्यमिक शिक्षा परिषद ने सभी प्रकार के स्कूलों में शिक्षकों का ब्योरा ऑनलाइन कराने का निर्णय लिया है। माध्यमिक शिक्षा परिषद के निदेशक के आदेश पर डीआईओएस सर्वेश कुमार ने जनपद के सभी शासकीय, अशासकीय, सहायता प्राप्त व वित्तविहीन कॉलेजों का 10 सितंबर तक सभी शिक्षकों का डाटा अपलोड करने के निर्देश दिए हैं।
कॉलेज संचालकों को डाटा ऑनलाइन कराने के साथ ही हार्ड कॉपी डीआईओएस कार्यालय में भी जमा करनी होगी। डीआईओएस ने यह निर्णय 24 अगस्त को माध्यमिक शिक्षा परिषद के निदेशक द्वारा जारी किए गए पत्र के आधार पर लिया है।
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इस आदेश के पीछे शासन का एक बड़ा मकसद है। शिक्षकों का डाटा ऑनलाइन कराकर विभाग के पास सभी कॉलेजों के शिक्षकों की जानकारी होगी। विभागीय सूत्रों की मानें तो विभाग पता लगाना चाहता है कि किसी भी वित्तविहीन या सहायता प्राप्त कॉलेज में कोई ऐसा शिक्षक तो तैनात नहीं है जो प्रशिक्षित न हो।
ऑनलाइन डाटा दर्ज होने पर शिक्षक की योग्यता की जानकारी विभाग को मिल जाएगी। वहीं बोर्ड परीक्षा के दौरान शिक्षक किस विषय का अध्यापक है यह भी डिटेल बोर्ड के पास होगी तो कॉलेज संचालक उसका फर्जी विषय बताकर संबंधित विषय में उसकी ड्यूटी नहीं लगा सकेंगे।
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माध्यमिक शिक्षा परिषद ने सभी प्रकार के स्कूलों में शिक्षकों का ब्योरा ऑनलाइन कराने का निर्णय लिया है। माध्यमिक शिक्षा परिषद के निदेशक के आदेश पर डीआईओएस सर्वेश कुमार ने जनपद के सभी शासकीय, अशासकीय, सहायता प्राप्त व वित्तविहीन कॉलेजों का 10 सितंबर तक सभी शिक्षकों का डाटा अपलोड करने के निर्देश दिए हैं।
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कॉलेज संचालकों को डाटा ऑनलाइन कराने के साथ ही हार्ड कॉपी डीआईओएस कार्यालय में भी जमा करनी होगी। डीआईओएस ने यह निर्णय 24 अगस्त को माध्यमिक शिक्षा परिषद के निदेशक द्वारा जारी किए गए पत्र के आधार पर लिया है।
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इस आदेश के पीछे शासन का एक बड़ा मकसद है। शिक्षकों का डाटा ऑनलाइन कराकर विभाग के पास सभी कॉलेजों के शिक्षकों की जानकारी होगी। विभागीय सूत्रों की मानें तो विभाग पता लगाना चाहता है कि किसी भी वित्तविहीन या सहायता प्राप्त कॉलेज में कोई ऐसा शिक्षक तो तैनात नहीं है जो प्रशिक्षित न हो।
ऑनलाइन डाटा दर्ज होने पर शिक्षक की योग्यता की जानकारी विभाग को मिल जाएगी। वहीं बोर्ड परीक्षा के दौरान शिक्षक किस विषय का अध्यापक है यह भी डिटेल बोर्ड के पास होगी तो कॉलेज संचालक उसका फर्जी विषय बताकर संबंधित विषय में उसकी ड्यूटी नहीं लगा सकेंगे।